प्रकाश झा: सिनेमा का असली मकसद मनोरंजन से परे, संवेदनशीलता भी है महत्वपूर्ण
सारांश
Key Takeaways
- सिनेमा का मुख्य उद्देश्य मनोरंजन से परे संवेदनशीलता है।
- दमन की सीमाएं पार होने पर क्रांति होना तय है।
- सिनेमा समाज का आईना है, जो असमानता और अन्याय पर बात कर सकता है।
- फिल्म निर्माताओं को हर संवाद की संवेदनशीलता समझनी चाहिए।
- थिएटर और ओटीटी के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।
मुंबई, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रकाश झा, जो फिल्म निर्माता और निर्देशक हैं, अक्सर गंभीर मुद्दों पर स्पष्टता से अपनी राय व्यक्त करते हैं। उन्होंने समाज में दमन और क्रांति के बीच के गहरे संबंध को उजागर करते हुए कहा कि जब दमन एक निश्चित सीमा को पार कर जाता है, तो क्रांति अपरिहार्य हो जाती है। यह एक ट्रेन दुर्घटना की तरह अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे सुलगते हुए फूटती है।
राष्ट्र प्रेस के साथ विशेष बातचीत में, प्रकाश झा ने कहा, "क्रांति एक स्वाभाविक और कुदरती प्रक्रिया है। ज्वालामुखी का फटना निश्चित है। दमन के कारण हमारे अंदर बहुत कुछ जमा होता है, और जब सहनशीलता की सीमा टूट जाती है, तब वह फूट पड़ता है। हम अचानक नींद से नहीं जागते। क्रांतियों का निर्माण भी धीरे-धीरे होता है। समय सबसे बड़ा शिक्षक है; यदि हम समय के साथ चलते हैं और उसे समझते हैं, तो वह हमें सब कुछ सिखा देता है।"
प्रकाश झा का मानना है कि सिनेमा समाज को आईना दिखाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह दमन, असमानता और अन्याय जैसे मुद्दों पर चर्चा कर सकता है, पर यह हमेशा जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए।
उन्होंने सिनेमा की जिम्मेदारी पर भी अपनी राय साझा की। उनका कहना है कि फिल्म निर्माता को हर संवाद, हर छवि और हर कहानी की संवेदनशीलता को समझना चाहिए। सिनेमा का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ना और खास भावनाएं उत्पन्न करना भी है। अगर आप कुछ कहना चाहते हैं, तो इसे संवेदनशीलता के साथ कहना चाहिए। लोगों से कतराना नहीं चाहिए और अस्थिरता नहीं फैलानी चाहिए। रचनात्मक तरीके से संवाद करना चाहिए और इसे दिलचस्प और आकर्षक बनाए रखना चाहिए।
झा ने थिएटर और ओटीटी प्लेटफार्मों के बीच बढ़ते अंतर पर भी चर्चा की। वे खुद जमशेदपुर में एक मल्टीप्लेक्स संचालित करते हैं, इसलिए उन्हें भारत के थिएटर इकोसिस्टम की वास्तविकता से अच्छी तरह अवगत हैं।
उन्होंने कहा कि बड़े बजट वाली मनोरंजक फिल्में स्क्रीन शेयरिंग में छोटी फिल्मों को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन हर फिल्म का अपना एक मार्केट होता है और हर फिल्म के लिए जगह होती है। ओटीटी पर सीधे रिलीज का निर्णय अक्सर व्यावसायिक कारणों से लिया जाता है, क्योंकि थिएटर में रिलीज के जोखिम और खर्च अधिक होते हैं।