'शोर से दूर रहकर ही कलाकार बेहतर काम कर सकते हैं', सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर रकुल प्रीत सिंह का बयान
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई, 13 मई। वर्तमान समय में सोशल मीडिया अभिनेताओं के लिए लोकप्रियता और आलोचना दोनों का एक समवर्ती स्रोत बन गया है। जहाँ प्रशंसक अपने पसंदीदा सितारों से जुड़ पाते हैं, वहीं ऑनलाइन ट्रोलिंग में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। इसी विषय पर अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह ने सोशल मीडिया के प्रभाव और उससे दूरी बनाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए।
मानसिक स्वास्थ्य और पेशेवर फोकस
रकुल प्रीत सिंह ने कहा, ''एक कलाकार के लिए यह अत्यावश्यक है कि वह सोशल मीडिया पर चल रहे शोर और लगातार आने वाली प्रतिक्रियाओं से खुद को अलग रखना सीखे। अगर कोई कलाकार इंटरनेट पर लिखी हर बात को दिल से लगाने लगे, तो उसका असर उसके काम और मानसिक स्थिति दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि वह अपनी ऊर्जा अपने काम पर लगाए।''
डिजिटल युग में बदलती परिस्थितियाँ
अपने अनुभव साझा करते हुए रकुल ने कहा, ''जब मैंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब सोशल मीडिया इतना व्यापक नहीं था। उस समय कलाकारों को आज की तरह तुरंत प्रतिक्रिया नहीं मिलती थी, जिससे मानसिक दबाव भी कम रहता था। उस दौर में आलोचना और चर्चा का तरीका अलग था, जबकि आज के समय में हर व्यक्ति अपनी राय तुरंत और मुखर होकर सोशल मीडिया पर व्यक्त करता है।''
उन्होंने आगे कहा, ''कोविड-19 महामारी के बाद सोशल मीडिया का उपयोग काफी बढ़ गया है। पिछले कुछ सालों में लोगों के पास अधिक समय था, जिससे हर विषय पर राय व्यक्त करने का प्रवृत्ति तेजी से बढ़ा। इसका परिणाम यह हुआ कि कलाकारों को लगातार आलोचना और टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है।''
ट्रोलिंग से निपटने की रणनीति
रकुल प्रीत सिंह ने कहा, ''एक अभिनेता को इस शोर से खुद को दूर रखना चाहिए। कलाकार का मुख्य काम अभिनय करना और अपने किरदार को बेहतर तरीके से निभाना है, न कि हर ऑनलाइन ट्रोलिंग का जवाब देना। अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया की हर बात को गंभीरता से लेने लगेगा, तो उसका ध्यान भटक जाएगा और उसके काम पर भी असर पड़ेगा।''
मानसिक दृढ़ता की आवश्यकता
उन्होंने कहा, ''मानसिक रूप से मजबूत रहना आज के समय में कलाकारों के लिए बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि हर अभिनेता को अपने चारों ओर एक सुरक्षा दीवार बनानी चाहिए, ताकि बाहरी नकारात्मकता सीधे उनके काम पर असर न डाल सके। कभी-कभी सोशल मीडिया से दूरी बनाना और केवल अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना ही सही तरीका होता है।''
यह विचार उस बढ़ती प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जहाँ कई प्रभावशाली व्यक्तित्व अपनी मानसिक कल्याण को प्राथमिकता देने के लिए सोशल मीडिया से सामयिक विराम लेते हैं। रकुल का यह दृष्टिकोण उस व्यापक संवाद का हिस्सा है जो डिजिटल युग में व्यक्तिगत सीमाएँ बनाने के महत्व पर केंद्रित है।