मातृत्व और करियर को एक साथ कैसे निभाएंगी लिसा रे, जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी
सारांश
Key Takeaways
- महिलाएं मातृत्व के साथ अपने सपनों को पूरा कर सकती हैं।
- बच्चों को महत्वाकांक्षा का महत्व समझाना आवश्यक है।
- कामकाजी माताएं भी अपने करियर में प्रगति कर सकती हैं।
- प्यार और सपनों को साथ में लेकर चलना संभव है।
- लिसा रे की कहानी प्रेरणा का स्रोत है।
मुंबई, १३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। कामकाजी माताओं पर घर और कार्यालय दोनों की जिम्मेदारी होती है। कभी-कभी परिवार की देखभाल के कारण करियर में ब्रेक लेना पड़ता है, जिससे प्रगति में रुकावट आ जाती है। सोमवार को अभिनेत्री लिसा रे ने इस मुद्दे पर अपनी राय दी।
उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नोट साझा किया, "महिलाएं मातृत्व के साथ अपने सपनों को भी पूरा कर सकती हैं। उन्हें अपने बच्चों को यह दिखाना चाहिए कि महत्वाकांक्षा मातृत्व के साथ खत्म नहीं होती, बल्कि दोनों को साथ में निभाया जा सकता है।"
लिसा ने बताया कि एक दिन वे सुबह-सुबह एक फ्लाइट पकड़ने के लिए घर से निकलीं। उस समय उनकी बेटियां सो रही थीं, जिससे उन्हें विदाई नहीं कर सकीं और ना ही उन्हें गले लगा सकीं।
उन्होंने लिखा, "कामकाजी मां होना कभी भी सरल नहीं होता। मैं फ्लाइट पकड़ने के लिए एक खालीपन के साथ पहुंची, क्योंकि बेटियां सो रही थीं। फिर मैंने अपने बैग में उनका लिखा हुआ एक छोटा सा नोट पाया और उसी पल सब कुछ रुक गया। यही वजह है कि मैं यह सब करती हूं। मैं उन्हें बहुत याद करती हूं, ऐसी याद जो दिल तक महसूस होती है।"
उन्होंने आगे कहा कि वे अपनी बेटियों को यह बताना चाहती हैं कि उनकी मां के सपने भी अभी बाकी हैं। मां बनने के बाद भी सपने समाप्त नहीं होते। प्यार और सपनों को एक साथ लेकर चला जा सकता है। लिसा ने लिखा, "मेरी बेटियां मेरी पूरी दुनिया हैं। हर लंबा दिन, सुबह की जल्दी, यात्रा—सब कुछ अंततः उन्हीं के लिए है। मुझे उम्मीद है कि एक दिन वे समझेंगी कि मैं एक ऐसी जिंदगी चुन रही हूं, जहां वे देख सकें कि क्या-क्या संभव है। मैं उन्हें हर पल अपने साथ लेकर चलती हूं।"
लिसा ने २०१२ में कैलिफोर्निया के बैंकिंग एग्जीक्यूटिव जैसन देहनी से शादी की थी। साल २०१८ में सरोगेसी के माध्यम से वे जुड़वां बेटियों सूफी और सोल की मां बनीं।