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संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ का भावुक संदेश: 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे'

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संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ का भावुक संदेश: 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे'

सारांश

जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर एक भावुक पोस्ट साझा कर उन्हें याद किया। 'शोले', 'कोशिश' और 'दस्तक' जैसी कालजयी फिल्मों के इस महान अभिनेता को दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे, और उनकी यादें आज भी हिंदी सिनेमा के दिलों में ज़िंदा हैं।

मुख्य बातें

जैकी श्रॉफ ने 6 नवंबर 2026 को संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि पोस्ट की।
पोस्ट में ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर और 1972 की फिल्म 'परिचय' का गाना 'बीती ना बिताई रैना' शामिल था।
संजीव कुमार को फिल्म 'दस्तक' और 'कोशिश' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता) मिले थे।
'शोले' में ठाकुर बलदेव सिंह और 'नया दिन नई रात' में नौ किरदार उनके करियर की अनूठी उपलब्धियाँ रहीं।
उनकी अंतिम फिल्म 'प्रोफेसर की पड़ोसन' 1993 में रिलीज़ हुई थी — निधन के बाद।

बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ ने 6 नवंबर 2026 को हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार की पुण्यतिथि पर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। जैकी ने संजीव कुमार की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।'

भावभीनी श्रद्धांजलि और यादगार गाना

जैकी श्रॉफ ने इस पोस्ट के साथ साल 1972 में आई फिल्म 'परिचय' का मशहूर गाना 'बीती ना बिताई रैना' भी जोड़ा। लता मंगेशकर और भूपिंदर सिंह की आवाज़ में गाए गए इस गीत में संजीव कुमार के साथ जया बच्चन भी नज़र आई थीं। यह पोस्ट उनके प्रशंसकों के बीच तेज़ी से वायरल हुई और लोगों ने संजीव कुमार को याद करते हुए अपनी भावनाएँ साझा कीं।

संजीव कुमार: एक अनूठे अभिनेता का सफर

संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हरिभाई जरीवाला के रूप में हुआ था। उन्होंने अपने समकालीन अभिनेताओं से अलग राह चुनी — रोमांटिक नायक की भूमिकाओं के साथ-साथ कॉमेडी, पिता और उम्रदराज पात्रों को भी उतनी ही सहजता और गहराई से निभाया। फिल्म 'खिलौना' ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई।

उन्हें फिल्म 'दस्तक' और 'कोशिश' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता) से सम्मानित किया गया। विशेष रूप से 'कोशिश' में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया जो सुन और बोल नहीं सकता था — यह भूमिका आज भी भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनकी सबसे चुनौतीपूर्ण अदाकारियों में गिनी जाती है।

आइकॉनिक फिल्में और यादगार किरदार

संजीव कुमार का फिल्मोग्राफी हिंदी सिनेमा की विविधता का दर्पण है। 'शोले' में उनका ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार आज भी दर्शकों के ज़ेहन में ताज़ा है। इसके अलावा 'अंगूर' में उनका डबल रोल, और 'आंधी', 'मौसम', 'त्रिशूल', 'सीता और गीता', 'नमकीन', 'अनामिका' तथा 'पति पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा।

फिल्म 'नया दिन नई रात' में उन्होंने एक साथ नौ अलग-अलग किरदार निभाए, जो उनकी असाधारण अभिनय क्षमता का प्रमाण था।

निधन के बाद भी जारी रहा सफर

संजीव कुमार के निधन के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज़ हुईं, जिनमें 'लव एंड गॉड', 'हाथों की लकीरें', 'कत्ल', 'बात बन जाए', 'नामुमकिन' और 'प्रोफेसर की पड़ोसन' शामिल हैं। उनकी अंतिम फिल्मों में शुमार 'प्रोफेसर की पड़ोसन' 1993 में रिलीज़ हुई थी। जैकी श्रॉफ जैसे साथी कलाकारों द्वारा हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर दी जाने वाली श्रद्धांजलि यह बताती है कि संजीव कुमार की विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस पीढ़ी की याद दिलाती है जब हिंदी सिनेमा में अभिनेता अपनी बहुमुखी प्रतिभा से पहचाने जाते थे। संजीव कुमार उस दुर्लभ वर्ग के कलाकार थे जिन्होंने स्टारडम और अभिनय कला के बीच की खाई को पाटा — एक ही वर्ष 'शोले' जैसी व्यावसायिक ब्लॉकबस्टर और 'मौसम' जैसी संवेदनशील फिल्म देकर। आज की पीढ़ी के लिए उनकी विरासत केवल फिल्मोग्राफी नहीं, बल्कि यह सबक है कि असली कद स्क्रीन पर बिताए समय से नहीं, बल्कि छोड़ी गई छाप से नापा जाता है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार को याद करते हुए क्या लिखा?
जैकी श्रॉफ ने संजीव कुमार की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर के साथ लिखा, 'हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।' इस पोस्ट के साथ उन्होंने 1972 की फिल्म 'परिचय' का गाना 'बीती ना बिताई रैना' भी जोड़ा।
संजीव कुमार को कौन-से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे?
संजीव कुमार को फिल्म 'दस्तक' और 'कोशिश' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। 'कोशिश' में उन्होंने एक मूक-बधिर व्यक्ति का किरदार निभाया था।
संजीव कुमार का असली नाम और जन्मस्थान क्या था?
संजीव कुमार का असली नाम हरिभाई जरीवाला था और उनका जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हुआ था। उन्होंने फिल्मी दुनिया में 'संजीव कुमार' के नाम से पहचान बनाई।
संजीव कुमार की सबसे यादगार फिल्में कौन-सी हैं?
संजीव कुमार की यादगार फिल्मों में 'शोले', 'कोशिश', 'दस्तक', 'आंधी', 'मौसम', 'अंगूर', 'त्रिशूल', 'सीता और गीता' और 'नया दिन नई रात' शामिल हैं। 'शोले' में उनका ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार आज भी दर्शकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
संजीव कुमार की अंतिम फिल्म कौन-सी थी?
संजीव कुमार की अंतिम फिल्मों में से एक 'प्रोफेसर की पड़ोसन' 1993 में उनके निधन के बाद रिलीज़ हुई थी। उनके निधन के बाद 'लव एंड गॉड', 'हाथों की लकीरें', 'कत्ल' और 'नामुमकिन' जैसी अन्य फिल्में भी प्रदर्शित हुईं।
राष्ट्र प्रेस
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