'बागबान' के 23 साल: अवतार गिल भावुक, रवि चोपड़ा और पूरी टीम को किया दिल से शुक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अवतार गिल ने 3 अक्टूबर 2026 को पारिवारिक ड्रामा फिल्म 'बागबान' की रिलीज के 23 साल पूरे होने पर इंस्टाग्राम पर भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने दर्शकों, निर्देशक रवि चोपड़ा और पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। 2003 में रिलीज इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में परिवार, त्याग और बुज़ुर्ग माता-पिता के सम्मान जैसे विषयों पर एक स्थायी छाप छोड़ी थी।
अवतार गिल की भावुक पोस्ट
अवतार गिल ने इंस्टाग्राम पर फिल्म के सेट की पुरानी तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे समूची स्टारकास्ट के साथ नज़र आए। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'आज ही के दिन 2003 में एक फिल्म रिलीज हुई थी, जिसने पीढ़ियों के दिलों को छुआ और परिवार, प्यार, त्याग और माता-पिता के प्रति हमारे सम्मान को लेकर एक बड़ी बातचीत शुरू की।'
गिल ने यह भी लिखा कि इस फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। उनके शब्दों में, '23 साल बाद भी बागबान दर्शकों के दिलों में जिंदा है और यह एक ऐसी कहानी है जो हर पीढ़ी से जुड़ती है।'
टीम और दर्शकों का आभार
अभिनेता ने अपनी पोस्ट में निर्देशक रवि चोपड़ा और दिग्गज निर्माता बी. आर. चोपड़ा को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने लिखा, 'मैं दिल से आभारी हूं रवि चोपड़ा जी, बी. आर. चोपड़ा जी, पूरी कास्ट और क्रू का, और सबसे ज़्यादा दर्शकों का, जिनके प्यार ने इस फिल्म को भारतीय सिनेमा में एक अमर जगह दी है। 23 साल हो गए, लेकिन इसकी भावनाएं आज भी उतनी ही गहरी हैं।'
गौरतलब है कि बागबान उन फिल्मों में से है, जो सिनेमाघरों से बाहर निकलकर भारतीय परिवारों के सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन गई — बुज़ुर्ग माता-पिता के अकेलेपन और बच्चों के दायित्व पर इसने खुलकर बहस छेड़ी थी।
फिल्म की स्टारकास्ट और विषयवस्तु
रवि चोपड़ा द्वारा निर्देशित 'बागबान' में अमिताभ बच्चन (राज मल्होत्रा), हेमा मालिनी (पूजा मल्होत्रा), सलमान खान (आलोक), महिमा चौधरी, और परेश रावल मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म माता-पिता के त्याग, बच्चों के प्रति उनके कर्तव्य और बुढ़ापे में परिवार की उपेक्षा जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर आधारित है।
यह ऐसे समय में आई थी जब हिंदी सिनेमा में पारिवारिक मूल्यों को केंद्र में रखने वाली बड़े बजट की फिल्में कम हो रही थीं। बागबान की व्यावसायिक और भावनात्मक सफलता ने साबित किया कि इस विषय पर दर्शकों की रुचि अटूट है।
23 साल बाद भी प्रासंगिकता
यह फिल्म हर साल माता-पिता दिवस और पारिवारिक अवसरों पर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करती है — जो इसकी स्थायी प्रासंगिकता का प्रमाण है। अवतार गिल की इस पोस्ट ने एक बार फिर उस पीढ़ी को भावुक कर दिया जिसने यह फिल्म सिनेमाघरों में देखी थी।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस क्लासिक की विरासत को किसी नए रूप में पेश करने की कोशिश होती है, जैसा कि हिंदी सिनेमा में पुरानी फिल्मों के रीमेक का चलन बढ़ा है।