इलैयाराजा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, 'एन इनिया पोन निलावे' कॉपीराइट विवाद में सारेगामा की जीत बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को प्रसिद्ध संगीतकार इलैयाराजा को बड़ा झटका देते हुए उनकी अपील पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह विवाद 1981 की तमिल फिल्म 'मूडू पनी' के चर्चित गाने 'एन इनिया पोन निलावे' के कॉपीराइट को लेकर था, जिसे सुरीले कंठ वाले गायक के.जे. येसुदास ने गाया था। अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें म्यूजिक कंपनी सारेगामा इंडिया के पक्ष में निर्णय दिया गया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह कानूनी लड़ाई तब शुरू हुई जब फिल्म 'अघथिया' में 'एन इनिया पोन निलावे' का रीक्रिएटेड संस्करण इस्तेमाल किया गया। सारेगामा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, यह दावा करते हुए कि मूल फिल्म 'मूडू पनी' की साउंड रिकॉर्डिंग के अधिकार उसके पास हैं। दूसरी ओर, इलैयाराजा की तरफ से उक्त गाने के लिए लाइसेंस दिए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कॉपीराइट को लेकर कानूनी संग्राम छिड़ गया।
गौरतलब है कि 25 फरवरी 1980 को हुए एक अनुबंध के तहत 'मूडू पनी' में मौजूद साउंड रिकॉर्डिंग के कॉपीराइट मूल कंपनी से सारेगामा के पास हस्तांतरित हो गए थे। यही वह दस्तावेज़ था जिसने इस पूरे विवाद की दिशा तय की।
दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय
दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने मई 2026 के फैसले में कॉपीराइट के तीन अलग घटकों — म्यूजिकल कंपोजिशन, लिरिक्स और साउंड रिकॉर्डिंग — के बीच स्पष्ट विभाजन रेखा खींची। उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच ने माना कि इलैयाराजा गाने के संगीत के रचयिता होने के नाते उसकी म्यूजिकल कंपोजिशन पर अपना अधिकार रखते हैं, लेकिन फिल्म में रिकॉर्ड की गई साउंड रिकॉर्डिंग या उसके लिरिक्स पर उनका दावा नहीं बनता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इलैयाराजा उस मूल रिकॉर्डिंग को अपनी संपत्ति बताकर किसी तीसरे पक्ष को अधिकार नहीं दे सकते, क्योंकि साउंड रिकॉर्डिंग के अधिकार 1980 के अनुबंध के अनुसार सारेगामा के पास हैं।
मुकदमेबाज़ी का सफर
जनवरी 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने सारेगामा के पक्ष में अंतरिम राहत दी थी। इलैयाराजा ने इसे चुनौती दी, किंतु मई 2026 में डिविजन बेंच ने सिंगल बेंच के निर्णय को कायम रखा। तत्पश्चात इलैयाराजा की ओर से समीक्षा याचिका दायर की गई, जिसे उच्च न्यायालय ने 26 मई 2026 को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, जिसने 1 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
संगीत उद्योग पर असर
यह फैसला भारतीय संगीत उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स और रीमिक्स संस्कृति के उभार के बीच पुराने गानों के कॉपीराइट को लेकर विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। संगीतकारों और संगीत कंपनियों के बीच अधिकारों के विभाजन का यह मामला आगे भी कानूनी बहसों का केंद्र बना रह सकता है। इस निर्णय के बाद अन्य संगीतकारों के लिए भी यह समझना ज़रूरी हो जाता है कि म्यूजिकल कंपोजिशन और साउंड रिकॉर्डिंग के अधिकार अलग-अलग होते हैं।
आगे क्या
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप से इनकार के बाद, फिलहाल इस मामले में इलैयाराजा के पास कानूनी विकल्प सीमित दिखते हैं। सारेगामा के लिए यह फैसला 'मूडू पनी' की साउंड रिकॉर्डिंग पर उसके विशेष अधिकारों को पुख़्ता करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला भारत में संगीत कॉपीराइट कानून की जटिलताओं को उजागर करता है और भविष्य में ऐसे विवादों के निपटारे के लिए एक संदर्भ-बिंदु बन सकता है।