आशा भोसले का संगीत सदैव जीवित रहेगा: राष्ट्रपति मुर्मु का शोक

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आशा भोसले का संगीत सदैव जीवित रहेगा: राष्ट्रपति मुर्मु का शोक

सारांश

आशा भोसले के निधन ने संगीत जगत को गहरा सदमा पहुँचाया है। राष्ट्रपति मुर्मु और उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने उनके योगदान को याद किया। उनकी अमर धुनें हमेशा हमारे दिलों में गूंजती रहेंगी।

Key Takeaways

  • आशा भोसले का निधन संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है।
  • उनका संगीत और आवाज हमेशा अमर रहेंगे।
  • राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति ने उनके योगदान को याद किया।
  • आशा जी की बहुमुखी प्रतिभा ने भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • उनकी यादें और संगीत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे।

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को प्रसिद्ध प्लेबैक गायिका आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस अद्वितीय गायिका ने कई दशकों तक भारतीय संगीत में योगदान दिया और उनका संगीत हमेशा अमर रहेगा।

रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में 93 वर्ष की आयु में आशा भोसले का निधन हुआ।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति मुर्मु ने लिखा, "आशा भोसले के निधन ने संगीत की दुनिया में एक विशाल रिक्तता पैदा कर दी है। उनके शानदार करियर ने भारत में संगीत के एक संपूर्ण युग को परिभाषित किया है। उनके साथ व्यक्तिगत मुलाकातों की मेरी बहुत प्यारी यादें हैं।"

राष्ट्रपति ने आगे कहा, "उन्होंने एक कलाकार और इंसान के रूप में अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी। उनकी सुरीली और सदाबहार आवाज ने भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उनका संगीत हमेशा अमर रहेगा। उनका निधन संगीत प्रेमियों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। मैं उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।"

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी गायिका के निधन पर शोक जताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा, "महान गायिका आशा भोसले जी के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।"

दिवंगत गायिका की बहुमुखी प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "आशा जी की बहुमुखी आवाज ने विभिन्न शैलियों में गाने का अद्वितीय मौका प्रदान किया। उन्होंने दिल को छू लेने वाली गज़लों और पारंपरिक भजनों में भी महारत हासिल की और भारतीय संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ी। उनकी सदाबहार आवाज और संगीत की विरासत लाखों लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी और नई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। ओम शांति।"

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "आशा भोसले जी के निधन से गहरा दुख हुआ, जो भारत की सबसे प्रसिद्ध और बहुमुखी आवाजों में से एक थीं।"

गायिका के सफर की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, "दशकों तक फैला उनका असाधारण संगीत का सफर हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता रहा और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। उनकी दिल को छू लेने वाली धुनों और जोशीली रचनाओं में एक सदाबहार चमक थी। मैं उनके साथ हुई मुलाकातों को हमेशा संजोकर रखूंगा।"

उन्होंने आगे कहा, "उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी संवेदनाएं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।"

Point of View

बल्कि भारतीय संगीत की एक युग की समाप्ति है। उनके योगदान ने संगीत के विभिन्न शैलियों को समृद्ध किया और उनकी आवाज ने लाखों दिलों को छुआ। यह समय एकत्रित होकर उनकी याद में श्रद्धांजलि अर्पित करने का है।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

आशा भोसले का निधन कब हुआ?
आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल को हुआ।
राष्ट्रपति ने आशा भोसले के निधन पर क्या कहा?
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि उनका संगीत हमेशा अमर रहेगा और उनके निधन से संगीत की दुनिया में एक बड़ा खालीपन आया है।
उपराष्ट्रपति ने आशा भोसले के बारे में क्या कहा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनकी बहुमुखी प्रतिभा की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने आशा भोसले के निधन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके निधन को गहरा दुख बताया और उनके संगीत के सफर की सराहना की।
आशा भोसले की विशेषता क्या थी?
आशा भोसले की बहुमुखी आवाज थी, जिसने उन्हें विभिन्न शैलियों में गाने की क्षमता प्रदान की।
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