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भारतीय खानपान का विज्ञान: वेदों और हकीमों द्वारा आकारित व्यंजन शैली - कुणाल कपूर

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भारतीय खानपान का विज्ञान: वेदों और हकीमों द्वारा आकारित व्यंजन शैली - कुणाल कपूर

सारांश

क्या आप जानते हैं कि भारतीय खानपान के पीछे गहन विज्ञान और प्राचीन ज्ञान छुपा है? जाने-माने शेफ कुणाल कपूर ने बताया कि कैसे भारतीय भोजन समय के साथ विकसित हुआ है और इसके पीछे छिपी सोच क्या है।

मुख्य बातें

भारतीय खानपान में मसालों का महत्वपूर्ण स्थान है।
वेदों और हकीमों ने भारतीय व्यंजनों की दिशा तय की।
स्वास्थ्य लाभ के लिए मसालों का सही मिश्रण आवश्यक है।
खाने में विविधता जलवायु और क्षेत्रीय उपलब्धता के अनुसार है।
भारतीय खाना समय के साथ विकसित हुआ है।

मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय खाद्य संस्कृति अपनी अनोखी खुशबू और स्वादिष्ट मसालों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विभिन्न राज्यों, जलवायु और संस्कृतियों के कारण यहाँ के व्यंजनों में अद्भुत विविधता देखने को मिलती है। इस विषय पर प्रसिद्ध सेलिब्रिटी शेफ कुणाल कपूर ने भारतीय खाने की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और बताया कि भारत की रसोई का विकास किस प्रकार हुआ है।

कुणाल कपूर ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "हर देश में भोजन का विकास अपने तरीके से होता है। भारतीय खानपान की विशेषता यह है कि इसमें मसालों का उपयोग बहुत सोच-समझकर किया जाता है और इसके पीछे एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी होता है।"

उन्होंने आगे कहा, "भारतीय व्यंजनों में मसालों का प्रयोग सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। हमारे खाने की दिशा और स्वरूप को प्राचीन वेदों और हकीमों ने निर्धारित किया था। पहले के समय में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा के विद्वान जानते थे कि कौन से मसाले शरीर के लिए लाभदायक हैं। इसी आधार पर लोगों ने अपने भोजन में मसालों का समावेश करना शुरू किया।"

कुणाल कपूर ने एक उदाहरण देते हुए कहा, "भारत में चाय में भी कई मसालों का मिश्रण किया जा सकता है। कभी-कभी, चाय में छह या सात तरह के मसाले मिलाए जाते हैं। यह सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लाभ के लिए भी होता है। इन मसालों में ऐसे गुण होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।"

उन्होंने बताया, "अगर इन मसालों को सीधे पिसकर किसी को खाने या पीने के लिए दिया जाए, तो उनका स्वाद तीखा और कड़वा लग सकता है। इसलिए लोगों ने इन्हें खाने में मिलाने का तरीका निकाला। उदाहरण के लिए, कई मसालों को मिलाकर गरम मसाला तैयार किया जाता है। जब इसे भोजन में मिलाया जाता है, तो इसके स्वाद में निखार आ जाता है और शरीर को भी लाभ होता है।"

कुणाल कपूर ने कहा, "भारतीय भोजन समय के साथ लगातार परिवर्तित होता रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में जो चीजें आसानी से उपलब्ध थीं, उन्हें वहाँ के व्यंजनों में शामिल कर लिया गया। इसके अलावा, जलवायु और लोगों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार भी भोजन में परिवर्तन किए गए। इसी कारण, भारत के विभिन्न राज्यों में खानपान का स्वाद और तरीका भिन्न-भिन्न दिखाई देता है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि स्वास्थ्य के लाभ के लिए भी किया जाता है। यह एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम है जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय खानपान की विशेषता क्या है?
भारतीय खानपान की विशेषता इसके मसालों का सोच-समझकर उपयोग और इसके पीछे का वैज्ञानिक दृष्टिकोण है।
कुणाल कपूर ने भारतीय भोजन के बारे में क्या कहा?
कुणाल कपूर ने बताया कि भारतीय भोजन समय के साथ विकसित हुआ है और इसमें मसालों का प्रयोग स्वास्थ्य के लाभ के लिए भी किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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