'तेजाब' की मोहिनी बनीं माधुरी दीक्षित: निर्देशक एन. चंद्रा ने बताया वो किस्सा जो किसी को नहीं पता था
सारांश
मुख्य बातें
बॉलीवुड की 'धक-धक गर्ल' माधुरी दीक्षित और फिल्म 'तेजाब' का नाम आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। लेकिन दशकों बाद अब फिल्म के निर्देशक एन. चंद्रा ने खुलासा किया है कि 'मोहिनी' के इस यादगार किरदार के लिए माधुरी का चुनाव महज़ संयोग नहीं, बल्कि एक सुविचारित और दृढ़ निर्णय था।
पहली मुलाकात में ही दिख गई थी 'खास बात'
डांस रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' के एक एपिसोड में एन. चंद्रा ने उस दौर की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि माधुरी से उनकी पहली मुलाकात फिल्म 'बजरंगी' के सेट पर हुई थी, जब वे उस फिल्म की एडिटिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जब मैंने पहली बार माधुरी दीक्षित को देखा था, तभी मुझे लगा था कि इस लड़की में कुछ अलग बात है।' उस समय माधुरी अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, फिर भी उनकी उपस्थिति ने चंद्रा पर गहरी छाप छोड़ी।
'मोहिनी' के लिए एकमात्र नाम था माधुरी का
एन. चंद्रा ने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने 'तेजाब' की पटकथा पर काम शुरू किया और 'मोहिनी' के किरदार की कल्पना की, तब उनके मन में केवल एक ही नाम था। उन्होंने कहा, 'इस भूमिका के लिए मेरी पहली पसंद भी माधुरी थीं और आखिरी पसंद भी। मैंने किसी दूसरी अभिनेत्री के बारे में कभी नहीं सोचा, क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि इस किरदार को वही सबसे बेहतर तरीके से निभा सकती हैं।' यह वह दौर था जब माधुरी को बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बनाने का इंतज़ार था — और 'तेजाब' वह मोड़ साबित हुई।
किस्मत ने भी निभाई अहम भूमिका
निर्देशक ने एक दिलचस्प संयोग का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के मुख्य अभिनेता अनिल कपूर के सेक्रेटरी राकेश नाथ उस समय माधुरी दीक्षित के भी सेक्रेटरी थे। इस साझे प्रबंधन के कारण दोनों कलाकारों की तारीखें और अन्य व्यावहारिक व्यवस्थाएँ तय करना आसान हो गया। एन. चंद्रा ने कहा, 'अगर किस्मत साथ दे तो कई मुश्किल काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं।'
फिल्म की ऐतिहासिक सफलता
11 नवंबर 1988 को रिलीज़ हुई 'तेजाब' उस दौर की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलताओं में गिनी जाती है। माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया। अनुपम खेर, चंकी पांडे, किरण कुमार और सुरेश ओबेरॉय ने भी अहम भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म साल 1988 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी और इसने माधुरी को हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्रियों की पंक्ति में ला खड़ा किया।
माधुरी का करियर और 'तेजाब' का योगदान
'तेजाब' से पहले माधुरी दीक्षित कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं, लेकिन सफलता उनसे दूर थी। यह ऐसे समय में आई जब हिंदी सिनेमा में नायिकाओं के लिए डांस और अभिनय दोनों में एक साथ दक्षता की माँग बढ़ रही थी। 'एक दो तीन' गाने पर उनके नृत्य ने उन्हें रातोंरात घर-घर में पहचान दिला दी और 'धक-धक गर्ल' का खिताब उनका स्थायी परिचय बन गया। गौरतलब है कि यह फिल्म आज भी 1980 के दशक की बॉलीवुड विरासत का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है।