क्या हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा में <b>डर</b>, <b>प्यार</b>, <b>उम्मीद</b> और <b>संघर्ष</b> जैसी भावनाओं का अनुभव होना जरूरी है: सूरज सिंह?

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क्या हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा में <b>डर</b>, <b>प्यार</b>, <b>उम्मीद</b> और <b>संघर्ष</b> जैसी भावनाओं का अनुभव होना जरूरी है: सूरज सिंह?

सारांश

सूरज सिंह, बीलाइव प्रोडक्शंस के निर्माता, हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा की नई परिभाषा पेश कर रहे हैं, जिसमें भावनाओं का गहरा अनुभव होता है। उनकी नई फिल्म 'राहु केतु' दर्शकों को डर, प्यार, उम्मीद और संघर्ष की जटिलताओं से जोड़ने का प्रयास करती है। क्या ये भावनाएँ सिनेमा की वास्तविक ताकत हैं?

Key Takeaways

  • डर और प्यार जैसी भावनाएं दर्शकों को जोड़ती हैं।
  • सिनेमा का असली मजा तब आता है जब फैंटेसी वास्तविकता से जुड़ती है।
  • सूरज सिंह का दृष्टिकोण दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने पर केंद्रित है।
  • 'राहु केतु' जैसे प्रोजेक्ट्स नई कहानी कहने के तरीके को दर्शाते हैं।
  • फिल्म में अनुभवी कलाकारों का काम इसे और भी आकर्षक बनाता है।

मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई से भारतीय सिनेमा में एक नया प्रयोग लगातार किया जा रहा है, जहाँ फिल्में केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहकर दर्शकों के दिलों और भावनाओं से जुड़ने का प्रयास करती हैं। ऐसे ही एक निर्माता हैं सूरज सिंह, जो बीलाइव प्रोडक्शंस के तहत नई और साहसी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाने का काम कर रहे हैं।

सूरज सिंह का मूल मंत्र यही है कि फिल्म भले ही कल्पना पर आधारित हो, लेकिन उसे दर्शकों के लिए भावनात्मक रूप से सच्चा होना चाहिए। उनका नया प्रोजेक्ट 'राहु केतु' इसका जीवंत उदाहरण है, जिसमें भव्य फैंटेसी और मानवीय भावनाओं का अनोखा मिश्रण देखने को मिलेगा।

निर्माता सूरज सिंह ने कहा, ''फैंटेसी तब प्रभावी होती है जब वह केवल दिखावे की दुनिया न हो, बल्कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ सके। दर्शक थिएटर में बड़े पर्दे की भव्यता देखने जरूर आते हैं, लेकिन वहीं उन्हें कहानी की भावनाओं से जुड़ने की भी उम्मीद होती है। चाहे कहानी किसी भी काल्पनिक दुनिया में रची गई हो, डर, प्यार, उम्मीद और संघर्ष जैसी जानी-पहचानी भावनाएं हमेशा दर्शक को खींचती हैं। इसी संतुलन को बनाए रखना फिल्म निर्माण की शैली की सबसे बड़ी ताकत है।''

सूरज सिंह ने कहा कि उनका लक्ष्य केवल आंखों को पसंद आने वाला विजुअल निर्माण करना नहीं है, बल्कि कहानी को इस तरह पेश करना है कि दर्शक उसके पात्रों और भावनाओं से खुद को जोड़ लें।

हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा को लेकर सूरज सिंह ने कहा, ''सिनेमा का असली मजा तब आता है जब फैंटेसी वास्तविक भावनाओं के साथ जुड़ती है। दर्शक चाहे किसी भी उम्र या पृष्ठभूमि के हों, उन्हें कहानी में अपने लिए कुछ महसूस होना चाहिए। डर, प्यार, उम्मीद और संघर्ष जैसी भावनाओं का अनुभव होना जरूरी है। यही कारण है कि 'राहु केतु' जैसी फिल्मों को लेकर लोग अपना उत्साह जता रहे हैं।''

'राहु केतु' फिल्म का निर्देशन विपुल विग कर रहे हैं, जिन्हें पहले 'फुकरे' जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है। फिल्म में पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा, चंकी पांडे, शालिनी पांडे, अमित सियाल और पीयूष मिश्रा जैसे अनुभवी और दमदार कलाकार हैं।

फिल्म 16 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।

Point of View

और यह फिल्म उद्योग के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

सूरज सिंह का नया प्रोजेक्ट 'राहु केतु' कब रिलीज हो रहा है?
'राहु केतु' फिल्म 16 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।
'राहु केतु' फिल्म का निर्देशन कौन कर रहा है?
इस फिल्म का निर्देशन विपुल विग कर रहे हैं, जो 'फुकरे' जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।
सूरज सिंह का फिल्म निर्माण में क्या दृष्टिकोण है?
सूरज सिंह का मानना है कि फिल्में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों और भावनाओं से जुड़ने का माध्यम होनी चाहिए।
'राहु केतु' में कौन-कौन से कलाकार हैं?
फिल्म में पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा, चंकी पांडे, शालिनी पांडे, अमित सियाल और पीयूष मिश्रा जैसे अनुभवी कलाकार हैं।
हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा में क्या महत्वपूर्ण है?
हाई-कॉन्सेप्ट सिनेमा में डर, प्यार, उम्मीद और संघर्ष जैसी भावनाओं का अनुभव होना जरूरी है।
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