सहरसा में पिंक बस सेवा शुरू: महिला कंडक्टर के साथ 24 सीटों वाली बस, महिलाओं ने कहा 'अब डर नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने 18 जुलाई 2026 को सहरसा जिले में पिंक बस सेवा की शुरुआत की, जिसे महिला यात्रियों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। इस सेवा के तहत महिला कंडक्टर की तैनाती की गई है और बस में केवल महिला यात्रियों को सफर की सुविधा दी जा रही है, ताकि वे बिना किसी झिझक और भय के यात्रा कर सकें। महिला यात्रियों ने राज्य सरकार का आभार जताते हुए इसे सुरक्षित और सम्मानजनक सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
बस का मार्ग और समय-सारणी
फिलहाल सहरसा जिले को एक पिंक बस आवंटित की गई है। यह बस सहरसा से रहुआ, बाड़ा और नवहट्टा होते हुए मुरादपुर तक चलती है। बस प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे सहरसा से रवाना होती है और शाम करीब 4 बजे नवहट्टा से वापस सहरसा लौटती है।
बस में कुल 24 सीटें हैं। महिलाओं की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बस में महिला कंडक्टर की विशेष तैनाती की गई है, जिससे यात्रा के दौरान का माहौल और भी अधिक सहज बनता है।
महिला यात्रियों की प्रतिक्रिया
सरकारी शिक्षिका भावना ने कहा, 'राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई पिंक बस सेवा महिलाओं के लिए एक बहुत अच्छी पहल है। कामकाजी महिलाओं के पास हमेशा समय की पाबंदी होती है, और यह सेवा उन्हें सुरक्षित यात्रा करने और समय पर अपनी मंजिल तक पहुंचने में मदद करेगी। हम इस पहल के लिए राज्य सरकार का धन्यवाद करते हैं।'
एक अन्य शिक्षिका अनिता ने बताया कि पहले उन्हें प्रतिदिन स्कूल आने-जाने के लिए टेंपो और सामान्य बसों का सहारा लेना पड़ता था, जहाँ भीड़भाड़ और असुविधा के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा, 'सबसे पहले, मैं पिंक बस सेवा शुरू करने के लिए सरकार का धन्यवाद करती हूं। यह सेवा सुरक्षित है और चूंकि कंडक्टर भी एक महिला है, इसलिए महिला यात्रियों को यात्रा के दौरान और भी अधिक सुरक्षित महसूस होता है।'
महिला कंडक्टर की भूमिका
बस की महिला कंडक्टर पूजा जायसवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह सेवा शुरू की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बस में केवल महिला यात्रियों को यात्रा की सुविधा दी जा रही है, जिससे वे बिना किसी झिझक और डर के सफर कर सकें।
गौरतलब है कि सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा एक दीर्घकालिक चुनौती रही है, और इस तरह की समर्पित सेवाएँ उस अंतर को पाटने का प्रयास करती हैं। यह सेवा ऐसे समय में शुरू हुई है जब बिहार में महिला सशक्तीकरण से जुड़ी नीतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
आम जनता की माँग और आगे की राह
महिला यात्रियों ने माँग की है कि भविष्य में पिंक बसों की संख्या बढ़ाई जाए और जिले के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी इनका संचालन शुरू किया जाए। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो जिले की हजारों महिलाओं — कामकाजी महिलाओं, छात्राओं और अन्य — को इसका सीधा लाभ मिलेगा और सार्वजनिक परिवहन में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पायलट सेवा के विस्तार की दिशा में कितनी तेज़ी से कदम उठाती है।