18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राम मंदिर किसी सरकार की उपलब्धि नहीं, न्यायालय का फैसला है: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राम मंदिर किसी सरकार की उपलब्धि नहीं, न्यायालय का फैसला है: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

सारांश

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अयोध्या में स्पष्ट किया कि राम मंदिर किसी सरकार या दल की उपलब्धि नहीं — यह 'राम लल्ला विराजमान' के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का परिणाम है। साथ ही उन्होंने 375 विधानसभा क्षेत्रों में चली 'गविष्टि यात्रा' और गौ संरक्षण के व्यापक उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला।

मुख्य बातें

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 18 जुलाई को अयोध्या दौरे के दौरान राम मंदिर पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उनके अनुसार, राम मंदिर निर्माण किसी सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है।
विवाद 'राम लल्ला विराजमान' की ओर से लड़ा गया था और मुख्य गर्भगृह पर विराजमान होने का अधिकार भी उन्हीं का है।
'गविष्टि यात्रा' के तहत शंकराचार्य लगभग 375 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं से संवाद कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि गौ माता के बिना राम जन्मभूमि की पुनर्प्राप्ति संभव न होती; गौ संरक्षण को सनातन धर्म से अभिन्न बताया।

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 18 जुलाई को अयोध्या दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि राम मंदिर का निर्माण किसी सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह विवाद 'राम लल्ला विराजमान' की ओर से लड़ा गया था और सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय भी उन्हीं के पक्ष में आया।

अयोध्या की आध्यात्मिक महत्ता

शंकराचार्य ने कहा कि अयोध्या केवल एक प्राचीन नगर नहीं, बल्कि सनातन धर्म की आधारभूमि है। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम ने जब धर्म के रूप में अवतार लिया, तो अयोध्या को अपनी जन्मभूमि के रूप में चुना और यहीं से धर्म का विस्तार चारों दिशाओं में हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि इसी कारण सात मोक्षदायिनी पुरियों में अयोध्या को प्रथम स्थान प्राप्त है।

राम मंदिर और न्यायिक प्रक्रिया

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम जन्मभूमि विवाद की कानूनी लड़ाई 'राम लल्ला विराजमान' की ओर से लड़ी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भी उन्हीं के पक्ष में आया, इसलिए मंदिर के मुख्य गर्भगृह और मुख्य आसन पर विराजमान होने का अधिकार 'राम लल्ला विराजमान' का ही है। उन्होंने कहा कि कलियुग के प्रभाव से राम जन्मभूमि एक समय लुप्त हो गई थी, परंतु न्यायिक प्रक्रिया ने उसे पुनः स्थापित किया।

गविष्टि यात्रा और गौ संरक्षण

शंकराचार्य ने अपनी 'गविष्टि यात्रा' का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से वे लगभग 375 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं से संवाद कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि 'गविष्टि' का अर्थ गौ माता के जीवन और सम्मान की रक्षा करना है। उनके शब्दों में, गौ माता इस संसार में केवल मांस या दूध के लिए नहीं आई हैं — उनका उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक और विशिष्ट है।

अयोध्या और गौ माता का संबंध

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि यदि गौ माता न होतीं, तो आज राम जन्मभूमि हमारे पास न होती। उन्होंने गौ संरक्षण, सनातन धर्म के मूल्यों और धार्मिक आस्था को समाज के लिए अनिवार्य बताते हुए लोगों से इन परंपराओं के संरक्षण का आह्वान किया।

समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

शंकराचार्य ने कहा कि धर्म, न्याय और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों तक इन मूल्यों को सुरक्षित पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर की प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या राष्ट्रीय और धार्मिक विमर्श के केंद्र में बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायपालिका का है — और इस तथ्य को रेखांकित करना मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः नज़रअंदाज़ होता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण किसी सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला 'राम लल्ला विराजमान' के पक्ष में आया था, इसलिए मुख्य गर्भगृह पर उन्हीं का अधिकार है।
गविष्टि यात्रा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
'गविष्टि यात्रा' शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की एक धार्मिक-सामाजिक यात्रा है, जिसके माध्यम से वे लगभग 375 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं से संवाद कर चुके हैं। 'गविष्टि' का अर्थ गौ माता के जीवन और सम्मान की रक्षा करना है।
राम लल्ला विराजमान कौन हैं और उनका मंदिर से क्या संबंध है?
'राम लल्ला विराजमान' राम जन्मभूमि विवाद में एक वैधानिक पक्षकार थे, जिनकी ओर से सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी गई थी। न्यायालय का निर्णय उनके पक्ष में आया और शंकराचार्य के अनुसार मंदिर के मुख्य आसन पर विराजमान होने का अधिकार उन्हीं का है।
अयोध्या को सनातन धर्म में इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
शंकराचार्य के अनुसार, अयोध्या सात मोक्षदायिनी पुरियों में प्रथम स्थान पर है क्योंकि यहीं भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर धर्म को व्यावहारिक स्वरूप दिया और यहीं से उसका विस्तार चारों दिशाओं में हुआ।
शंकराचार्य ने गौ माता और राम जन्मभूमि को एक-दूसरे से कैसे जोड़ा?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि गौ माता न होतीं, तो आज राम जन्मभूमि हमारे पास न होती। उनके अनुसार गौ माता का उद्देश्य केवल दूध या मांस तक सीमित नहीं, बल्कि सनातन धर्म और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से गहराई से जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 19 घंटे पहले
  2. 6 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले