क्या मोगैम्बो खुश हुआ? 40 साल की उम्र में करियर ने टेक ऑफ किया और अमरीश पुरी बने बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन
सारांश
Key Takeaways
- अमरीश पुरी ने 40 की उम्र में करियर की शुरुआत की।
- उन्होंने करीब 400 फिल्मों में काम किया।
- 'मोगैम्बो' उनका सबसे यादगार किरदार है।
- उन्होंने थिएटर में भी काम किया और कई पुरस्कार जीते।
- उनका शौक था टोपी
मुंबई, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अद्वितीय स्थान प्राप्त किया। इनमें एक नाम है अमरीश पुरी, जिनका करियर लगभग 40 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ था। यह साबित करता है कि बड़े सितारे बनने के लिए ज़रूरी नहीं है कि आप युवा अवस्था में ही शुरुआत करें।
अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब के नवांशहर (वर्तमान में भगत सिंह नगर) में हुआ। उनके परिवार में पहले से ही अभिनय की परंपरा थी। उनके बड़े भाई, मदन पुरी और चमन पुरी, पहले से ही फिल्म उद्योग में सक्रिय थे। बचपन से ही उन्हें अभिनय का शौक था, और उन्होंने बड़े होकर फिल्मी दुनिया में करियर बनाने का सपना देखा। लेकिन उनकी शुरुआत आसान नहीं थी।
22 वर्ष की उम्र में अमरीश ने पहले स्क्रीन टेस्ट के लिए आवेदन किया, लेकिन आवाज और लुक के कारण उन्हें असफलता मिली। इसके बाद उन्होंने इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन में नौकरी शुरू की, साथ ही थिएटर में भी काम किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपने टैलेंट को दर्शाया और कई पुरस्कार भी जीते।
बॉलीवुड में उनका पहला रोल 1971 में आई फिल्म 'रेशमा और शेरा' में था, लेकिन उन्हें असली पहचान 39-40 साल की उम्र में मिली। 'मिस्टर इंडिया' में मोगैम्बो का किरदार उनके सबसे प्रसिद्ध किरदारों में से एक बना। इस किरदार के लिए वे पहले चयनित नहीं थे, लेकिन उन्होंने इसे इतना जीवंत बना दिया कि यह बॉलीवुड के सबसे यादगार विलेन किरदारों में शुमार हो गया।
अमरीश पुरी ने 'नगीना', 'लोहा', 'सौदागर', 'गदर', और 'नायक' जैसी फिल्मों में भी अपने कौशल का लोहा मनवाया। उनकी आवाज और मौजूदगी ने हमेशा दर्शकों को प्रभावित किया। यहां तक कि स्टीवन स्पीलबर्ग ने उन्हें 'इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम' में कास्ट किया।
अमरीश पुरी को उनकी बेहतरीन अभिनय के लिए कई पुरस्कार मिले, जिनमें फिल्मफेयर अवार्ड भी शामिल हैं। उनके पास 200 से ज्यादा टोपी
अमरीश पुरी ने आखिरी बार फिल्म 'किसना: द वॉरियर पोएट' में काम किया। उनका निधन 2005 में हुआ, लेकिन उनके किरदार और संवाद आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।