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आशा ताई की मधुर आवाज का अंत, ‘अभी न जाओ छोड़कर’ गाना अब भी दिलों में जिंदा

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आशा ताई की मधुर आवाज का अंत, ‘अभी न जाओ छोड़कर’ गाना अब भी दिलों में जिंदा

सारांश

आशा भोसले का निधन भारतीय संगीत जगत में एक बड़ा शोक है। उनकी जादुई आवाज और अमर गाने हमेशा के लिए हमारे दिलों में बसे रहेंगे। जानें उनके संगीत सफर के बारे में।

मुख्य बातें

आशा भोसले का संगीत सफर नौ साल उनका गाना 'अभी न जाओ छोड़कर' एक अमर हिट है।
उन्होंने सात दशकों तक भारतीय संगीत को रोशन किया।
आशा ताई ने हर शैली में गाने गाए।
उनकी आवाज़ में जादू था, जो हर दिल को छू जाता था।

मुंबई, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वह स्वर हमेशा के लिए मौन हो गया, जिसने कभी गुनगुनाया था ‘अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं...' अपनी अद्वितीय आवाज के साथ भारतीय संगीत जगत को सात दशकों तक रोशन करने वाली आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए हुए गाने, किस्से और यादें हमेशा उनके प्रशंसकों के लिए खास बनी रहेंगी।

आशा भोसले का संगीत का सफर नौ साल92 वर्षआशा ताई के निधन से न केवल बॉलीवुड, बल्कि पूरे संगीत उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके गाए गाने 'अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं'... इस दुख को और भी गहरा कर देता है। उनकी आवाज अब कभी नहीं गूंजेगी, लेकिन उनके गाने सदियों तक लोगों के दिलों में बसेंगे।

संगीत के प्रति अपने समर्पण को दर्शाते हुए आशा भोसले ने एक सिंगिंग रियलिटी शो में अपनी अंतिम इच्छा भी व्यक्त की थी, जिसमें उन्होंने कहा था, ''मैं चाहती हूं कि गाते-गाते मेरी मौत हो जाए, मुझे और कुछ नहीं चाहिए।''

उन्होंने 1943 में अपना पहला फिल्मी गाना रिकॉर्ड किया। शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादातर कैबरे और डांस नंबर मिले, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर हर शैली में महारत हासिल कर ली। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के बाद वह हिंदी सिनेमा की एक प्रमुख गायिका बन गईं।

आशा भोसले ने न केवल फिल्मी गीत गाए, बल्कि गज़लें, भजन और शास्त्रीय संगीत भी प्रस्तुत किए। फिल्म ‘उमराव जान’ में उनकी गज़लें आज भी लोगों की पसंदीदा हैं। आशा भोसले ने हजारों गाने गाए और हर पीढ़ी को अपनी आवाज से जोड़ा।

'अभी न जाओ छोड़कर' उनके अमर गानों में से एक है, जो 1961 में रिलीज फिल्म ‘हम दोनों’ में देव आनंद और साधना पर फिल्माया गया था। मोहम्मद रफी और आशा भोसले की जोड़ी ने इसे गाया था। जयदेव का संगीत और साहिर लुधियानवी के शब्दों वाला यह चार मिनट आठ सेकंड का गाना रिलीज होते ही सुपरहिट हो गया।

यह गाना जुदाई से पहले की मीठी भावनाओं को बेहद कोमल तरीके से व्यक्त करता है। आज भी यह गाना रेडियो, यूट्यूब, स्टेज शो और सोशल मीडिया पर बार-बार सुना जाता है। श्रोता इसे सुनकर भावुक हो जाते हैं।

आशा भोसले अपने लंबे करियर में केवल रोमांटिक गानों तक सीमित नहीं थीं; उन्होंने चुलबुले, गंभीर गज़लें, भजन और पार्टी सॉन्ग्स भी गाए। उनकी आवाज में एक अनोखा जादू था, जो सुनने वाले के दिल को छू देता था। उन्होंने सैकड़ों फिल्मों के लिए गाया और हर गाने को अपनी पहचान बना दिया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि विश्व स्तर पर एक प्रतिष्ठा दिलाई। उनके गाने हमेशा हमारे साथ रहेंगे, जो हमें उनके संगीत की दुनिया में ले जाते रहेंगे।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आशा भोसले ने कब अपना पहला गाना गाया?
आशा भोसले ने अपना पहला फिल्मी गाना 1943 में रिकॉर्ड किया।
आशा भोसले के सबसे प्रसिद्ध गाने कौन से हैं?
'अभी न जाओ छोड़कर' उनके सबसे प्रसिद्ध गानों में से एक है।
आशा भोसले ने किस प्रकार के गाने गाए?
आशा भोसले ने फिल्मी गीत, गज़लें, भजन और शास्त्रीय संगीत गाए।
उनका अंतिम गाना क्या था?
आशा भोसले ने अपनी अंतिम इच्छा में कहा था कि वे गाते-गाते ही दुनिया छोड़ना चाहती थीं।
आशा भोसले का संगीत करियर कितना लंबा था?
उनका संगीत करियर लगभग 70 वर्ष लंबा था।
राष्ट्र प्रेस
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