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मोना सिंह का खुलासा: '90% ऑफर्स को ठुकराया, तभी बदली करियर की दिशा'

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मोना सिंह का खुलासा: '90% ऑफर्स को ठुकराया, तभी बदली करियर की दिशा'

सारांश

जस्सी की छवि से बाहर निकलना आसान नहीं था — मोना सिंह ने 90% ऑफर ठुकराकर वह रास्ता खुद चुना। '3 इडियट्स' से 'कोहरा सीजन 2' तक का यह सफर बताता है कि बॉलीवुड में 'ना' कहना कभी-कभी सबसे बड़ी 'हाँ' साबित होती है।

मुख्य बातें

मोना सिंह ने अपने करियर में करीब 90 प्रतिशत टीवी शो के ऑफर जानबूझकर ठुकराए।
उनके अनुसार करियर में 60 प्रतिशत भूमिका कलाकार के खुद के फैसलों की और 40 प्रतिशत इंडस्ट्री के हालात की होती है।
'जस्सी जैसी कोई नहीं' ( 2003 ) की सफलता के बाद उन्हें लंबे समय तक उसी साँचे के किरदार ऑफर होते रहे।
2009 में राजकुमार हिरानी की '3 इडियट्स' से फिल्मी पारी की शुरुआत की।
चुनिंदा प्रोजेक्ट्स — 'मेड इन हेवन' , 'लाल सिंह चड्ढा' , 'कोहरा सीजन 2' — ने उनकी नई पहचान स्थापित की।

अभिनेत्री मोना सिंह ने हाल ही में अपने दो दशक से अधिक लंबे करियर पर बेबाकी से बात की और बताया कि 'ना' कहने की आदत ने उनकी पहचान को पूरी तरह बदल दिया। मुंबई में दिए गए एक बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि करियर की दिशा तय करने में 60 प्रतिशत भूमिका उनके अपने फैसलों की रही, जबकि शेष 40 प्रतिशत इंडस्ट्री के हालात ने तय किए।

जस्सी की छवि से आगे निकलने की चुनौती

2003 में टीवी शो 'जस्सी जैसी कोई नहीं' से घर-घर पहचानी जाने वाली मोना सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसी छवि से बाहर निकलने की थी। उन्होंने बताया, 'जस्सी' की अपार सफलता के बाद दर्शकों ने उन्हें एक आम, सीधी-सादी लड़की के रूप में इतनी गहराई से स्वीकार कर लिया था कि उन्हें लगातार उसी साँचे के किरदार और शो ऑफर होने लगे।

उन्होंने कहा, 'उस समय मेरे आसपास कई ऐसे फैसले लिए जा रहे थे, जिनमें मेरी अपनी पसंद की भूमिका कम थी। उस दौर में अपनी पहचान को एक अलग दिशा में ले जाने के लिए मेरे पास ज़्यादा विकल्प नहीं थे।'

90 प्रतिशत ऑफर्स को 'ना' — असली टर्निंग पॉइंट

मोना ने बताया कि करियर का असली मोड़ तब आया जब उन्होंने सोच-समझकर ऑफर्स अस्वीकार करने शुरू किए। उनके अनुसार, उन्होंने करीब 90 प्रतिशत टीवी शो के प्रस्ताव इसलिए ठुकराए क्योंकि वे सिर्फ लगातार काम करते रहने के बजाय ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देना चाहती थीं जो उन्हें एक कलाकार के रूप में आगे ले जाएँ।

उन्होंने स्पष्ट कहा, 'मेरे लिए सही प्रोजेक्ट चुनना उतना ही जरूरी रहा है, जितना किसी प्रोजेक्ट को हाँ कहना।' इसी रणनीति के चलते उन्होंने 'मेड इन हेवन', 'लाल सिंह चड्ढा', 'बैड्स ऑफ बॉलीवुड' और 'कोहरा सीजन 2' जैसे चुनिंदा प्रोजेक्ट्स का इंतजार किया।

इंडस्ट्री और कलाकार — 40:60 का फॉर्मूला

मोना सिंह ने करियर-निर्माण को लेकर एक स्पष्ट नज़रिया साझा किया। उनके अनुसार इंडस्ट्री कलाकार को स्क्रिप्ट, प्लेटफॉर्म और अवसर देती है, लेकिन उन्हें चुनने या ठुकराने का फैसला पूरी तरह कलाकार का होता है।

उन्होंने कहा, 'करियर का पूरा ढाँचा सिर्फ एक कलाकार अकेले नहीं बनाता। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें एक तरफ कलाकार की अपनी सोच और दूसरी तरफ बाहर के हालात होते हैं।'

करियर का सफर: टीवी से बड़े पर्दे तक

मोना सिंह ने 2003 में 'जस्सी जैसी कोई नहीं' से पहचान बनाई। इसके बाद 'झलक दिखला जा' के पहले सीजन, 'क्या हुआ तेरा वादा', 'प्यार को हो जाने दो' और 'कवच... काली शक्तियों से' जैसे शोज में नज़र आईं।

2009 में उन्होंने निर्देशक राजकुमार हिरानी की फिल्म '3 इडियट्स' से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इसके बाद 'कहने को हमसफर हैं' और 'ये मेरी फैमिली' जैसे वेब प्रोजेक्ट्स में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनका मानना है कि हर किरदार दर्शकों की स्मृति में लंबे समय तक बना रहना चाहिए — यही कसौटी उनके चयन का आधार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ 90% प्रस्ताव ठुकराना एक ऐसी विलासिता है जो हर अभिनेत्री को उपलब्ध नहीं होती। 'जस्सी' की सफलता ने उन्हें वह आर्थिक और सामाजिक पूँजी दी, जिसकी बदौलत वे 'ना' कहने का जोखिम उठा सकीं। यह चयन की स्वतंत्रता की कहानी है, लेकिन साथ ही यह भी याद दिलाती है कि ऐसी स्वतंत्रता पहले की कमाई हुई पहचान के बिना संभव नहीं होती।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोना सिंह ने 90% ऑफर क्यों ठुकराए?
मोना सिंह ने बताया कि वे सिर्फ लगातार काम करते रहने के बजाय ऐसे प्रोजेक्ट्स चुनना चाहती थीं जो उन्हें कलाकार के तौर पर आगे ले जाएँ। उनके अनुसार सही प्रोजेक्ट चुनना उतना ही ज़रूरी है जितना किसी को 'हाँ' कहना।
मोना सिंह का करियर कब और कैसे शुरू हुआ?
मोना सिंह ने 2003 में टीवी शो 'जस्सी जैसी कोई नहीं' से अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2009 में राजकुमार हिरानी की फिल्म '3 इडियट्स' से उन्होंने बड़े पर्दे पर कदम रखा।
मोना सिंह के हालिया प्रमुख प्रोजेक्ट्स कौन से हैं?
हाल के वर्षों में मोना सिंह 'मेड इन हेवन', 'लाल सिंह चड्ढा', 'बैड्स ऑफ बॉलीवुड' और 'कोहरा सीजन 2' जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में नज़र आई हैं। इन भूमिकाओं ने उन्हें 'जस्सी' की छवि से अलग एक परिपक्व अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।
मोना सिंह के अनुसार करियर में इंडस्ट्री और कलाकार की कितनी भूमिका होती है?
मोना सिंह के अनुसार करियर में 40 प्रतिशत भूमिका इंडस्ट्री की होती है, जो स्क्रिप्ट, प्लेटफॉर्म और अवसर देती है। शेष 60 प्रतिशत कलाकार खुद तय करता है — कि कौन से प्रोजेक्ट स्वीकार करने हैं और कौन से किरदार चुनने हैं।
'जस्सी जैसी कोई नहीं' के बाद मोना सिंह को किस चुनौती का सामना करना पड़ा?
शो की सफलता के बाद दर्शकों ने उन्हें एक आम, सीधी-सादी लड़की की छवि में इतनी गहराई से देखना शुरू किया कि उन्हें लगातार उसी तरह के किरदार ऑफर होने लगे। मोना ने बताया कि उस दौर में अपनी पहचान को नई दिशा देने के लिए उनके पास बहुत कम विकल्प थे।
राष्ट्र प्रेस
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