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ऑयल पुलिंग: आयुर्वेद की प्राचीन विधि जो दांतों और गट स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

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ऑयल पुलिंग: आयुर्वेद की प्राचीन विधि जो दांतों और गट स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

सारांश

आयुर्वेद के एक अद्भुत उपाय, ऑयल पुलिंग के बारे में जानें जो न केवल आपके दांतों को स्वस्थ रखता है, बल्कि आपकी गट हेल्थ को भी बेहतर बनाता है। इस प्राचीन तकनीक के लाभ और उपयोग विधि जानने के लिए पढ़ें।

मुख्य बातें

ऑयल पुलिंग एक प्राचीन आयुर्वेदिक विधि है।
यह दांतों और मसूड़ों की सेहत में सुधार करता है।
मुँह से हानिकारक बैक्टीरिया को निकालने में मदद करता है।
इससे मुंह की दुर्गंध में कमी आती है।
नारियल और तिल का तेल सबसे अधिक लाभकारी होते हैं।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान की तेज़ गति वाली जीवनशैली में, लोग अपनी स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पा रहे हैं, जिसके कारण जल्दी उम्र में कई प्रकार की बीमारियाँ शरीर को प्रभावित करने लगती हैं। इस संदर्भ में, अब लोग आयुर्वेद के उपायों को अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

आयुर्वेद के उपचारों में एक महत्वपूर्ण उपाय है ऑयल पुलिंग, जिसे आयुर्वेद में 'कवला' या 'गंडूषा' के नाम से जाना जाता है। यह एक प्राचीन तकनीक है जिसका उद्देश्य मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकालना और दांतों, मसूड़ों, जीभ और गले को स्वस्थ बनाए रखना है। यदि इसे नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह मुंह और पेट को स्वस्थ रखने में सहायक होता है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, मुंह और गट हेल्थ का संबंध पूरे शरीर से जुड़ा है। हम जो कुछ भी खाते हैं, वह पहले मुंह से होकर हमारे शरीर में जाता है। यदि मुंह में गंदगी, बैक्टीरिया या संक्रमण है, तो इसका प्रभाव पेट, पाचन और अंततः पूरे शरीर पर पड़ता है। मुंह में मौजूद रोगजनक बैक्टीरिया कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ये दांतों में सड़न, मसूड़ों में सूजन, सांसों की दुर्गंध और लार से संबंधित समस्याओं का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, ये बैक्टीरिया भोजन के माध्यम से पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। ऑयल पुलिंग इन समस्याओं का समाधान करती है।

जब ऑयल पुलिंग के दौरान तेल को मुंह में घुमाया जाता है, तो इसकी चिपचिपी प्रकृति हानिकारक बैक्टीरिया को आकर्षित करती है। कुछ समय बाद, ये बैक्टीरिया तेल में फंस जाते हैं और कुल्ला करने के बाद बाहर निकल जाते हैं। यही कारण है कि नियमित रूप से ऑयल पुलिंग करने से दांत, मसूड़े, जीभ और गला साफ और स्वस्थ रहते हैं। इससे मुंह की दुर्गंध में कमी आती है, मसूड़ों की सूजन में कमी आती है और दांतों में कैविटी की समस्याएँ भी कम हो जाती हैं।

ऑयल पुलिंग का तरीका बहुत सरल है। एक बड़ा चम्मच तेल लेकर उसे मुंह में डालें और पानी की तरह धीरे-धीरे कुल्ला करें। इसे 15 मिनट तक करना चाहिए। इस दौरान तेल को बिल्कुल भी निगलना नहीं है। जब तेल पतला होकर दूध जैसा सफेद हो जाए, तो उसे थूक दें और गुनगुने पानी से मुंह को अच्छी तरह साफ कर लें। इसे सुबह खाली पेट करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस समय शरीर और मुंह सबसे अधिक रिसेप्टिव होते हैं।

ऑयल पुलिंग के लिए नारियल तेल, तिल का तेल, या सूरजमुखी का तेल का उपयोग किया जा सकता है। इनमें से नारियल और तिल का तेल सबसे अधिक लाभकारी माने जाते हैं। हालांकि, यदि किसी को दांतों की गंभीर समस्या है, मुंह में घाव हैं, या ऑयल पुलिंग के बाद जीभ पर सफेद परत दिखाई दे, तो इसे तुरंत रोक देना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समग्र स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑयल पुलिंग के क्या फायदे हैं?
यह दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है, मुंह की दुर्गंध को कम करता है, और पाचन तंत्र को भी सुधारता है।
ऑयल पुलिंग करने का सही तरीका क्या है?
एक चम्मच तेल लेकर उसे मुंह में डालें और 15 मिनट तक कुल्ला करें, फिर थूककर गुनगुने पानी से मुंह धो लें।
कौन सा तेल ऑयल पुलिंग के लिए सबसे अच्छा है?
नारियल तेल और तिल का तेल ऑयल पुलिंग के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं।
क्या ऑयल पुलिंग सभी के लिए सुरक्षित है?
यदि आपको दांतों की गंभीर समस्या है या मुंह में घाव हैं, तो इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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