इम्तियाज अली ने कश्मीर के हुनर की सराहना की, कहा- थिएटर में किया वो, जो फिल्मों में आसान है
सारांश
Key Takeaways
- ब्लैक एंड व्हाइट तकनीक: इम्तियाज ने इसे फिल्म में गहराई लाने के लिए इस्तेमाल किया।
- कश्मीरी प्रतिभा: उन्हें फिल्म उद्योग में आने की प्रेरणा दी गई।
- थिएटर का महत्व: थिएटर तकनीक ने फिल्म को एक नई दिशा दी।
- रंगों का उपयोग: फिल्म के भावनात्मक पहलुओं को दर्शाने में मदद की।
- स्वयं की खोज: फिल्म का मुख्य विषय है खुद को पहचानना।
मुंबई, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इम्तियाज अली की फिल्म तमाशा को अधिकांश दर्शक एक रोमांटिक प्रेम कहानी के रूप में देखते हैं, जबकि यह दरअसल स्वयं की खोज की एक मनोवैज्ञानिक यात्रा है। यह फिल्म रणबीर कपूर द्वारा निभाए गए किरदार वेद के जीवन के संघर्ष को बखूबी दर्शाती है।
इम्तियाज ने फिल्म में वेद के जीवन को दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए ब्लैक एंड व्हाइट तकनीक का उपयोग किया। जब वेद का जीवन नीरस और दैनिक कामों में व्यस्त रहता है, तो फिल्म के दृश्य भी ब्लैक एंड व्हाइट होते हैं। यह परिवर्तन उसके जीवन की निराशा, उत्साह की कमी और भावनात्मक रिक्तता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वहीं, जब वह अपनी रचनात्मकता और खुशी के साथ जीता है, तो दृश्य रंगीन हो जाते हैं। इस रंग और ब्लैक एंड व्हाइट के उपयोग से फिल्म वेद के जीवन के दो भिन्न पहलुओं के बीच अंतर को उजागर करती है।
इम्तियाज ने साझा किया कि उन्होंने इस विशेष तकनीक को कश्मीर के एक थिएटर नाटक से सीखा था। बुधवार को, निर्देशक ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक पॉडकास्ट का वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने कश्मीरियों की प्रतिभा की प्रशंसा की और कहा कि उन्हें फिल्म उद्योग में अवश्य आना चाहिए ताकि लोग उनकी इस प्रतिभा से परिचित हो सकें।
इम्तियाज कहते हैं, "कश्मीरी लोग बेहद प्रतिभाशाली होते हैं। मैंने स्कूल के छात्रों के नाटक देखे हैं, जिसमें उन्होंने जिस तरह की तकनीक का उपयोग किया, वह मुझे चकित कर गई। उन्होंने पुराने समय को दर्शाने के लिए ब्लैक एंड व्हाइट का प्रयोग किया। नाटक के पुराने दृश्यों में सभी कलाकारों ने ब्लैक और ग्रे कपड़े पहने थे, उनका मेकअप भी ब्लैक एंड व्हाइट था। स्टेज पर ऐसा लग रहा था जैसे मैं असल जिंदगी में कोई फिल्म देख रहा हूँ। फिल्मों में रंग आसानी से बदले जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने थिएटर में यह कर दिखाया। मैं दंग रह गया था। बाद में मैंने अपनी फिल्म 'तमाशा' में इसी तकनीक का उपयोग किया।"
निर्देशक ने कहा कि वे चाहते हैं कि कश्मीरी अपने कहानियों और तकनीक को लेकर फिल्म उद्योग में आएं और अपना हुनर प्रदर्शित करें।