जैकी श्रॉफ ने मधुबाला को श्रद्धांजलि दी, कहा- उनका जादू हमेशा रहेगा जीवित
सारांश
Key Takeaways
- मधुबाला की अदाकारी का जादू आज भी लोगों में जीवित है।
- जैकी श्रॉफ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
- उनका असली नाम मुमताज जहां बेगम था।
- फिल्म 'महल' ने उन्हें पहचान दिलाई।
- उनकी अंतिम फिल्म 'ज्वाला' थी।
मुंबई, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा की सबसे अद्भुत अदाकाराओं में से एक मधुबाला की मोहब्बत आज भी लोगों के दिलों में कायम है। उनकी मुस्कान, मासूमियत और आंखों की रौनक से आज भी कई लोग प्रभावित होते हैं। उनकी अभिनय में ऐसा जादू था कि दर्शक उन्हें पहली बार देख कर ही उनके दीवाने हो जाते थे।
मधुबाला की पुण्यतिथि सोमवार को है। इस अवसर पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उनके योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज में मधुबाला की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "मधुबाला जी की पुण्यतिथि पर हम उन्हें प्यार और सम्मान के साथ याद करते हैं। उनकी यादें और सिनेमा में उनके योगदान हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगे।"
दिल्ली में जन्मी मधुबाला का असली नाम मुमताज जहां बेगम देहलवी था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटी उम्र से ही कर दी थी। आर्थिक कठिनाइयों के कारण उन्होंने केवल 9 वर्ष की आयु में काम करना शुरू किया। उन्होंने फिल्म 'बसंत' से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन 1949 में आई फिल्म 'महल' ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक पहचान दी। इसके बाद उन्होंने 'फागुन', 'हावड़ा ब्रिज', 'काला पानी', और 'चलती का नाम गाड़ी' जैसी कई सफल फिल्में कीं।
मधुबाला ने अपने करियर में सभी नामी कलाकारों के साथ काम किया, जिनमें दिलीप कुमार, राज कपूर, अशोक कुमार और देवानंद शामिल थे। फिर भी, 1960 में आई ऐतिहासिक फिल्म 'मुगल-ए-आजम' में अनारकली का किरदार उनके करियर का सबसे यादगार रहा।
मधुबाला ने अभिनय के साथ-साथ 'नाता' (1955), 'महलों के ख्वाब' (1960) और 'पठान' (1962) जैसी फिल्मों में निर्माता के रूप में भी काम किया। दिल की बीमारी के कारण उनका निधन महज 36 वर्ष की आयु में 23 फरवरी 1969 को हुआ था। उनकी अंतिम फिल्म 'ज्वाला' 1971 में रिलीज हुई थी।