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'गोंधल' विवाद: संतोष दवाखर का अनुराग कश्यप को जवाब — 'फिल्म देखे बिना राय मत दीजिए'

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'गोंधल' विवाद: संतोष दवाखर का अनुराग कश्यप को जवाब — 'फिल्म देखे बिना राय मत दीजिए'

सारांश

ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक मराठी एंट्री 'गोंधल' के निर्देशक संतोष दवाखर ने अनुराग कश्यप की 'गलत फिल्म चयन' वाली टिप्पणी का जवाब दिया है — उन्होंने कहा कि कश्यप ने खुद माना था कि उन्होंने फिल्म देखी ही नहीं है, इसलिए बिना देखे राय देना उचित नहीं।

मुख्य बातें

संतोष दवाखर ने सोशल मीडिया पर अनुराग कश्यप की ऑस्कर चयन आलोचना का जवाब दिया।
26 अप्रैल को बेंगलुरु-मुंबई उड़ान में कश्यप ने खुद कहा था कि उन्होंने 'गोंधल' नहीं देखी।
दवाखर के अनुसार, फिल्म अब तक न सार्वजनिक हुई है और न मुंबई में इसकी स्क्रीनिंग हुई है।
'गोंधल' एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जो मराठी संस्कृति को वैश्विक अपील के साथ प्रस्तुत करती है।
अनुराग कश्यप ने 'द लंचबॉक्स' और 'ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट' का उदाहरण देकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
दवाखर ने दर्शकों से री-रिलीज के दौरान सिनेमाघर में फिल्म देखने की अपील की।

ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनी मराठी मनोवैज्ञानिक थ्रिलर 'गोंधल' के निर्देशक संतोष दवाखर ने फिल्मकार अनुराग कश्यप की उस विवादास्पद टिप्पणी पर कड़ा जवाब दिया है, जिसमें कश्यप ने कहा था कि भारत ऑस्कर के लिए 'बिल्कुल गलत फिल्मों' का चयन करता है। दवाखर ने सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि किसी फिल्म पर राय देने से पहले उसे देखना ज़रूरी है।

मुख्य घटनाक्रम

संतोष दवाखर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे अनुराग कश्यप और उनकी फिल्म निर्माण शैली का गहरा सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को बेंगलुरु से मुंबई जाने वाली उड़ान के दौरान उन्होंने अनुराग कश्यप को 'गोंधल' के बारे में जानकारी दी थी। उस बातचीत में कश्यप ने स्वीकार किया था कि उन्होंने यह फिल्म न तो सुनी है और न देखी है, लेकिन वे इसे ज़रूर देखेंगे।

दवाखर ने दावा किया कि उस तारीख से अब तक 'गोंधल' न तो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हुई है और न ही मुंबई में इसकी कोई स्क्रीनिंग आयोजित हुई है। इस आधार पर उन्होंने कहा कि बिना फिल्म देखे दिया गया फैसला उचित नहीं है।

फिल्म की विशेषता और दवाखर का पक्ष

निर्देशक ने बताया कि 'गोंधल' फिल्म जगत के बाहर से आए एक नए निर्देशक की रचना है — एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर, जो मराठी संस्कृति को वैश्विक अपील के साथ प्रस्तुत करती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि यह फिल्म विशेष रूप से बड़े पर्दे के अनुभव के लिए बनाई गई है, ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नहीं।

दवाखर ने यह भी कहा कि ऑस्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व एक बड़ी ज़िम्मेदारी है और उनकी पूरी टीम इसे पूरी गंभीरता से निभाएगी। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि फिल्म की आगामी री-रिलीज के दौरान वे सिनेमाघरों में जाकर इसे देखें और समर्थन करें।

अनुराग कश्यप की मूल आपत्ति

हाल ही में एक मीडिया बातचीत में अनुराग कश्यप ने कहा था कि भारत ऑस्कर जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में इसलिए पिछड़ता है क्योंकि चयन समिति अक्सर गलत फिल्मों को तरजीह देती है। उन्होंने 'द लंचबॉक्स' और 'ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट' का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे सुअवसरों पर भी सही निर्णय नहीं लिया गया।

कश्यप ने यह भी सुझाया था कि ऑस्कर के लिए चुनी जाने वाली फिल्म का किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शन होना चाहिए या कम से कम अमेरिका में उसका वितरण होना चाहिए। उन्होंने 'गोंधल' को सलाह दी थी कि वह पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी पहचान बनाए।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यह ऐसे समय में आया है जब भारत के ऑस्कर चयन की प्रक्रिया और मानदंड हर साल बहस का विषय बनते हैं। गौरतलब है कि भारत ने दशकों से अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की श्रेणी में ऑस्कर नहीं जीता है, और चयन समिति की पारदर्शिता पर सवाल उठना कोई नई बात नहीं है। फिल्म उद्योग के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय महोत्सवों में प्रदर्शन और वैश्विक वितरण नेटवर्क ऑस्कर अभियान की सफलता के लिए अहम होते हैं।

आगे क्या होगा

'गोंधल' की आगामी री-रिलीज के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म अंतरराष्ट्रीय महोत्सव सर्किट पर अपनी जगह बना पाती है या नहीं। अनुराग कश्यप की आपत्तियाँ और दवाखर का जवाब मिलकर एक ऐसी बहस को जन्म दे रहे हैं जो भारत के ऑस्कर चयन की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि हालिया ऑस्कर विजेता फिल्मों का इतिहास यही दर्शाता है। दूसरी ओर, दवाखर का यह तर्क भी उचित है कि बिना देखी फिल्म पर राय देना निष्पक्ष नहीं है। असली सवाल यह है कि भारत की फिल्म महासंघ चयन समिति अपने मानदंड सार्वजनिक क्यों नहीं करती — जब तक यह पारदर्शिता नहीं आती, हर साल यही बहस दोहराई जाती रहेगी।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गोंधल' विवाद क्या है?
मराठी फिल्म 'गोंधल' को ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुना गया है। फिल्मकार अनुराग कश्यप ने इस चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत अक्सर ऑस्कर के लिए गलत फिल्में चुनता है, जिस पर निर्देशक संतोष दवाखर ने जवाब दिया है।
संतोष दवाखर ने अनुराग कश्यप को क्या जवाब दिया?
दवाखर ने कहा कि अनुराग कश्यप ने खुद 26 अप्रैल को उड़ान में स्वीकार किया था कि उन्होंने 'गोंधल' नहीं देखी है। चूँकि फिल्म अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और मुंबई में कोई स्क्रीनिंग नहीं हुई, इसलिए बिना देखे फैसला देना उचित नहीं है।
अनुराग कश्यप ने ऑस्कर चयन पर क्या कहा था?
कश्यप ने एक मीडिया बातचीत में कहा था कि भारत ऑस्कर के लिए अक्सर गलत फिल्में चुनता है। उन्होंने 'द लंचबॉक्स' और 'ऑल वी इमेजिन ऐज लाइट' का उदाहरण दिया और सुझाया कि चुनी गई फिल्म का अंतरराष्ट्रीय महोत्सवों में प्रदर्शन या अमेरिका में वितरण होना चाहिए।
'गोंधल' किस तरह की फिल्म है?
'गोंधल' एक मराठी मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है जो फिल्म उद्योग से बाहर के नए निर्देशक संतोष दवाखर ने बनाई है। यह मराठी संस्कृति को वैश्विक अपील के साथ प्रस्तुत करती है और विशेष रूप से बड़े पर्दे के अनुभव के लिए बनाई गई है।
क्या 'गोंधल' सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज़ होगी?
हाँ, संतोष दवाखर ने दर्शकों से आगामी री-रिलीज के दौरान सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखने और समर्थन करने की अपील की है। री-रिलीज की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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