नाना पाटेकर के निधन पर शोक: डॉ. मिकी मेहता और वकील ओंकार शिरसागर ने साझा कीं यादें
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके करीबियों को गहरे शोक में डुबो दिया है। 8 अक्टूबर 2026 को हेल्थ गुरु डॉ. मिकी मेहता और वकील ओंकार शिरसागर ने नाना पाटेकर के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। दोनों ने अलग-अलग बातचीत में उनके सरल स्वभाव और बहुआयामी प्रतिभा को श्रद्धांजलि दी।
डॉ. मिकी मेहता की यादें
डॉ. मिकी मेहता ने नाना पाटेकर को एक असाधारण कलाकार बताया। उन्होंने कहा, 'वे बहुत ही अच्छे कलाकार, कमाल के विलेन, सपोर्टिंग एक्टर और ग्रेट कॉमेडियन थे। जैसा कि हमने उन्हें फिल्म वेलकम में देखा था।'
डॉ. मेहता ने बताया कि नाना पाटेकर बचपन में उनके इलाके में रहते थे, हालांकि दोनों की दोस्ती बाद में हुई। उन्होंने कहा, 'हमारी दोस्ती तब हुई जब वे मैडम अमृता फडवीस के फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। उस दौरान उन्हें लाने की ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी गई थी, और उनके घर जाने पर हमारे बीच बड़ी रोचक बातचीत हुई।'
दोनों की दूसरी मुलाकात दुबई में हुई, जब फिल्म वेलकम की शूटिंग चल रही थी। डॉ. मेहता ने बताया, 'वहाँ जिम में वर्कआउट के दौरान भी हमारी अच्छी बातें हुईं। तीसरी बार हम एक इवेंट में मिले। इस तरह तीन मुलाकातों में हमारा अच्छा बॉन्ड बन गया था।'
वकील ओंकार शिरसागर ने याद किया सरल स्वभाव
वकील ओंकार शिरसागर, जो नाना पाटेकर के घर के नज़दीक लंबे समय से रह रहे हैं, ने उनके ज़मीन से जुड़े स्वभाव को याद किया। उन्होंने बताया, 'वे सभी के साथ घुल-मिलकर रहते थे। इलाके में किसी के भी घर में कोई दिक्कत आए, तो वे उसे सुलझाने की कोशिश करते थे। गणपति उत्सव उनके घर में बड़े भव्य तरीके से मनाया जाता था।'
शिरसागर ने कहा कि नाना पाटेकर मुंबई से ज़्यादा अपने गाँव में ही रहना पसंद करते थे। उनके अनुसार, 'वे इधर ही ज़्यादा रहा करते थे; मुंबई में तो बस काम करने के लिए जाया करते थे। हर घर में किसी को लग ही नहीं रहा कि वे अब नहीं रहे।'
अंतिम संस्कार की तैयारियाँ
शिरसागर ने बताया कि नाना पाटेकर की अंतिम इच्छा थी कि उनका दाह संस्कार उनके गाँव में ही हो, जो उन्होंने कई इंटरव्यू में भी व्यक्त की थी। पार्थिव शरीर के शाम 4-5 बजे तक पहुँचने की संभावना बताई जा रही थी। गाँव के लोग स्वयंस्फूर्त होकर उस स्थान की सफाई कर रहे थे ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
आम जनता का शोक
शिरसागर के अनुसार पूरे इलाके में मातम का माहौल है। गौरतलब है कि नाना पाटेकर न केवल एक राष्ट्रीय स्तर के अभिनेता थे, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा। उनका निधन भारतीय सिनेमा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके प्रशंसक और परिजन अपनी अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं।