अनुपम खेर को NIFFA ऑस्ट्रेलिया का इंडियन इंटरनेशनल सिनेमा आइकॉन अवॉर्ड, बोले — 'हर सम्मान मुझे विनम्र बनाता है'
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर को नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया (NIFFA) द्वारा प्रतिष्ठित इंडियन इंटरनेशनल सिनेमा आइकॉन अवॉर्ड से नवाज़ा गया है। भारतीय सिनेमा में चार दशकों के अतुलनीय योगदान के सम्मान में दिए गए इस पुरस्कार पर अनुपम खेर ने सोमवार, 20 जुलाई को अपने इंस्टाग्राम के ज़रिए भावुक प्रतिक्रिया साझा की।
क्या है NIFFA और यह अवॉर्ड क्यों खास है
नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया (NIFFA) ऑस्ट्रेलिया का पहला और एकमात्र वार्षिक राष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव है। यह महोत्सव भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करता है और भारतीय सिनेमा के विविध पहलुओं — स्वतंत्र फिल्मों से लेकर क्षेत्रीय कलाकारों तक — को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाता है। इंडियन इंटरनेशनल सिनेमा आइकॉन अवॉर्ड इसी महोत्सव का सर्वोच्च व्यक्तिगत सम्मान है।
अनुपम खेर की भावुक प्रतिक्रिया
अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'अवॉर्ड सिर्फ सम्मान पाने का नाम नहीं होते। ये हमें प्यार से याद दिलाते हैं कि हमें अपनी यात्रा को और भी ज़्यादा ईमानदारी-लगन के साथ आगे बढ़ाते रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे व्यक्तिगत रूप से समारोह में उपस्थित नहीं रह सके, फिर भी उनकी कृतज्ञता ऑस्ट्रेलिया तक पहुँचती है।
खेर ने NIFFA के संस्थापक अनुपम शर्मा और पूरी टीम का विशेष आभार जताया। उन्होंने लिखा, 'हर अवॉर्ड मुझे और ज़्यादा विनम्र बनाता है। यह मुझे याद दिलाता है कि सम्मान के साथ एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी आती है — लगातार सीखते, खुद को बेहतर बनाते और ऐसी कहानियाँ सुनाते रहना जो लोगों का मनोरंजन करें, उन्हें प्रेरित करें और उनके दिलों को छू सकें।' अपनी पोस्ट का समापन उन्होंने 'जय हिंद' से किया।
चार दशकों की विरासत
अनुपम खेर का फ़िल्मी सफ़र 1982 से शुरू होकर आज तक अनवरत जारी है। वे 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हॉलीवुड प्रोडक्शन में भी अपनी छाप छोड़ चुके हैं। उनका यह सम्मान भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहुँच का प्रमाण है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया सांस्कृतिक संबंध
यह पुरस्कार ऐसे समय में आया है जब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंध तेज़ी से प्रगाढ़ हो रहे हैं। NIFFA जैसे मंच इस सांस्कृतिक आदान-प्रदान को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनुपम खेर जैसे कद के कलाकार को यह सम्मान मिलना भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का क्षण है।
आगे क्या
अनुपम खेर की आगामी परियोजनाओं पर प्रशंसकों की नज़रें टिकी हैं। उनकी इस स्वीकृति ने एक बार फिर यह स्थापित किया है कि कला के प्रति समर्पण और विनम्रता ही किसी कलाकार की असली पहचान होती है।