आयुर्वेद की पुरानी तकनीक: ऑयल पुलिंग, दांतों के साथ गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद

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आयुर्वेद की पुरानी तकनीक: ऑयल पुलिंग, दांतों के साथ गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद

सारांश

आयुर्वेदिक ऑयल पुलिंग एक प्राचीन तकनीक है जो न केवल दांतों की सेहत को सुधारती है, बल्कि गट हेल्थ को भी बूस्ट करती है। जानें इसके लाभ और उपयोग विधि।

मुख्य बातें

ऑयल पुलिंग एक प्राचीन तकनीक है जो मुंह और गट हेल्थ में सुधार करती है।
इसकी नियमितता से दांतों की सेहत में सुधार होता है।
15 मिनट तक तेल को कुल्ला करना चाहिए।
नारियल और तिल का तेल सबसे लाभकारी हैं।
सेहत संबंधी गंभीर समस्याओं में डॉक्टर से सलाह लें।

नई दिल्ली, 22 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज़ रफ़्तार वाली ज़िंदगी में लोग अपनी सेहत को अनदेखा कर रहे हैं, जिससे कम उम्र में ही कई प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न होने लगी हैं। ऐसे में लोग अब आयुर्वेदिक उपायों को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण उपाय है ऑयल पुलिंग, जिसे 'कवला' या 'गंडूषा' के नाम से भी जाना जाता है। यह तकनीक हजारों साल पुरानी है। इसका उद्देश्य मुंह में उपस्थित हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकालना और दांतों, मसूड़ों, जीभ और गले को स्वस्थ रखना है। यदि इसे नियमित दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो यह मुंह और पेट को स्वस्थ रखने में सहायता कर सकता है।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, मुंह और गट हेल्थ का संबंध पूरे शरीर से होता है। हम जो भी खाद्य पदार्थ खाते हैं, वह सबसे पहले मुंह से गुजरता है। यदि मुंह में गंदगी, बैक्टीरिया या संक्रमण है, तो इसका प्रभाव पेट, पाचन और धीरे-धीरे पूरे शरीर पर पड़ता है। मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकते हैं। ये दांतों में सड़न, मसूड़ों में सूजन, सांसों की बदबू और लार से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ये बैक्टीरिया खाने के साथ पेट में पहुंचकर पाचन तंत्र को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऑयल पुलिंग इसी समस्या को हल करने का एक उपाय है।

जब ऑयल पुलिंग के दौरान तेल को मुंह में घुमाया जाता है, तो तेल की चिपचिपी प्रकृति हानिकारक बैक्टीरिया को अपनी ओर आकर्षित करती है। कुछ समय बाद ये बैक्टीरिया तेल में फंस जाते हैं और कुल्ला करने के बाद बाहर निकल जाते हैं। यही कारण है कि नियमित रूप से ऑयल पुलिंग करने से दांत, मसूड़े, जीभ और गला साफ और स्वस्थ रहते हैं। इससे मुंह की दुर्गंध कम होती है, मसूड़ों की सूजन में कमी आती है और दांतों में कैविटी की समस्या भी घट सकती है।

ऑयल पुलिंग करने की विधि बेहद सरल है। एक बड़ा चम्मच तेल लेकर उसे मुंह में डालें और पानी की तरह धीरे-धीरे कुल्ला करें। इसे 15 मिनट तक करना चाहिए। इस दौरान तेल को बिल्कुल भी निगलना नहीं है। जब तेल पतला होकर दूध जैसा सफेद हो जाए, तो उसे थूक दें और गुनगुने पानी से मुंह को अच्छे से धो लें। इसे सुबह खाली पेट करना सबसे लाभकारी माना जाता है, क्योंकि उस समय शरीर और मुंह सबसे अधिक रिसेप्टिव होते हैं।

ऑयल पुलिंग के लिए नारियल का तेल, तिल का तेल, या सूरजमुखी का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें से नारियल और तिल का तेल सबसे अधिक प्रभावी माने जाते हैं। हालांकि, यदि किसी को दांतों की गंभीर समस्या है, मुंह में घाव हैं, या ऑयल पुलिंग के बाद जीभ पर सफेद परत दिखाई देती है, तो इसे तुरंत रोक देना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऑयल पुलिंग, एक सरल और प्रभावी तकनीक है जो न सिर्फ दांतों की देखभाल करती है बल्कि गट हेल्थ को भी सुधारने में सहायक है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑयल पुलिंग के फायदे क्या हैं?
यह दांतों की सेहत में सुधार, मसूड़ों की सूजन में कमी और मुंह की दुर्गंध को कम करने में मदद करता है।
ऑयल पुलिंग का सही तरीका क्या है?
एक बड़ा चम्मच तेल लेकर उसे मुंह में डालें और 15 मिनट तक कुल्ला करें।
कौन सा तेल ऑयल पुलिंग के लिए सबसे अच्छा है?
नारियल और तिल का तेल ऑयल पुलिंग के लिए सबसे प्रभावी माने जाते हैं।
क्या ऑयल पुलिंग सभी के लिए सुरक्षित है?
यदि किसी को दांतों की गंभीर समस्या है या मुंह में घाव हैं, तो इसे करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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