ऋतिक रोशन का नाम बायोलॉजी की किताबों में शामिल करना चाहता था एक स्कूल बोर्ड, 'कॉफी विद करण' में हुआ खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन को उनके अद्वितीय शारीरिक सौष्ठव के लिए 'ग्रीक गॉड' कहा जाता है — लेकिन एक बार उनकी यह पहचान कक्षाओं तक भी पहुँचते-पहुँचते रह गई। चैट शो 'कॉफी विद करण' में फिल्ममेकर और होस्ट करण जौहर से बातचीत के दौरान ऋतिक ने खुलासा किया कि कोलकाता के एक स्कूल बोर्ड ने उनसे उनका नाम बायोलॉजी की पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने का अनुरोध किया था।
स्कूल बोर्ड का अनोखा प्रस्ताव
ऋतिक ने करण जौहर को बताया, 'आपको पता है, जब मैं कलकत्ता में था, तो मुझे स्कूल बोर्ड से एक मैसेज मिला। वे बच्चों को पढ़ाने के लिए किताबों में मेरा नाम शामिल करना चाहते थे। उन्हें लगा कि इससे सीखने में मदद मिलेगी, जैसे बायोलॉजी में सवाल हों — 'ऋतिक रोशन के शरीर की सबसे लंबी हड्डी कौन सी है?' बस ऐसी बातें जिनसे बच्चों के लिए पढ़ाई थोड़ी और दिलचस्प बन सके।'
यह किस्सा उनकी लोकप्रियता की उस गहराई को दर्शाता है जो परदे से बाहर, सामान्य जन-जीवन और यहाँ तक कि शिक्षा जगत तक फैली हुई थी। गौरतलब है कि ऋतिक उस दौर में भारत के सबसे अधिक चर्चित अभिनेताओं में से एक बन चुके थे।
बॉलीवुड में ऋतिक का सफ़र
ऋतिक ने वर्ष 2000 में अभिनेत्री अमीषा पटेल के साथ रोमांटिक फिल्म 'कहो ना प्यार है' से हिंदी सिनेमा में धमाकेदार प्रवेश किया था। यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलताओं में से एक रही।
इसके बाद के दो दशकों में उन्होंने 'कोई मिल गया', 'कृष', 'लक्ष्य', 'जोधा अकबर', 'गुज़ारिश', 'ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा' और 'वॉर' जैसी विविध शैलियों की फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का परिचय दिया।
ओटीटी पर प्रोड्यूसर के रूप में नई पारी
ऋतिक अब निर्माता के तौर पर ओटीटी की दुनिया में कदम रखने की तैयारी में हैं। उनका नया प्रोजेक्ट 'स्टॉर्म' इस नई पारी का पहला अध्याय होगा। इस प्रोजेक्ट में पार्वती थिरुवोथु, अलाया एफ, सृष्टि श्रीवास्तव, रामा शर्मा और सबा आज़ाद अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगी।
'स्टॉर्म' को अजीतपाल सिंह ने निर्देशित किया है, जो चर्चित सीरीज़ 'टब्बर' के लिए पहले से जाने जाते हैं।
'कृष 4' की भी तैयारी
इन सबके अलावा, ऋतिक अपनी मशहूर फ्रैंचाइज़ी की अगली कड़ी 'कृष 4' में भी कृष्णा मेहरा का किरदार दोबारा निभाने की उम्मीद के साथ जुड़े हैं। यह फ्रैंचाइज़ी हिंदी सिनेमा की सबसे लंबे समय तक चलने वाली सुपरहीरो श्रृंखलाओं में से एक मानी जाती है।
बेशक, स्कूल बोर्ड का वह प्रस्ताव कभी अमल में नहीं आया — पर यह किस्सा ऋतिक की उस अनोखी सांस्कृतिक उपस्थिति का प्रमाण है जो दशकों बाद भी उतनी ही जीवंत है।