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क्या दीपक तिजोरी की संघर्ष की कहानी आपको प्रेरित करती है?

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क्या दीपक तिजोरी की संघर्ष की कहानी आपको प्रेरित करती है?

सारांश

दीपक तिजोरी की संघर्ष की कहानी, जो बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे। जानिए उनकी प्रेरणादायक यात्रा के बारे में।

मुख्य बातें

दीपक तिजोरी ने अपने संघर्ष के दौरान कभी हार नहीं मानी।
उनकी कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मेहनत से सफलता संभव है।
अभिनय से लेकर निर्देशन तक, उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है।
टीवी इंडस्ट्री में भी उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उनकी यात्रा प्रेरणादायक है और हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।

मुंबई, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड की दुनिया को बाहरी नजर से देखने पर यह बेहद आकर्षक लगती है, लेकिन इसके अंदर संघर्षों की एक लंबी दास्तान छिपी होती है। प्रत्येक एक्टर और एक्ट्रेस की बॉलीवुड में कदम रखने की अपनी कहानी होती है। कुछ कलाकार अपनी कहानी कभी साझा नहीं करते, जबकि कुछ समय के साथ खुलकर बताते हैं कि उन्होंने फिल्मों में आने का सफर कैसे तय किया। एक्टर दीपक तिजोरी ऐसे ही लोगों में से एक हैं, जिनकी संघर्ष की कहानी असली नायकों से कम नहीं है। फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए दीपक तिजोरी दिन में प्रोड्यूसर्स के दफ्तरों में जाते थे और रात को होटल में काम करते थे।

दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ। उनका परिवार मूलतः गुजरात के मेहसाणा से है। उनके परदादा तिजोरियां बनाने का काम करते थे, इसलिए दीपक का नाम 'तिजोरीवाला' रखा गया, जो बाद में 'तिजोरी' हो गया। दीपक के पिता गुजराती वैष्णव और मां पारसी ईरानी थीं। मां को फिल्मों में काम करना पसंद था, लेकिन परिवार की रूढ़िवादी सोच के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। परंतु, उन्होंने अपने बेटे को अभिनय की दुनिया में जाने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया।

दीपक की शिक्षा मुंबई के नरसी मोनजी कॉलेज में हुई, जहां उन्होंने अभिनय में गहरी रुचि विकसित की। कॉलेज के दिनों में उन्होंने थिएटर ग्रुप ज्वाइन किया और वहां उनकी मुलाकात आमिर खान, आशुतोष गोवारिकर और परेश रावल जैसे कई कलाकारों से हुई। कॉलेज के नाटकों में दीपक हमेशा हीरो का रोल निभाते थे और उन्हें विश्वास था कि कॉलेज खत्म होते ही उन्हें फिल्मों में भी हीरो बनने का मौका मिलेगा, लेकिन वास्तविकता ने उन्हें झटका दिया।

कॉलेज खत्म होते ही जब दीपक ने फिल्मों में काम खोजना शुरू किया, तो उन्होंने महसूस किया कि यहां बिना किसी पहचान के आगे बढ़ना आसान नहीं है। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। पिता की आमदनी सीमित थी और बड़े भाई पर परिवार की जिम्मेदारी थी। इसलिए दीपक ने रात में बांद्रा के होटल में फ्रंट डेस्क पर काम करना शुरू किया, ताकि दिन में वह फिल्म स्टूडियो और प्रोड्यूसर्स के दफ्तर जा सकें। यह समय उनके जीवन का सबसे कठिन और उन्हें मजबूत बनाने वाला था। दिनभर संघर्ष और रातभर काम करने के बाद उन्होंने अपने सपने को जिंदा रखा।

धीरे-धीरे दीपक को छोटे-मोटे मॉडलिंग असाइनमेंट मिलने लगे। फिर एक दिन अभिनेता अवतार गिल का फोन आया, जिसमें उन्होंने बताया कि महेश भट्ट उन्हें ढूंढ रहे हैं। दीपक ने तुरंत उनसे संपर्क किया और इसके बाद उन्हें फिल्म 'आशिकी' में एक दोस्त का किरदार मिला। यह रोल छोटा था, लेकिन इतना असरदार था कि इसके बाद दीपक को एक के बाद एक फिल्में मिलती गईं। 'सड़क', 'दिल है कि मानता नहीं', 'खिलाड़ी', 'जो जीता वही सिकंदर', 'कभी हां कभी ना', और 'अंजाम' जैसी सुपरहिट फिल्मों में उन्होंने को-एक्टर के रूप में काम किया। इन फिल्मों में उनकी भूमिकाओं को आज भी याद किया जाता है।

फिल्मों में लगातार दोस्त या साइड रोल करने के बाद दीपक तिजोरी को अगस्त 1993 में रिलीज हुई फिल्म 'पहला नशा' में बतौर लीड एक्टर काम मिला। फिल्म में शाहरुख खान और आमिर खान जैसे नाम भी गेस्ट अपीयरेंस में थे। अच्छी स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई। इसके साथ ही दीपक की मुख्य अभिनेता बनने की ख्वाहिश धुंधली पड़ गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अभिनय से हटकर उन्होंने फिल्म निर्देशन में भी अपनी किस्मत आजमाई।

साल 2003 में दीपक ने फिल्म 'ऑप्स' के साथ डायरेक्टर बनने की शुरुआत की। हालांकि फिल्म को उसके बोल्ड कंटेंट के कारण काफी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसे गलत ढंग से प्रचारित किया गया और इसे एक एडल्ट फिल्म का टैग दे दिया गया, जबकि दीपक के अनुसार यह एक इमोशनल कहानी थी। इसके बाद उन्होंने 'टॉम डिक एंड हैरी', 'खामोशी: खौफ की एक रात', और 'फॉक्स' जैसी फिल्में डायरेक्ट कीं, लेकिन ये भी कमर्शियल रूप से कुछ खास नहीं कर पाईं।

टीवी इंडस्ट्री में भी दीपक ने हाथ आजमाया और 'सैटरडे सस्पेंस', 'थ्रिलर एट 10 फरेब', और 'डायल 100' जैसे शो प्रोड्यूस किए। ये शो अवॉर्ड जीत चुके हैं, लेकिन जब टीवी पर सास-बहू का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने खुद को वहां से अलग कर लिया।

दीपक ने फिर से कैमरे के सामने लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने 'इत्तर' जैसी फिल्मों में मिडिल एज प्रेमी की भूमिका निभाई। हालांकि उन्हें कोई बड़ा अवॉर्ड नहीं मिला, लेकिन उनका संघर्ष और अभिनय आज भी सिनेप्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीपक तिजोरी की कहानी विशेष है। उन्होंने अपने कठिन समय को अपने संघर्ष का हिस्सा मानकर आगे बढ़ने की कोशिश की। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे असफलताओं के बावजूद दृढ़ता और मेहनत से सफलता पाई जा सकती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपक तिजोरी ने फिल्मों में कब करियर शुरू किया?
दीपक तिजोरी ने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज के दिनों में की थी और 1990 के दशक में फिल्मों में आए।
दीपक तिजोरी की सबसे प्रसिद्ध फिल्म कौन सी है?
दीपक तिजोरी की सबसे प्रसिद्ध फिल्म 'आशिकी' है, जिसमें उन्होंने एक दोस्त का किरदार निभाया।
दीपक तिजोरी ने निर्देशन कब शुरू किया?
दीपक तिजोरी ने निर्देशन में कदम 2003 में फिल्म 'ऑप्स' के साथ रखा।
क्या दीपक तिजोरी ने टीवी में भी काम किया है?
हाँ, दीपक तिजोरी ने कई टीवी शो प्रोड्यूस किए हैं, जैसे 'सैटरडे सस्पेंस' और 'डायल 100'।
दीपक तिजोरी का संघर्ष किस प्रकार की प्रेरणा देता है?
दीपक तिजोरी का संघर्ष यह सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद कभी हार नहीं माननी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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