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हरिहरन का मानना है: असली संगीत दिल से आता है, मशीन से नहीं

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हरिहरन का मानना है: असली संगीत दिल से आता है, मशीन से नहीं

सारांश

हरिहरन ने म्यूजिक इंडस्ट्री में मशीनों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि असली संगीत इंसानी भावनाओं से ही जुड़ा होता है। जानें उनकी यात्रा और विचारों के बारे में।

मुख्य बातें

हरिहरन का मानना है कि असली संगीत इंसानी भावना से उत्पन्न होता है।
उन्होंने संगीत में टेक्नोलॉजी के प्रभाव पर सवाल उठाए हैं।
हरिहरन ने कई भाषाओं में गाने गाए हैं और पद्मश्री से सम्मानित हैं।
उनका पहला सफल गाना 'अजीब सानेहा मुझ पर गुजर गया' था।
गज़ल और फिल्म संगीत दोनों में उनकी आवाज का जादू है।

मुंबई, २ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में, जब म्यूजिक इंडस्ट्री तेजी से विकसित हो रही है और हर गीत में टेक्नोलॉजी का प्रभाव स्पष्ट है, कुछ कलाकार अब भी असली और दिल से जुड़े संगीत की चर्चा करते हैं। प्रसिद्ध गायक हरिहरन का मानना है कि संगीत में मानव भावना का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने एक साक्षात्कार में उल्लेख किया कि आजकल मशीन से सुधारित गाने उन्हें मशीन जैसा अनुभव कराते हैं।

हरिहरन का जन्म ३ अप्रैल १९५५ को मुंबई में एक तमिल परिवार में हुआ। उनके माता-पिता दोनों शास्त्रीय संगीत से जुड़े हुए थे, जिससे घर में हमेशा संगीत का माहौल बना रहता था। यही कारण है कि हरिहरन ने बहुत छोटी उम्र से संगीत की शिक्षा लेना शुरू कर दिया। यह भी कहा जाता है कि वे कई घंटों तक रियाज करते थे, जिससे उनकी आवाज में खास गहराई और मिठास आ गई।

हरिहरन ने अपनी शिक्षा मुंबई के स्कूल और कॉलेजों से प्राप्त की, लेकिन उनका मन हमेशा संगीत की ओर ही लगा रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉन्सर्ट और टीवी शो से की। प्रारंभिक दिनों में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। १९७७ में उन्होंने 'ऑल इंडिया सुर सिंगार कॉम्पिटिशन' जीती, जिसके बाद उन्हें इंडस्ट्री में पहचान मिली।

इसके बाद प्रसिद्ध संगीतकार जयदेव ने उन्हें फिल्म 'गमन' में गाने का अवसर दिया। उनका पहला गाना 'अजीब सानेहा मुझ पर गुजर गया, यारों' रिलीज होते ही हिट हो गया। इस गाने ने हरिहरन को नई पहचान दिलाई और उन्हें अवार्ड्स के लिए भी नॉमिनेशन मिला।

हरिहरन का करियर तब बदल गया जब उन्होंने ए.आर. रहमान के साथ काम करना शुरू किया। फिल्म 'रोजा' का गाना 'रोजा जानेमन' आज भी लोगों की जुबान पर है। इसके बाद उन्होंने 'तू ही रे', 'बाहों के दरमियां', 'झोंका हवा का' जैसे कई सुपरहिट गाने दिए। उनकी आवाज ने हर गाने में एक अद्वितीय जान डाल दी।

हरिहरन ने गजल की दुनिया में भी बड़ा नाम कमाया है। उनकी गजलों में जो सुकून और गहराई होती है, वह सीधे दिल को छू जाती है। उन्होंने कई हिट गजल एल्बम्स दिए, जिन्हें आज भी लोग बड़े शौक से सुनते हैं।

एक इंटरव्यू में हरिहरन ने म्यूजिक इंडस्ट्री में बढ़ती टेक्नोलॉजी पर अपनी राय रखते हुए कहा कि आजकल गानों को मशीन से इतना सुधार दिया जाता है कि उनमें इंसानी एहसास कम हो जाता है। असली गायक वही होता है, जो अपनी आवाज से भावनाएं व्यक्त कर सके, न कि टेक्नोलॉजी के सहारे गाना अच्छा लगे।

हरिहरन ने अपने लंबे करियर में कई भाषाओं में हजारों गाने गाए हैं। हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और कई अन्य भाषाओं में उनकी आवाज गूंज चुकी है। यही वजह है कि वे पूरे देश में समान रूप से लोकप्रिय हैं। उनकी मेहनत और योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। इसके अलावा, वे दो बार नेशनल अवॉर्ड भी जीत चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम तकनीकी सुधार के पीछे असली संगीत को खो रहे हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरिहरन किस साल में पैदा हुए?
हरिहरन का जन्म ३ अप्रैल १९५५ को हुआ।
हरिहरन ने किस प्रतियोगिता में जीत हासिल की?
हरिहरन ने १९७७ में 'ऑल इंडिया सुर सिंगार कॉम्पिटिशन' जीती।
हरिहरन ने कौन-से प्रसिद्ध गाने गाए हैं?
हरिहरन ने 'रोजा जानेमन', 'तू ही रे', और 'झोंका हवा का' जैसे कई हिट गाने गाए हैं।
हरिहरन को कौन-से सम्मान मिले हैं?
हरिहरन को भारत सरकार ने पद्मश्री और दो बार नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया है।
हरिहरन का मानना क्या है?
हरिहरन का मानना है कि असली संगीत इंसानी भावना से जुड़ा होता है, मशीन से नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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