मंजिमा मोहन ने 10 साल बाद लौटाया भरतनाट्यम से नाता, इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री मंजिमा मोहन ने करीब 10 साल के लंबे अंतराल के बाद शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम की प्रैक्टिस फिर से शुरू की है। अभिनेत्री ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर इस भावनात्मक वापसी की जानकारी दी, जिसमें वह भरतनाट्यम की मुद्राओं में नृत्य करती नज़र आ रही हैं।
बचपन से शुरू हुआ भरतनाट्यम का सफर
मंजिमा ने अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी माँ — जो स्वयं एक प्रशिक्षित नर्तकी हैं — ने उन्हें 6 साल की उम्र में भरतनाट्यम से परिचित कराया था। 10 साल की उम्र के आसपास उन्होंने गुरुवायूर में अपना पहला अरंगेत्रम किया और कॉलेज तक इस कला को सीखती रहीं। गौरतलब है कि उनकी माँ कलामंडलम गिरिजा स्वयं एक प्रख्यात नर्तकी हैं, और पिता विपिन मोहन एक प्रसिद्ध छायाकार हैं — यानी कला और सौंदर्यबोध मंजिमा को विरासत में मिला है।
उन्होंने लिखा, 'मेरी मां ने मुझे 6 साल की उम्र में भरतनाट्यम से मिलवाया था, वो खुद भी एक ट्रेंड डांसर हैं। मैंने 10 साल की उम्र के आसपास गुरुवायूर में अपना पहला अरंगेत्रम किया था और कॉलेज तक सीखना जारी रखा। और फिर किसी तरह जिंदगी में सब कुछ बदल गया और लगभग 10 साल तक मैंने प्रैक्टिस नहीं की।'
क्यों छूटी प्रैक्टिस
मंजिमा ने स्वीकार किया कि इस लंबे अंतराल के दौरान उन्होंने सेमी-क्लासिकल डांस किया, लेकिन भरतनाट्यम में वापसी से हमेशा हिचकिचाहट रही — क्योंकि प्रैक्टिस पूरी तरह छूट चुकी थी। उन्होंने कहा कि यह 'बहुत लंबे समय बाद एक छोटी सी कोशिश है' और उन्हें लगभग भूल ही गया था कि इस कला को करना उन्हें कितना पसंद है।
अभिनेत्री ने इस विराम पर अफसोस जताते हुए लिखा कि उन्हें दुख है कि इतने लंबे समय तक इतनी खूबसूरत कला से दूर रहीं, लेकिन इस वापसी को लेकर वह बेहद खुश हैं और 'आगे और भी बहुत कुछ करना है।'
गुरु को दिया धन्यवाद
मंजिमा ने अपनी पोस्ट के अंत में अपनी नृत्य गुरु को विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, 'इस खूबसूरत डांस को सिखाने और मुझे कोशिश करने के लिए प्रेरित करने के लिए मास्टर आपका धन्यवाद।' यह पोस्ट कला प्रेमियों और प्रशंसकों के बीच भावनात्मक प्रतिक्रिया पाने में सफल रही।
मंजिमा मोहन का फिल्मी सफर
मंजिमा मोहन मुख्यतः तमिल, मलयालम और तेलुगु फिल्मों में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मलयालम फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में की थी। वर्ष 2000 में आई फिल्म 'मधुरानोमबारकट्टू' के लिए उन्हें प्रतिष्ठित केरल राज्य फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार) से सम्मानित किया गया था।
निर्देशक गौतम मेनन की फिल्म 'अच्चम एनबधु मदामैयादा' से उन्होंने तमिल सिनेमा में कदम रखा। इसी फिल्म के तेलुगु संस्करण 'साहसम स्वासगा सागीपो' में भी उन्होंने अभिनय किया, और इस दमदार डेब्यू के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड फॉर बेस्ट फीमेल डेब्यू — साउथ मिला। यह वापसी न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि भारतीय शास्त्रीय कला की ओर बढ़ती जागरूकता का भी प्रतीक है।