15 अक्टूबर 2026
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आशा भोसले को याद कर भावुक हुए रजा मुराद, बोले — 'उन जैसी गायिका दोबारा नहीं होगी'

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आशा भोसले को याद कर भावुक हुए रजा मुराद, बोले — 'उन जैसी गायिका दोबारा नहीं होगी'

सारांश

दिग्गज अभिनेता रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर आशा भोसले को भावुक श्रद्धांजलि दी — 60 साल तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली इस अमर गायिका का 92 वर्ष की आयु में निधन हुआ था। मुराद ने लिखा, उनसे मिलना सपने के सच होने जैसा था।

मुख्य बातें

अभिनेता रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर आशा भोसले के साथ पुरानी तस्वीर साझा कर भावुक श्रद्धांजलि दी।
मुराद ने लिखा — 'उनसे मिलना सपने के सच होने जैसा था, ऐसी अमर गायिका की जगह कोई नहीं ले सकता।' आशा भोसले ने 1948 में फिल्म 'चुनरिया' से प्लेबैक सिंगर के रूप में करियर शुरू किया था।
फिल्म 'उमराव जान' (1981) के गीत 'इन आँखों की मस्ती' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था।
आशा भोसले का 12 अप्रैल को 92 वर्ष की आयु में सीने के संक्रमण से निधन हो गया था।

दिग्गज अभिनेता रजा मुराद ने दिवंगत गायिका आशा भोसले को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी सुरीली आवाज़ ने 60 साल से भी अधिक समय तक लाखों श्रोताओं के दिलों पर राज किया। 15 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस भावुक प्रतिक्रिया में मुराद ने माना कि आशा भोसले की जगह भारतीय संगीत जगत में कोई नहीं ले सकता।

इंस्टाग्राम पोस्ट में छलका दर्द

रजा मुराद ने आशा भोसले के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर इंस्टाग्राम पर साझा की, जिसमें उन्होंने उनसे मुलाकात का अनुभव ताज़ा किया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'मेरी सबसे पसंदीदा गायिका दिवंगत आशा भोसले जी के साथ, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से 60 साल से भी ज़्यादा समय तक लाखों फैंस का दिल जीता। उनसे मिलना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। ऐसी अमर गायिका की जगह कोई नहीं ले सकता, उनकी आवाज़ में जादू था।'

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैली और प्रशंसकों ने कमेंट्स में भोसले को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।

आशा भोसले का असाधारण सफर

आशा भोसले भारतीय सिनेमा की सर्वाधिक प्रतिभाशाली प्लेबैक गायिकाओं में गिनी जाती थीं। उन्होंने 1948 में फिल्म 'चुनरिया' के गीत 'सावन आया' से हिंदी सिनेमा में अपना सफर शुरू किया था। शुरुआती दौर में उन्हें वे गाने मिलते थे जिन्हें अन्य गायिकाएँ ठुकरा देती थीं, लेकिन उन्होंने अपनी अनूठी शैली और अथक परिश्रम से एक विशेष पहचान बनाई।

उन्होंने शास्त्रीय संगीत, गज़ल, कैबरे, पॉप और रॉक — हर विधा में महारत हासिल की। 'आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा', 'पिया तू अब तो आजा', 'दम मारो दम', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' और 'इन आँखों की मस्ती' जैसे गीत उनकी विरासत के अमर हिस्से हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार और विरासत

फिल्म 'उमराव जान' (1981) के गीत 'इन आँखों की मस्ती' के लिए आशा भोसले को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया था। यह सम्मान उनकी बहुआयामी प्रतिभा का प्रमाण था। उन्होंने रोमांटिक धुनों से लेकर गज़लों और शास्त्रीय रचनाओं तक, हर रंग में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

निधन और श्रद्धांजलियाँ

आशा भोसले का 12 अप्रैल को सीने में संक्रमण (इन्फेक्शन) के बाद 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके जाने से भारतीय संगीत जगत में एक ऐसी रिक्तता आई है जिसे भर पाना असंभव माना जा रहा है। रजा मुराद जैसे कई दिग्गज कलाकार समय-समय पर उन्हें याद कर उनकी अद्वितीय विरासत को जीवित रखे हुए हैं। गौरतलब है कि आशा भोसले छह दशकों से अधिक के अपने करियर में संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों की पसंदीदा गायिका बनी रहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रजा मुराद ने आशा भोसले को श्रद्धांजलि कैसे दी?
रजा मुराद ने इंस्टाग्राम पर आशा भोसले के साथ अपनी पुरानी तस्वीर साझा कर उन्हें भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि उनसे मिलना किसी सपने के सच होने जैसा था और ऐसी अमर गायिका की जगह कोई नहीं ले सकता।
आशा भोसले का निधन कब और कैसे हुआ?
आशा भोसले का 12 अप्रैल को सीने में संक्रमण के कारण 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वे भारतीय सिनेमा की सबसे मशहूर प्लेबैक गायिकाओं में से एक थीं।
आशा भोसले ने अपना करियर कब शुरू किया था?
आशा भोसले ने 1948 में फिल्म 'चुनरिया' के गीत 'सावन आया' से हिंदी सिनेमा में बतौर प्लेबैक सिंगर अपना करियर शुरू किया था। शुरुआती दौर में उन्हें वे गाने मिलते थे जिन्हें अन्य गायिकाएँ ठुकरा देती थीं।
आशा भोसले को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार किस गाने के लिए मिला था?
आशा भोसले को फिल्म 'उमराव जान' (1981) के गीत 'इन आँखों की मस्ती' के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया था।
आशा भोसले के सबसे प्रसिद्ध गाने कौन-से हैं?
आशा भोसले के सबसे प्रसिद्ध गानों में 'आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा', 'पिया तू अब तो आजा', 'दम मारो दम', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' और 'इन आँखों की मस्ती' शामिल हैं। उन्होंने शास्त्रीय, गज़ल, कैबरे, पॉप और रॉक — हर विधा में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
राष्ट्र प्रेस
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