कान्स पर तारा शर्मा का बेबाक बयान: 'बिना फिल्म के रेड कार्पेट पर चलना समझ नहीं आता'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री तारा शर्मा ने सोमवार, 18 मई को इंस्टाग्राम पर अपने पुराने फ्रांस दौरे का एक वीडियो साझा किया और साथ में कान्स फिल्म फेस्टिवल के बदलते स्वरूप पर खुलकर अपनी राय रखी। उनकी यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर कान्स की ग्लैमरस तस्वीरें और वीडियो छाए हुए हैं।
वीडियो में क्या है
साझा किए गए वीडियो में तारा शर्मा अपने छोटे बच्चों के साथ कान्स की सड़कों पर घूमती नज़र आती हैं। वीडियो की शुरुआत में वह मशहूर रेड कार्पेट के सामने खड़ी होकर मज़ाकिया अंदाज़ में कहती हैं, 'यह मशहूर रेड कार्पेट है और अगर अभी फिल्म फेस्टिवल होता, तो हम इस पर चलते हुए सबको हाथ हिलाकर नमस्ते करते।' इसके बाद वह बच्चों को शहर की खासियतें बताती हैं — 'वॉक ऑफ फेम', फ्रांसीसी कैफे और वहाँ की जीवंत कला-संस्कृति।
कान्स से जुड़ी तारा की अपनी यादें
तारा शर्मा ने अपनी पोस्ट में बताया कि यह वीडियो उस दौर का है जब उनका शो 'द तारा शर्मा शो — डायरीज ऑफ अ न्यू मम' को प्रतिष्ठित कान्स लायंस में नामांकित किया गया था। उन्होंने लिखा कि वह पल उनके और उनके परिवार के लिए 'बेहद गर्व का क्षण' था।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2006 में आई उनकी फिल्म 'खोसला का घोसला' भी कान्स मार्केट में प्रदर्शित हो चुकी है। उन्होंने लिखा, 'उस समय मेरे पास न कोई बड़ा बजट था और न ही पीआर टीम, लेकिन बिना किसी तामझाम के फिल्म को वहाँ सराहना मिली थी।'
रेड कार्पेट के 'दिखावे' पर सवाल
तारा शर्मा ने बेबाक लहजे में लिखा कि कान्स अब 'थोड़ा दिखावटी होता जा रहा है।' उन्होंने कहा कि इतने सारे लोगों का बिना किसी फिल्म या प्रोजेक्ट के रेड कार्पेट पर चलना उन्हें हैरान करता है। उनकी यह टिप्पणी कथित तौर पर उन भारतीय हस्तियों की ओर इशारा मानी जा रही है जो हर साल महज़ पीआर के लिए कान्स पहुँचते हैं।
तारा की अपनी शर्त और उम्मीद
अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि वह हर किसी का सम्मान करती हैं और सबके अपने-अपने कारण होते हैं, लेकिन वह खुद वहाँ 'सिर्फ पीआर के लिए' नहीं जाना चाहतीं। उन्होंने लिखा, 'मैं तब जाना चाहूंगी, जब मेरी कोई फिल्म, शो या ऐसा कंटेंट वहाँ दिखाया जा रहा हो, जिससे मैं जुड़ी हुई हूँ।' साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन वह कान्स फिल्म फेस्टिवल के आधिकारिक रेड कार्पेट पर ज़रूर चलेंगी।
क्यों मायने रखती है यह बात
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कान्स में भारतीय उपस्थिति को लेकर बहस तेज़ हुई है — कुछ आलोचकों का कहना है कि फेस्टिवल की मूल भावना, यानी सिनेमा की कला, पीछे छूटती जा रही है और ग्लैमर आगे आ गया है। तारा शर्मा जैसी अभिनेत्री, जो खुद कान्स से जुड़ा अनुभव रखती हैं, का यह बयान इस बहस को एक नई दिशा देता है।