क्या 'होमबाउंड' ने ऑस्कर की दौड़ से बाहर जाकर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई?
सारांश
Key Takeaways
- फिल्में समाज के लिए एक आईना होती हैं।
- महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने में फिल्में सक्षम होती हैं।
- मेहनत और ईमानदारी का फल मीठा होता है।
- अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए फिल्में गुणवत्ता पर ध्यान दें।
- सकारात्मक प्रतिक्रिया से प्रेरणा मिलती है।
मुंबई, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड में हाल के समय में कई ऐसी फिल्में रिलीज हुई हैं, जो केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि समाज और मानवीय अनुभवों को भी बड़े पर्दे पर पेश करने का कार्य किया है। ऐसी ही एक फिल्म है 'होमबाउंड', जिसने न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर भी अपनी पहचान बनाई। जान्हवी कपूर, ईशान खट्टर और विशाल जेठवा की यह फिल्म ऑस्कर 2026 के नॉमिनेशंस से बाहर हो गई है।
फिल्म ने दुनिया भर की 86 फिल्मों में से टॉप 15 में अपनी जगह बनाई थी। इस सफर पर अभिनेता विशाल जेठवा ने राष्ट्र प्रेस से खुलकर बात की और अपने अनुभव को बेहद खास बताया।
विशाल ने कहा, ''मैं एक साधारण परिवेश से आता हूँ, जहाँ बड़े सपने अक्सर दूर की चीज लगते हैं। मेरी फिल्म का अंतरराष्ट्रीय मंच तक जाना और भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए बेहद असाधारण अनुभव रहा। फिल्म को दुनिया भर के लोगों से बेहद प्यार मिला। यह सफर मेरे विश्वास को मजबूत करता है कि दिल से बनाई गई और ईमानदारी के साथ पेश की गई फिल्में दर्शकों तक अपनी ताकत पहुंचा सकती हैं।''
विशाल ने कहा, ''इस सफर ने मुझे एहसास दिलाया कि मेहनत, विश्वास और सच्चाई के साथ की गई कोशिशों का फल जरूर मिलता है।''
विशाल ने इस अवसर पर फिल्म के निर्देशक नीरज घायवान को उनकी दूरदर्शिता और सोच के लिए, निर्माता करण जौहर को फिल्म पर भरोसा करने के लिए और सह-कलाकार ईशान खट्टर और जान्हवी कपूर को सहयोग और प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा, ''आप सभी के साथ काम करना मेरे लिए सीखने और बढ़ने का अवसर रहा।''
विशाल ने आगे कहा, ''मैं इस अनुभव को अपने जीवन में संजोकर रखूंगा और आगे आने वाले अवसरों का बेसब्री से इंतजार करूंगा। भले ही फिल्म ऑस्कर की दौड़ से बाहर हो गई हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान और इसकी गूंज अभी भी मौजूद है। लोगों की ओर से फिल्म को लेकर प्रतिक्रिया अभी भी सामने आ रही है, जो मेरे लिए काफी मायने रखती है।''