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कुनिका सदानंद ने खोली टीवी इंडस्ट्री की पेमेंट देरी की पोल, नए एक्टर्स को 45-90 दिन का इंतज़ार

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कुनिका सदानंद ने खोली टीवी इंडस्ट्री की पेमेंट देरी की पोल, नए एक्टर्स को 45-90 दिन का इंतज़ार

सारांश

कुनिका सदानंद ने टीवी इंडस्ट्री की सबसे खामोश समस्या को आवाज़ दी — नए कलाकारों की 45-90 दिनों की पेमेंट देरी। एडवरटाइजर-चैनल-प्रोड्यूसर की त्रिस्तरीय संरचना में फँसे नए एक्टर्स के पास न तो फीस बढ़ाने की शक्ति है, न ही आर्थिक बफर।

मुख्य बातें

कुनिका सदानंद ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में नए टीवी एक्टर्स की पेमेंट देरी का मुद्दा उजागर किया।
पेमेंट में 45 से 90 दिनों की देरी आम है; कारण एडवरटाइजर → चैनल → प्रोड्यूसर की बहु-स्तरीय संरचना।
नए कलाकार अधिक फीस माँगने में असमर्थ, क्योंकि प्रोड्यूसर दूसरे को चुन सकते हैं।
बालाजी टेलीफिल्म्स जैसे बड़े हाउस समय पर भुगतान करते हैं; छोटे हाउस अक्षम हैं।
वरुण बडोला और अर्जुन बिजलानी ने पहले इसी समस्या को सार्वजनिक किया है।

मुंबई, 2 मई 2026 — अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में टीवी इंडस्ट्री में नए कलाकारों के भुगतान में होने वाली व्यवस्थित देरी के मुद्दे को सार्वजनिक किया है। 'बिग बॉस 19' की पूर्व कंटेस्टेंट ने बताया कि यह समस्या दशक से अधिक समय से चली आ रही है, लेकिन नए और छोटे कलाकारों के लिए यह सबसे गंभीर है।

पेमेंट चेन में कहाँ होती है देरी

कुनिका ने विस्तार से समझाया कि पेमेंट देरी का कारण इंडस्ट्री की बहुस्तरीय संरचना है। उन्होंने कहा, "चैनलों को एडवरटाइजर से पैसे देर से मिलते हैं। फिर चैनल प्रोड्यूसर को पैसे देते हैं। इस पूरे कॉर्पोरेट सिस्टम की वजह से देरी होती है। पैसा पहले एडवरटाइजर से चैनल के पास, फिर चैनल से प्रोड्यूसर के पास जाता है। इसलिए स्वाभाविक रूप से 45 से 90 दिनों की देरी हो जाती है।" यह संरचनात्मक समस्या है, जो तब तक बनी रहेगी जब तक इंडस्ट्री अपने नकद प्रवाह को पुनर्गठित नहीं करती।

नए कलाकारों के सामने दोहरी मुश्किल

कुनिका ने बताया कि नए एक्टर्स के पास एक व्यावहारिक समाधान है — अपनी फीस अधिक निर्धारित करना — लेकिन यह रणनीति भी जोखिम भरी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई नया कलाकार अधिक फीस माँगता है, तो प्रोड्यूसर आसानी से किसी दूसरे को चुन सकते हैं। यह एक पकड़े हुए दाँव की स्थिति है — या तो कम फीस स्वीकार करो और देर से पेमेंट सहो, या अधिक माँग करो और भूमिका खो दो।

आर्थिक संकट और बफर सिस्टम की जरूरत

अभिनेत्री ने कहा, "हर कलाकार की जिंदगी में एक बफर सिस्टम होना चाहिए, लेकिन यह हर समय मुमकिन नहीं होता। यह एक बहुत गंभीर समस्या है।" गौरतलब है कि नए कलाकारों के पास अक्सर वह आर्थिक सुरक्षा नहीं होती जो उन्हें 2-3 महीने की पेमेंट देरी को सहन करने देती है। इसका मतलब है कि वे किराए, भोजन और अन्य खर्चों के लिए कर्ज़ या अनौपचारिक उधार पर निर्भर हो जाते हैं।

बड़े प्रोडक्शन हाउस का अपवाद

कुनिका ने बालाजी टेलीफिल्म्स जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउसों की तारीफ की, जिनके पास पर्याप्त रिज़र्व फंड होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों से समय पर भुगतान की उम्मीद की जा सकती है, क्योंकि उनके पास स्थिर नकद प्रवाह और क्रेडिट लाइन होती हैं। छोटे और मध्यम प्रोडक्शन हाउस, जो अधिकांश नए कलाकारों को काम देते हैं, इस तरह की सुविधा नहीं रखते।

इंडस्ट्री में पहले भी उठी आवाज़

यह पहली बार नहीं है जब टीवी इंडस्ट्री में पेमेंट देरी का मुद्दा सामने आया है। अभिनेता वरुण बडोला और अर्जुन बिजलानी ने पहले इसी समस्या पर सार्वजनिक रूप से बात की है। यह दर्शाता है कि यह केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि इंडस्ट्री-व्यापी संकट है।

आगे की राह और उम्मीद

कुनिका ने प्रोड्यूसर्स और चैनलों से आह्वान किया कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें। उन्होंने कहा कि नियमित भुगतान न केवल कलाकारों के लिए न्यायसंगत है, बल्कि इंडस्ट्री की सुस्थिरता के लिए भी आवश्यक है। जब तक टीवी चैनल और प्रोडक्शन हाउस अपने भुगतान चक्र को तेज़ नहीं करते, नए प्रतिभा आकर्षित करना और उन्हें बनाए रखना मुश्किल होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

नए कलाकारों को सिस्टम के शिकार के रूप में छोड़ दिया जाता है। यह कोई नई समस्या नहीं है — वरुण बडोला और अर्जुन बिजलानी ने पहले ही आवाज़ उठाई है — लेकिन इंडस्ट्री अभी भी संरचनात्मक सुधार के बजाय मामूली समायोजन से संतुष्ट है। जब तक चैनल और प्रोड्यूसर अपने विज्ञापन-राजस्व चक्र को तेज़ नहीं करते या कलाकारों के लिए एस्क्रो खाते स्थापित नहीं करते, नए प्रतिभा आकर्षण एक चुनौती बनी रहेगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीवी इंडस्ट्री में कलाकारों को पेमेंट में कितनी देरी होती है?
कुनिका सदानंद के अनुसार, टीवी इंडस्ट्री में नए कलाकारों को 45 से 90 दिनों तक पेमेंट में देरी का सामना करना पड़ता है। यह देरी एडवरटाइजर से चैनल को पैसे मिलने, फिर चैनल से प्रोड्यूसर को भेजने की बहु-स्तरीय प्रक्रिया के कारण होती है।
कुनिका सदानंद ने इस समस्या का क्या समाधान सुझाया है?
कुनिका ने कहा कि नए कलाकारों को अपनी फीस अधिक निर्धारित करनी चाहिए, लेकिन यह व्यावहारिक नहीं है क्योंकि प्रोड्यूसर तब दूसरे कलाकार को चुन सकते हैं। वह मानती हैं कि हर कलाकार के पास एक आर्थिक बफर सिस्टम होना चाहिए, लेकिन यह हमेशा संभव नहीं होता।
क्या बड़े प्रोडक्शन हाउस भी इसी समस्या का सामना करते हैं?
नहीं, कुनिका ने बालाजी टेलीफिल्म्स जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउसों की तारीफ की, जिनके पास पर्याप्त रिज़र्व फंड होता है। उन्होंने कहा कि बड़े हाउस समय पर भुगतान कर सकते हैं, जबकि छोटे और मध्यम हाउस इस समस्या से जूझते हैं।
क्या अन्य टीवी एक्टर्स ने भी इस मुद्दे को सार्वजनिक किया है?
हाँ, अभिनेता वरुण बडोला और अर्जुन बिजलानी ने पहले इसी पेमेंट देरी की समस्या पर सार्वजनिक रूप से बात की है। यह दर्शाता है कि यह एक व्यापक, इंडस्ट्री-स्तरीय समस्या है।
नए कलाकारों पर पेमेंट देरी का क्या असर पड़ता है?
कुनिका के अनुसार, नए कलाकारों के पास आर्थिक बफर नहीं होता, इसलिए वे किराए, भोजन और अन्य खर्चों के लिए कर्ज़ या अनौपचारिक उधार पर निर्भर हो जाते हैं। यह उनके जीवन स्तर को प्रभावित करता है और इंडस्ट्री में नई प्रतिभा को आकर्षित करना मुश्किल बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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