ललिता पवार: 9 वर्ष की आयु में फिल्मी सफर की शुरुआत, 7 दशकों में 700 से अधिक फिल्मों में काम
सारांश
Key Takeaways
- ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को हुआ।
- उन्होंने 9 साल की उम्र में फिल्मी करियर की शुरुआत की।
- 700 से अधिक फिल्मों में काम किया।
- उनका खतरनाक सास का किरदार प्रसिद्ध हुआ।
- उन्होंने रामायण में मंथरा का किरदार निभाया।
मुंबई, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ललिता पवार... हिंदी सिनेमा के दर्शक इनके नाम और चेहरे से भली-भांति परिचित हैं। चाहे वह खतरनाक सास का किरदार हो या रामानंद सागर के रामायण में मंथरा का, उन्होंने अपनी भूमिकाओं को इतनी गहराई से जीया कि दर्शक उनकी प्रभावशाली छवि को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनकी जयंती 18 अप्रैल को मनाई जाएगी।
हिंदी सिनेमा में 'सास' जैसे किरदार की छवि इतनी प्रबल हो गई कि दर्शक उन्हें देखकर डरने लगे, लेकिन असल जिंदगी में वह एक मेहनती और लगनशील अभिनेत्री थीं। मात्र 9 वर्ष की आयु में फिल्मों में कदम रखने वाली ललिता पवार ने 70 वर्षों तक सक्रिय रहकर 700 से अधिक फिल्मों में काम किया और भारतीय सिनेमा में एक अनोखा स्थान बनाया।
ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को नासिक के योला गांव में हुआ था। उनका असली नाम अंबा लक्ष्मण राव शगुन था। उनके पिता, लक्ष्मण राव शगुन, सिल्क और कॉटन के बड़े व्यापारी थे। केवल 9 साल की उम्र में, उन्होंने एक मूक फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम किया, जिसके लिए उन्हें केवल 18 रुपए मिले थे। यह उल्लेखनीय है कि उस समय लड़कियों को स्कूल भेजना आम नहीं था, लेकिन उनके पिता ने घर पर ही उर्दू-हिंदी शिक्षक और शास्त्रीय संगीत की व्यवस्था कर दी थी।
ललिता पवार बेहद आकर्षक और प्रतिभाशाली थीं। जल्दी ही वह हिंदी सिनेमा की सबसे महंगी हीरोइन बन गईं। वह खुद अपने गाने भी गा लेती थीं, लेकिन 1942 में फिल्म ‘जंग आजादी’ की शूटिंग के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई। एक दृश्य में भगवान दादा ने उन्हें इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि उनकी एक आंख की नस फट गई। गलत दवाई लेने से उनके चेहरे पर लकवा मार गया। इस चोट के कारण उनकी एक आंख छोटी हो गई और लगभग तीन साल तक वह फिल्म इंडस्ट्री से दूर रहीं। हीरोइन बनने का उनका सपना चकनाचूर हो गया, लेकिन ललिता पवार ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को पुनः मजबूत बनाया और एक कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में वापसी की।
साल 1948 में फिल्म ‘गृहस्थी’ से उनकी वापसी हुई। 1950 में वी. शांताराम की फिल्म ‘दहेज’ में उन्होंने पहली बार क्रूर सास का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें रातोंरात प्रसिद्धि दिलाई। दर्शक इतने प्रभावित हुए कि कई माताएं ईश्वर से प्रार्थना करने लगीं कि उनकी बेटियों को ललिता पवार जैसी सास न मिले। उन्होंने दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर जैसे सितारों के साथ काम किया, जो उम्र में उनसे छोटे थे, लेकिन उन्हें मां के रोल निभाने पड़े। उनकी प्रमुख फिल्मों में श्री 420, आनंद, दाग, नसीब, बॉम्बे टू गोवा, अनाड़ी आदि शामिल हैं।
रामानंद सागर के महाकाव्य रामायण में उन्होंने मंथरा का किरदार इतनी उत्कृष्टता से निभाया कि आज भी लोग उन्हें मंथरा के नाम से याद करते हैं।
ललिता पवार की दो शादियां हुईं। पहली शादी फिल्म प्रोड्यूसर जी.पी. पवार से हुई, लेकिन वह तलाक में समाप्त हो गई। दूसरी शादी राजकुमार गुप्ता से हुई, जिनसे उन्हें एक बेटा जय पवार हुआ। 24 फरवरी 1998 को 81 साल की उम्र में पुणे के अपने बंगले ‘आरोही’ में उनका निधन हो गया। जबड़े के कैंसर से पीड़ित ललिता पवार की मौत की खबर तीन दिन बाद पता चली थी।