मिक्की सिंह ने 'अ मॉस्किटो इन द ईयर' में सिस्टर अरुणा की भूमिका निभाई, कॉन्वेंट स्कूल का अनुभव आया काम
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री मिक्की सिंह इन दिनों इंडो-अमेरिकन अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म 'अ मॉस्किटो इन द ईयर' में सिस्टर अरुणा के अहम किरदार से दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं। फिल्म को पहली इंडो-अमेरिकन अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म बताया जा रहा है। मिक्की ने अपने इस किरदार की तैयारी और शूटिंग के अनुभव को साझा किया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ा किरदार
मिक्की सिंह ने बताया कि इस फिल्म में काम करने की सबसे खास बात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना था। उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय फिल्म में महत्वपूर्ण रोल निभाना ही मेरे सबसे खास बात थी। इसका किरदार बहुत शानदार तरीके से लिखा गया था, लेकिन यह बहुत डिमांडिंग रोल है और इसलिए मुझे लगा कि यह करने लायक एक अच्छा रोल है।' फिल्म में उनके अलावा जेक लेसी और नाजानिन बोनियादी भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
कॉन्वेंट स्कूल की यादें बनीं किरदार की नींव
अभिनेत्री ने बताया कि सिस्टर अरुणा के किरदार को जीवंत करने में उनकी कॉन्वेंट स्कूल की शिक्षा ने बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने स्कूल की नन्स के हावभाव, उनकी चाल-ढाल और आचरण को बारीकी से याद करते हुए इस किरदार को परदे पर उतारा। यह व्यक्तिगत अनुभव उनकी तैयारी का केंद्रबिंदु बना।
निर्देशक निकोला रिंकारी के साथ काम करने का अनुभव
मिक्की ने निर्देशक निकोला रिंकारी की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा, 'फिल्म के सीन्स, किरदार को लेकर उनका विजन बिल्कुल क्लियर रहता है। अभिनेता के साथ अच्छे से पेश आते हैं और उन्हें अपनी तरफ से कुछ भी करने की आजादी देते हैं।' उन्होंने आगे जोड़ा कि निर्देशक इम्प्रोवाइजेशन को काफी अहमियत देते हैं और शूटिंग से पहले गहन तैयारी करते हैं। मिक्की के शब्दों में, 'वह कलाकार से वही चीज निकलवाते हैं, जो उस किरदार से उन्हें चाहिए होती है। एक्टर के पास आजादी थी, लेकिन उनके विजन के दायरे में।'
नाजानिन बोनियादी के साथ स्क्रीन शेयर करना रहा यादगार
ब्रिटिश अभिनेत्री नाजानिन बोनियादी के साथ काम करने के अनुभव पर मिक्की ने कहा, 'वह शानदार अभिनेत्री होने के साथ-साथ बेहतरीन इंसान भी हैं। उन्होंने मुझे यह महसूस नहीं होने दिया कि मैं कोई सुपरस्टार या इंटरनेशनल स्टार हूं। मुझे लगा जैसे मैं दो दोस्तों के साथ काम कर रही हूं।' यह अनुभव उनके लिए न केवल पेशेवर, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी समृद्ध करने वाला रहा।
अंतरराष्ट्रीय फिल्ममेकिंग और प्रोफेशनलिज्म का ऊँचा स्तर
अलग संस्कृति में काम करने के अनुभव पर मिक्की का कहना था कि फिल्ममेकिंग की प्रक्रिया हर संस्कृति में समान होती है। उन्होंने बताया, 'हमने यह फिल्म 20 दिनों में पूरी की और सब कुछ बहुत बारीकी से प्लान किया गया था। हमें अपना काम उसी दिन खत्म करना होता था।' उनके अनुसार इस प्रोजेक्ट में तैयारी और प्रोफेशनलिज्म का स्तर असाधारण रूप से ऊँचा था। यह फिल्म भारतीय प्रतिभाओं की अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में बढ़ती स्वीकार्यता का प्रतीक बनती जा रही है।