ऑस्ट्रेलिया में 'बूंग' के साथ एनआईएफएफए का आगाज़, अनुपम खेर को मिला बड़ा सम्मान
सारांश
Key Takeaways
- बूंग का प्रीमियर एनआईएफएफए में हुआ।
- अनुपम खेर को 'इंटरनेशनल इंडियन सिनेमा आइकन अवॉर्ड' मिला।
- फेस्टिवल 18 मार्च से 5 जुलाई तक चलेगा।
- यह ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देता है।
- फिल्मों की स्क्रीनिंग और चर्चाएं होंगी।
मुंबई, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ऑस्ट्रेलिया में भारत के सिनेमा प्रेमियों के लिए एक विशेष अवसर आया है। नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल (एनआईएफएफए) का दूसरा संस्करण बुधवार से आरंभ हो गया है। इस महोत्सव की शुरुआत बाफ्टा पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म 'बूंग' के रेड-कार्पेट प्रीमियर के साथ हुई।
यह फिल्म छोटे बच्चे बूंग की दिल को छू लेने वाली कहानी है, जो अपने सबसे अच्छे मित्र के साथ अपने पिता की खोज में निकलता है। इस भव्य कार्यक्रम की मेज़बानी ग्रेटर जिलॉन्ग के मेयर ने की। ग्रेटर जिलॉन्ग और जिलॉन्ग वॉटरफ्रंट फिल्म फाउंडेशन ने इस आयोजन को सफल बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह फेस्टिवल 18 मार्च से 5 जुलाई तक चलेगा, जिसमें पूरे ऑस्ट्रेलिया में फिल्मों की स्क्रीनिंग, विशेष कार्यक्रम और फिल्म उद्योग से संबंधित गहन चर्चाएं होंगी।
एनआईएफएफए ना केवल भारतीय सिनेमा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति और कहानियों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन रहा है। इस फेस्टिवल के दौरान दर्शक कई नई और पुरानी फ़िल्मों का आनंद ले सकेंगे।
इस बार एनआईएफएफए ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख शहरों जैसे सिडनी, मेलबर्न और पर्थ का दौरा करेगा। इसके साथ ही, यह अपनी पहुँच ब्रोकन हिल और एलिस स्प्रिंग्स जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी बढ़ाएगा, ताकि अधिकतम दर्शक भारतीय सिनेमा का आनंद ले सकें। इस फेस्टिवल की एक खास बात यह है कि अभिनेता अनुपम खेर को 'इंटरनेशनल इंडियन सिनेमा आइकन अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। दशकों के अपने करियर में अनुपम खेर ने कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काम किया है, जिनमें 'द बिग सीक', 'बेंड इट लाइक बेकहम', और 'सिल्वर लाइनिंग प्लेबैक' जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।
अनुपम खेर ने इस सम्मान को लेकर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "ऑस्ट्रेलिया के नेशनल इंडियन फिल्म फेस्टिवल में 'इंटरनेशनल इंडियन सिनेमा आइकन अवॉर्ड' पाकर मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। ऑस्ट्रेलिया हमेशा से मेरे दिल में एक विशेष स्थान रखता है। कई साल पहले यहां अपनी पहली यात्रा और फिल्म शूटिंग से लेकर रसेल क्रो की अध्यक्षता वाले एएसीटीए अवार्ड्स की जूरी में शामिल होने तक, मैंने यहां के लोगों से बहुत अपनापन और भारतीय कहानियों-संस्कृति के प्रति गहरी जिज्ञासा महसूस की है। इसलिए एनआईएफएफए से यह अवॉर्ड मिलना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।"
उन्होंने आगे कहा, "इस तरह के फेस्टिवल सांस्कृतिक पुल का कार्य करते हैं और सिनेमा को भाषा, सीमाएं और समुदायों के पार ले जाते हैं।"