संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ का भावुक संदेश: 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने 6 नवंबर 2026 को हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जैकी ने संजीव कुमार की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।'
भावभीनी श्रद्धांजलि और यादगार गाना
जैकी श्रॉफ ने इस पोस्ट के साथ साल 1972 में आई फिल्म 'परिचय' का मशहूर गाना 'बीती ना बिताई रैना' भी जोड़ा। लता मंगेशकर और भूपिंदर सिंह की आवाज़ में गाए गए इस गीत में संजीव कुमार के साथ जया बच्चन भी नज़र आई थीं। यह पोस्ट उनके प्रशंसकों के बीच तेज़ी से वायरल हुई और लोगों ने संजीव कुमार को याद करते हुए अपनी भावनाएँ साझा कीं।
संजीव कुमार: एक अनूठे अभिनेता का सफर
संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हरिभाई जरीवाला के रूप में हुआ था। उन्होंने अपने समकालीन अभिनेताओं से अलग राह चुनी — रोमांटिक नायक की भूमिकाओं के साथ-साथ कॉमेडी, पिता और उम्रदराज पात्रों को भी उतनी ही सहजता और गहराई से निभाया। फिल्म 'खिलौना' ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
उन्हें फिल्म 'दस्तक' और 'कोशिश' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता) से सम्मानित किया गया। विशेष रूप से 'कोशिश' में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया जो सुन और बोल नहीं सकता था — यह भूमिका आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनकी सबसे चुनौतीपूर्ण अदाकारियों में गिनी जाती है।
आइकॉनिक फिल्में और यादगार किरदार
संजीव कुमार का फिल्मोग्राफी हिंदी सिनेमा की विविधता का दर्पण है। 'शोले' में उनका ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार आज भी दर्शकों के ज़ेहन में ताज़ा है। इसके अलावा 'अंगूर' में उनका डबल रोल, और 'आंधी', 'मौसम', 'त्रिशूल', 'सीता और गीता', 'नमकीन', 'अनामिका' तथा 'पति पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा।
फिल्म 'नया दिन नई रात' में उन्होंने एक साथ नौ अलग-अलग किरदार निभाए, जो उनकी असाधारण अभिनय क्षमता का प्रमाण था।
निधन के बाद भी जारी रहा सफर
संजीव कुमार के निधन के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज़ हुईं, जिनमें 'लव एंड गॉड', 'हाथों की लकीरें', 'कत्ल', 'बात बन जाए', 'नामुमकिन' और 'प्रोफेसर की पड़ोसन' शामिल हैं। उनकी अंतिम फिल्मों में शुमार 'प्रोफेसर की पड़ोसन' 1993 में रिलीज़ हुई थी। जैकी श्रॉफ जैसे साथी कलाकारों द्वारा हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर दी जाने वाली श्रद्धांजलि यह बताती है कि संजीव कुमार की विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है।