जैकी श्रॉफ ने एसपी बालासुब्रमण्यम की 6वीं पुण्यतिथि पर दी भावुक श्रद्धांजलि, शेयर की 'गर्दिश' की यादें
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने 25 सितंबर 2026 को दिवंगत महान प्लेबैक सिंगर एसपी बालासुब्रमण्यम की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जैकी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एसपीबी की एक दुर्लभ स्टूडियो रिकॉर्डिंग तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'हमेशा हमारे दिलों में! 4 जून 1946 और 25 सितंबर 2020।' यह श्रद्धांजलि उन दोनों के बीच के उस गहरे कलात्मक रिश्ते को फिर से जीवंत कर देती है जो दशकों पुराना है।
यादों का संगीत: 'गर्दिश' का वह खास गाना
जैकी श्रॉफ ने अपनी पोस्ट के बैकग्राउंड म्यूजिक के रूप में 'हम ना समझे थे' गाना चुना, जिसे एसपी बालासुब्रमण्यम ने 1993 की फिल्म 'गर्दिश' के लिए गाया था। इस फिल्म में जैकी श्रॉफ और डिंपल कपाड़िया मुख्य भूमिकाओं में थे। गाने का यह चुनाव महज संयोग नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि थी — जैकी ने उसी आवाज़ को याद करने के लिए चुना जो उनकी अपनी फिल्म से जुड़ी थी।
एसपीबी: पाँच दशकों का अप्रतिम सफर
एस. पी. बालासुब्रमण्यम, जिन्हें प्यार से एसपीबी कहा जाता था, का निधन 25 सितंबर 2020 को 74 वर्ष की आयु में कोविड-19 से जुड़ी जटिलताओं के कारण हुआ था। उनका करियर पाँच दशकों से भी अधिक लंबा रहा और उन्होंने तमिल, तेलुगु, हिंदी, कन्नड़ सहित कई भारतीय भाषाओं में हजारों गाने रिकॉर्ड किए।
हिंदी सिनेमा में 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक में उनकी उपस्थिति बेहद अहम रही। सलमान खान की आवाज़ के रूप में उन्हें विशेष पहचान मिली — 'मैंने प्यार किया', 'साजन', 'हम आपके हैं कौन' और 'हम साथ-साथ हैं' जैसी फिल्मों में उनके गाए गीत आज भी जनमानस में जीवित हैं। उनके कुछ यादगार गानों में 'आते जाते हंसते गाते', 'दिल दीवाना', 'तुमसे मिलने की तमन्ना है', 'पहला पहला प्यार', 'ये हसीन वादियां' और 'सच मेरे यार है' शामिल हैं।
पुरस्कार और सम्मान: राष्ट्रीय स्वीकृति
एसपी बालासुब्रमण्यम ने अपने करियर में छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते। भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2011 में पद्म भूषण से नवाजा। उनके निधन के बाद 2021 में उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया — यह भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
गायन से परे: एक बहुआयामी कलाकार
एसपीबी का योगदान केवल पार्श्व गायन तक सीमित नहीं था। उन्होंने एक अभिनेता, संगीत निर्देशक, डबिंग कलाकार, टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता और फिल्म निर्माता के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी। यह ऐसे समय में याद करना और भी मार्मिक है जब भारतीय सिनेमा संगीत की अपनी सुनहरी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश में जुटा है। जैकी श्रॉफ की यह श्रद्धांजलि इस बात की याद दिलाती है कि एसपीबी की आवाज़ स्क्रीन पर नहीं, दिलों में गूँजती रही है और गूँजती रहेगी।