केरल उच्च न्यायालय ने 'केरल स्टोरी 2' पर जनहित याचिका को लेकर याचिकाकर्ताओं को दी कड़ी चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई
- जजों पर आरोप लगाना न्यायिक गरिमा के लिए गंभीर
- फिल्म 'केरल स्टोरी 2' पर विवाद जारी
- याचिकाकर्ता अपील का अधिकार रखते हैं
- न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना सभी का कर्तव्य
कोच्चि, 5 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को फिल्म 'केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' से संबंधित एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने उन टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें याचिकाकर्ताओं ने जजों के निर्णयों पर संदेह व्यक्त किया था।
केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वीएम की बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी अन्य न्यायालय या जजों पर इस प्रकार के आरोप लगाना न्यायिक प्रणाली और अदालती सम्मान के लिए अत्यंत गंभीर मामला है। अदालत ने चेतावनी दी कि ऐसी टिप्पणियां कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्रवाई का कारण बन सकती हैं।
इस जनहित याचिका को दाखिल करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त शिक्षक केसी चंद्रमोहन और वकील मेहनाज पी. मोहम्मद थे। याचिकाकर्ताओं ने फिल्म की रिलीज पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, यह आरोप लगाते हुए कि फिल्म केरल राज्य की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत करती है। फिल्म में बिना किसी ठोस सबूत के राज्य को आतंकवाद और कट्टरता का केंद्र दिखाया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि फिल्म में 150 से अधिक मुस्लिम पात्रों को नकारात्मक और इस्लामोफोबिक दृष्टिकोण से दर्शाया गया है। फिल्म आम शांतिप्रिय मुस्लिम नागरिकों की असल जिंदगी को प्रदर्शित करने में असफल रही है। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म के शीर्षक 'केरल स्टोरी' पर भी आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि यह शीर्षक केरल की छवि को नुकसान पहुंचाता है और राज्य के नागरिकों की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। उन्होंने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन भी बताया।
इस मामले में पहले 26 फरवरी को उच्च न्यायालय ने सुनवाई की थी। उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश बेंच ने फिल्म की रिलीज पर अस्थायी रोक लगा दी थी, लेकिन इसके अगले दिन फिल्म निर्माताओं ने तुरंत अपील दायर की। इसके बाद जस्टिस एसए धर्माधिकारी और पीवी बालकृष्णन की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए उस रोक को हटा दिया और फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की अनुमति दे दी। हालांकि, इस अपील पर अभी अंतिम निर्णय लंबित है।
जनहित याचिका में यह सवाल भी उठाया गया कि अपील इतनी जल्दी कैसे सुनी गई, जबकि एकल न्यायाधीश के आदेश की प्रति कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई थी। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि बिना पूरी जानकारी के जजों पर आरोप लगाना स्वीकार्य नहीं है।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि याचिकाकर्ता किसी निर्णय से असहमत हैं तो वे उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकते हैं, लेकिन न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना हर किसी का कर्तव्य है।
अदालत की आपत्ति के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने तुरंत माफी मांगी। उन्होंने कहा कि याचिका में जो विवादास्पद हिस्से हैं, उन्हें हटा दिया जाएगा।