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'तेजाब' की मोहिनी बनीं माधुरी दीक्षित: निर्देशक एन. चंद्रा ने बताया वो किस्सा जो किसी को नहीं पता था

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'तेजाब' की मोहिनी बनीं माधुरी दीक्षित: निर्देशक एन. चंद्रा ने बताया वो किस्सा जो किसी को नहीं पता था

सारांश

'तेजाब' की 'मोहिनी' बनने की कहानी उतनी ही दिलचस्प है जितनी फिल्म खुद। निर्देशक एन. चंद्रा ने दशकों बाद बताया कि पहली मुलाकात में ही माधुरी दीक्षित की 'खास बात' ने उन्हें मोहित कर लिया था — और 'मोहिनी' के लिए उन्होंने कभी किसी दूसरे नाम पर विचार ही नहीं किया।

मुख्य बातें

चंद्रा ने 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' में बताया कि माधुरी दीक्षित 'मोहिनी' के लिए उनकी एकमात्र पसंद थीं।
माधुरी से पहली मुलाकात फिल्म 'बजरंगी' के सेट पर हुई थी, जब एन.
चंद्रा उसकी एडिटिंग कर रहे थे।
अनिल कपूर और माधुरी दोनों के सेक्रेटरी राकेश नाथ थे, जिससे फिल्म की व्यवस्थाएँ आसान हुईं।
'तेजाब' 11 नवंबर 1988 को रिलीज़ हुई और 1988 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी।
फिल्म ने माधुरी दीक्षित को 'धक-धक गर्ल' के रूप में हिंदी सिनेमा में स्थायी पहचान दिलाई।

बॉलीवुड की 'धक-धक गर्ल' माधुरी दीक्षित और फिल्म 'तेजाब' का नाम आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। लेकिन दशकों बाद अब फिल्म के निर्देशक एन. चंद्रा ने खुलासा किया है कि 'मोहिनी' के इस यादगार किरदार के लिए माधुरी का चुनाव महज़ संयोग नहीं, बल्कि एक सुविचारित और दृढ़ निर्णय था।

पहली मुलाकात में ही दिख गई थी 'खास बात'

डांस रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' के एक एपिसोड में एन. चंद्रा ने उस दौर की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि माधुरी से उनकी पहली मुलाकात फिल्म 'बजरंगी' के सेट पर हुई थी, जब वे उस फिल्म की एडिटिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जब मैंने पहली बार माधुरी दीक्षित को देखा था, तभी मुझे लगा था कि इस लड़की में कुछ अलग बात है।' उस समय माधुरी अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं, फिर भी उनकी उपस्थिति ने चंद्रा पर गहरी छाप छोड़ी।

'मोहिनी' के लिए एकमात्र नाम था माधुरी का

एन. चंद्रा ने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने 'तेजाब' की पटकथा पर काम शुरू किया और 'मोहिनी' के किरदार की कल्पना की, तब उनके मन में केवल एक ही नाम था। उन्होंने कहा, 'इस भूमिका के लिए मेरी पहली पसंद भी माधुरी थीं और आखिरी पसंद भी। मैंने किसी दूसरी अभिनेत्री के बारे में कभी नहीं सोचा, क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि इस किरदार को वही सबसे बेहतर तरीके से निभा सकती हैं।' यह वह दौर था जब माधुरी को बड़े पर्दे पर अपनी पहचान बनाने का इंतज़ार था — और 'तेजाब' वह मोड़ साबित हुई।

किस्मत ने भी निभाई अहम भूमिका

निर्देशक ने एक दिलचस्प संयोग का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के मुख्य अभिनेता अनिल कपूर के सेक्रेटरी राकेश नाथ उस समय माधुरी दीक्षित के भी सेक्रेटरी थे। इस साझे प्रबंधन के कारण दोनों कलाकारों की तारीखें और अन्य व्यावहारिक व्यवस्थाएँ तय करना आसान हो गया। एन. चंद्रा ने कहा, 'अगर किस्मत साथ दे तो कई मुश्किल काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं।'

फिल्म की ऐतिहासिक सफलता

11 नवंबर 1988 को रिलीज़ हुई 'तेजाब' उस दौर की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलताओं में गिनी जाती है। माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने भरपूर प्यार दिया। अनुपम खेर, चंकी पांडे, किरण कुमार और सुरेश ओबेरॉय ने भी अहम भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म साल 1988 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी और इसने माधुरी को हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्रियों की पंक्ति में ला खड़ा किया।

माधुरी का करियर और 'तेजाब' का योगदान

'तेजाब' से पहले माधुरी दीक्षित कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं, लेकिन सफलता उनसे दूर थी। यह ऐसे समय में आई जब हिंदी सिनेमा में नायिकाओं के लिए डांस और अभिनय दोनों में एक साथ दक्षता की माँग बढ़ रही थी। 'एक दो तीन' गाने पर उनके नृत्य ने उन्हें रातोंरात घर-घर में पहचान दिला दी और 'धक-धक गर्ल' का खिताब उनका स्थायी परिचय बन गया। गौरतलब है कि यह फिल्म आज भी 1980 के दशक की बॉलीवुड विरासत का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी चंद्रा ने स्टार-पावर की बजाय अपनी परख पर भरोसा किया। आज जब OTT और डेटा-ड्रिवन कास्टिंग का दौर है, यह किस्सा याद दिलाता है कि कभी-कभी एक निर्देशक की सहज पहचान ही किसी अभिनेत्री का करियर बदल देती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्देशक एन. चंद्रा ने 'तेजाब' की मोहिनी के बारे में क्या खुलासा किया?
एन. चंद्रा ने बताया कि 'मोहिनी' के किरदार के लिए माधुरी दीक्षित उनकी पहली और आखिरी पसंद थीं — उन्होंने कभी किसी दूसरी अभिनेत्री के बारे में सोचा ही नहीं। यह खुलासा उन्होंने 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' के एक एपिसोड में किया।
माधुरी दीक्षित और एन. चंद्रा की पहली मुलाकात कहाँ हुई थी?
दोनों की पहली मुलाकात फिल्म 'बजरंगी' के सेट पर हुई थी, जब एन. चंद्रा उस फिल्म की एडिटिंग कर रहे थे। उस समय माधुरी अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं।
फिल्म 'तेजाब' कब रिलीज़ हुई और इसे कितनी सफलता मिली?
'तेजाब' 11 नवंबर 1988 को रिलीज़ हुई और साल 1988 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी। माधुरी दीक्षित और अनिल कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया।
'तेजाब' में माधुरी दीक्षित के अलावा और कौन-कौन से कलाकार थे?
फिल्म में अनिल कपूर मुख्य अभिनेता थे। अनुपम खेर, चंकी पांडे, किरण कुमार और सुरेश ओबेरॉय ने भी अहम भूमिकाएँ निभाईं।
'तेजाब' ने माधुरी दीक्षित के करियर को कैसे बदला?
'तेजाब' से पहले माधुरी को बड़ी सफलता नहीं मिली थी, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें 'धक-धक गर्ल' का खिताब दिलाया और हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्रियों में स्थापित कर दिया। 'एक दो तीन' गाने पर उनका नृत्य आज भी बॉलीवुड का प्रतिष्ठित पल माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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