18 जुलाई 2026
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गंडूषा से करें दिन की शुरुआत: आयुष मंत्रालय ने बताए आयुर्वेदिक ओरल केयर के फायदे

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गंडूषा से करें दिन की शुरुआत: आयुष मंत्रालय ने बताए आयुर्वेदिक ओरल केयर के फायदे

सारांश

आयुष मंत्रालय ने 18 जुलाई को गंडूषा को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सलाह दी — यह पारंपरिक आयुर्वेदिक माउथ रिंस प्रैक्टिस प्यास नियंत्रण, स्वाद-बोध और मुंह की स्वच्छता में सहायक मानी जाती है। यह कदम सरकार की आयुर्वेद-आधारित जन-स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम का हिस्सा है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 18 जुलाई 2026 को एक्स पर गंडूषा — पारंपरिक आयुर्वेदिक माउथ रिंस — अपनाने की सलाह दी।
गंडूषा अत्यधिक प्यास नियंत्रण , स्वाद-बोध में सुधार और मुंह की प्राकृतिक सफाई में सहायक बताई गई।
एक दिन पूर्व मंत्रालय ने अर्धचक्रासन की जानकारी साझा की थी, जो रीढ़ की लचीलापन और सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस प्रबंधन में उपयोगी है।
मंत्रालय ने गर्भावस्था के दौरान एंटीनेटल चेक-अप , आराम और संतुलित जीवनशैली पर भी ज़ोर दिया।
यह पहल पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक दिनचर्या से जोड़ने के सरकार के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

आयुष मंत्रालय ने 18 जुलाई 2026 को मुंह की सेहत के लिए पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति गंडूषा अपनाने की सलाह दी, जिसे एक सचेत दैनिक आदत के रूप में दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया गया। मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा पोस्ट में इस पुरानी माउथ रिंस प्रैक्टिस के कई स्वास्थ्य लाभ गिनाए।

गंडूषा क्या है और कैसे काम करती है

गंडूषा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक ओरल केयर विधि है जिसमें मुंह में तरल पदार्थ भरकर कुछ देर तक रखा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास मुंह की समग्र सेहत को बेहतर बनाने में सहायक है। मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अपने दिन की शुरुआत गंडूषा से करें, जो एक पुरानी आयुर्वेदिक ओरल केयर प्रैक्टिस है और मुंह की पूरी सेहत में मदद करती है।'

मुख्य स्वास्थ्य लाभ

मंत्रालय ने बताया कि यह पारंपरिक माउथ रिंस अत्यधिक प्यास को नियंत्रित करने, स्वाद-बोध को तीव्र बनाने और मुंह की प्राकृतिक स्वच्छता बनाए रखने में मदद करती है। मंत्रालय के अनुसार, 'एक हेल्दी दिनचर्या के हिस्से के तौर पर यह पारंपरिक माउथ रिंस ज़्यादा प्यास को रोकने, स्वाद समझने की क्षमता को बेहतर बनाने और नैचुरली मुंह की सफाई बनाए रखने में मदद करता है।'

आयुष मंत्रालय की व्यापक स्वास्थ्य पहल

गंडूषा की सलाह आयुष मंत्रालय की उस व्यापक जागरूकता मुहिम का हिस्सा है जिसके तहत मंत्रालय नियमित रूप से पारंपरिक भारतीय स्वास्थ्य पद्धतियों को प्रोत्साहित कर रहा है। इससे एक दिन पहले 17 जुलाई को मंत्रालय ने अर्धचक्रासन (हाफ व्हील पोज़) की जानकारी साझा की थी, जिसे रीढ़ की हड्डी की लचीलापन बढ़ाने, पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करने और बेहतर पोस्चर के लिए उपयोगी बताया गया। मंत्रालय के अनुसार, सही मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के प्रबंधन में भी सहायता मिल सकती है।

महिला स्वास्थ्य पर भी मंत्रालय का संदेश

मंत्रालय ने हाल ही में महिलाओं के लिए संतुलित जीवनशैली पर भी जोर दिया था। मंत्रालय के अनुसार, 'नारी बनने से लेकर माँ बनने तक एक बैलेंस्ड लाइफस्टाइल अपनाना माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है।' इसमें पर्याप्त आराम, उचित स्वच्छता, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय पर एंटीनेटल चेक-अप को स्वस्थ गर्भावस्था के लिए आवश्यक बताया गया।

आगे क्या

आयुष मंत्रालय की यह पहल पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक दैनिक जीवन से जोड़ने के सरकार के व्यापक प्रयास को दर्शाती है। मंत्रालय का संदेश है कि 'आज की छोटी-छोटी, ध्यान देने वाली आदतें आपके और आपके बच्चे के लिए एक हेल्दी कल बनाने में मदद कर सकती हैं।' आने वाले दिनों में मंत्रालय की ओर से ऐसी और आयुर्वेदिक प्रैक्टिस पर जागरूकता अभियान जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या ये पोस्ट नैदानिक साक्ष्य के साथ आती हैं या केवल परंपरा के आधार पर। गंडूषा जैसी प्रैक्टिस के दावों को — जैसे प्यास नियंत्रण और स्वाद-बोध — स्वतंत्र शोध-समर्थित स्रोतों से जोड़ा जाए तो इनकी विश्वसनीयता और बढ़ेगी। आलोचकों का मानना है कि आयुर्वेदिक सलाह को आधुनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के साथ समन्वित किया जाना चाहिए, न कि उनके विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंडूषा क्या है और इसे कैसे किया जाता है?
गंडूषा एक पारंपरिक आयुर्वेदिक ओरल केयर पद्धति है जिसमें मुंह में तरल पदार्थ — आमतौर पर तेल या औषधीय काढ़ा — भरकर कुछ देर तक रखा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इसे दिन की शुरुआत में दिनचर्या के हिस्से के रूप में अपनाने की सलाह दी जाती है।
गंडूषा के क्या फायदे हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गंडूषा अत्यधिक प्यास को नियंत्रित करने, स्वाद-बोध को बेहतर बनाने और मुंह की प्राकृतिक स्वच्छता बनाए रखने में सहायक है। यह मुंह की समग्र सेहत के लिए उपयोगी पारंपरिक उपाय माना जाता है।
आयुष मंत्रालय ने गंडूषा की सलाह कब दी?
आयुष मंत्रालय ने 18 जुलाई 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से गंडूषा अपनाने की सलाह साझा की। यह मंत्रालय की नियमित आयुर्वेदिक स्वास्थ्य जागरूकता श्रृंखला का हिस्सा था।
अर्धचक्रासन के क्या फायदे हैं जो आयुष मंत्रालय ने बताए?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्धचक्रासन (हाफ व्हील पोज़) रीढ़ की हड्डी की लचीलापन बढ़ाता है, पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है और बेहतर पोस्चर में सहायक है। सही मार्गदर्शन में नियमित अभ्यास से सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस के प्रबंधन में भी मदद मिल सकती है।
क्या गंडूषा को रोज़ाना करना सुरक्षित है?
आयुष मंत्रालय ने गंडूषा को एक सुरक्षित दैनिक आदत के रूप में सुझाया है और इसे स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह दी है। हालाँकि, किसी भी नई स्वास्थ्य पद्धति को अपनाने से पहले योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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