क्या जितिया व्रत के अवसर पर निधि झा ने अपने बेटे शिवाय के लिए दुआ मांगी?

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क्या जितिया व्रत के अवसर पर निधि झा ने अपने बेटे शिवाय के लिए दुआ मांगी?

सारांश

निधि झा ने जितिया व्रत पर अपने परिवार के साथ एक भावनात्मक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह अपने बेटे शिवाय के लिए दुआ मांगती हैं। इस वीडियो में परिवार के प्यार और त्याग की झलक दिखाई देती है। जानिए इस खास पल के बारे में और भी दिलचस्प बातें।

मुख्य बातें

जितिया व्रत माताओं के असीम प्रेम का प्रतीक है।
इस व्रत में माताएं निर्जला उपवास करती हैं।
वीडियो में पारिवारिक खुशियों की झलक है।
अभिनेत्री निधि झा ने अपने बेटे के लिए दुआ मांगी।
भोजपुरी गीत ने इस वीडियो को और भी खास बनाया।

मुंबई, 14 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की प्रसिद्ध अभिनेत्री निधि झा ने रविवार को जितिया व्रत के अवसर पर अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक विशेष वीडियो साझा किया, जिसमें उनके परिवार की झलक दिखाई दे रही है। इस वीडियो को उनके फैंस ने काफी पसंद किया है।

वीडियो की शुरुआत मंदिर में प्रवेश करने से होती है, जहां निधि झा अपने बेटे शिवाय के साथ दिखाई दे रही हैं। उनके पति यश कुमार भी इस पारिवारिक खुशी में शामिल हैं, और वह बेटे शिवाय के साथ खेलते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में निधि का पारंपरिक लुक बेहद सुंदर और साधारण है। उन्होंने काले रंग का सूट पहना हुआ है और सिर पर 'जय माता दी' की चुन्नी बांधी हुई है। इसी तरह, शिवाय के सिर पर भी 'जय माता दी' की चुन्नी है। वीडियो में कई प्यारे पल दिखाए गए हैं, जिसमें निधि अपने बेटे के साथ नाचती और उसे प्यार से चूमती हैं।

सम्पूर्ण वीडियो में एक सुखद, खुशहाल पारिवारिक माहौल देखने को मिलता है। इस वीडियो को साझा करते हुए निधि झा ने कैप्शन में लिखा है, 'भगवान तुम्हें हमेशा सुरक्षित रखें।'

अभिनेत्री ने इस वीडियो में बैकग्राउंड म्यूजिक के तौर पर भोजपुरी जितिया गीत 'अमर हो उमिरिया ललनवा के' का इस्तेमाल किया है, जिसे अलका सिंह पहाड़िया ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

ज्ञात रहे कि जितिया व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माताएं इस व्रत को अपने बच्चों की लंबी उम्र, सुरक्षा और सफलता के लिए रखती हैं। यह व्रत बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई क्षेत्रों में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

जितिया व्रत माताओं के असीम प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। माताएं इस व्रत में निर्जला उपवास करती हैं ताकि उनकी संतान हर विपत्ति से सुरक्षित रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जितिया व्रत न केवल माताओं के असीम प्रेम का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहराई को भी दर्शाता है। इस प्रकार के त्योहारों के माध्यम से हम अपने बच्चों के प्रति सुरक्षा और समर्पण की भावना को मजबूत कर सकते हैं।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जितिया व्रत क्या है?
जितिया व्रत एक हिंदू पर्व है, जिसमें माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सफलता के लिए उपवास करती हैं।
यह व्रत कब मनाया जाता है?
यह व्रत हर साल पितृ पक्ष के दौरान मनाया जाता है।
क्या इस व्रत में उपवास करना आवश्यक है?
हाँ, इस व्रत में माताएं निर्जला उपवास करती हैं।
जितिया व्रत का महत्व क्या है?
यह व्रत माताओं के प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है।
वीडियो में कौन सा गाना था?
वीडियो में 'अमर हो उमिरिया ललनवा के' गाना था, जिसे अलका सिंह पहाड़िया ने गाया है।
राष्ट्र प्रेस
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