महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण: रुपाली गांगुली की खुशी का ऐतिहासिक पल
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण एक ऐतिहासिक कदम है।
- रुपाली गांगुली ने इस पर खुशी व्यक्त की है।
- बिल का उद्देश्य महिलाओं की प्रतिनिधित्व बढ़ाना है।
- यह शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
- महिलाओं को सशक्तिकरण का नया अवसर मिलेगा।
मुंबई, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण वाले बिल को ऐतिहासिक बताते हुए अपनी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह बिल 2023 में पारित होने के बाद अब लागू होने वाला है, जिससे अगले चुनाव में संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिलाएं होंगी।
राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में रुपाली गांगुली ने कहा, “इस प्रक्रिया में कई साल लग गए, लगभग 27-28 साल। 2023 में यह बिल पारित हुआ और अब यह लागू होने जा रहा है। यह हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पहले ऐसा लगता था कि कोई पीछे से नहीं आ रहा, लेकिन अब मेरी सरकार मेरे साथ है।”
रुपाली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए इतने बड़े सुधार मोदी जी के नेतृत्व में ही संभव हो पाए हैं। उन्होंने सुकन्या समृद्धि योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले के समय में बच्चियों को जन्म के समय ही मार दिया जाता था, लेकिन अब ऐसी घटनाएं सुनाई नहीं देतीं।
उन्होंने कहा, “मोदी जी हर महिला को अपनी मां, बहन और बेटी के रूप में देखते हैं। उन्होंने महिलाओं को बहुत सम्मान दिया है। मुझे गर्व है कि अब संसद में 33 प्रतिशत महिलाएं होंगी।” उन्होंने सावित्रीबाई फुले के प्रसिद्ध वाक्य “एक बाई शिकली तर पूर्णा परिवार शिकतो” का उल्लेख करते हुए कहा कि जब एक महिला पढ़ती है, तो पूरा परिवार पढ़ता है। हमने लंबा सफर तय किया है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है।”
रुपाली ने यह भी कहा कि समाज में कई घरों में अभी भी लड़कियों के साथ भेदभाव होता है, लेकिन धीरे-धीरे सोच में बदलाव आ रहा है। उन्होंने अपनी पसंदीदा फिल्म ‘धुरंधर’ और टीवी शो ‘अनुपमा’ का उदाहरण देते हुए कहा कि ये कहानियां समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। ‘अनुपमा’ में पहली बार टीवी पर ‘जय श्री राम’ का नारा लगाया गया और रामनवमी दिखाई गई, जो पहले कभी नहीं हुआ।
महिलाओं के आरक्षण का नीति पर क्या असर पड़ेगा? इस सवाल पर रुपाली ने कहा कि जब महिलाएं संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ आएंगी, तो नीति-निर्माण में बड़ा बदलाव आएगा। महिलाएं एक मां, बेटी और बहन के नजरिए से सोचती हैं और उनकी सोच में भावनात्मक दृष्टिकोण अधिक होता है, जो शिक्षा, महिला सुरक्षा और परिवार से जुड़े मुद्दों पर बेहतर नीतियां बनाने में मदद करेगा। हालाँकि, मैं यह नहीं कहती कि पुरुषों में भावनाएं नहीं होतीं, उनमें भी होती हैं।”
उन्होंने कहा, “हम सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन अब महिलाओं को असली शक्ति मिल गई है। जब महिलाएं खुद नीतियां बनाएंगी, तो शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा।”
रुपाली ने पीएम मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी प्रशंसा की और कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और रात में बाहर निकलने की स्थिति को बेहतर बनाया है। अंत में, रुपाली ने कहा, “मेरे सेट पर हेयरड्रेसर से लेकर सभी महिलाएं इस खबर से बहुत उत्साहित हैं। यह बदलाव ग्रासरूट स्तर तक पहुंच गया है। मैं मोदी जी का धन्यवाद करती हूं। उन्होंने वो कर दिखाया जो कोई और नहीं कर सका।”