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संजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता 2 नवंबर तक बढ़ाई, सुलह के संकेत

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संजय कपूर संपत्ति विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता 2 नवंबर तक बढ़ाई, सुलह के संकेत

सारांश

संजय कपूर के निधन के बाद उनकी ₹30,000 करोड़ की संपत्ति और आरके फैमिली ट्रस्ट पर छिड़ी पारिवारिक जंग में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की मोहलत 2 नवंबर तक बढ़ाई। पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई में चल रही बातचीत में सुलह के संकेत मिल रहे हैं।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने संजय कपूर संपत्ति विवाद में मध्यस्थता की अवधि 2 नवंबर 2026 तक बढ़ाई।
विवाद ₹30,000 करोड़ की संपत्ति और 2017 में गठित आरके फैमिली ट्रस्ट को लेकर है।
मुख्य पक्षकार: माँ रानी कपूर , दूसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और बच्चे समायरा व कियान कपूर ।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया है; फीस आरके फैमिली ट्रस्ट देगा।
मध्यस्थता विफल होने पर सभी पक्षों को कानूनी कार्यवाही की अनुमति दी जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त 2026 को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति और आरके फैमिली ट्रस्ट से जुड़े पारिवारिक विवाद में मध्यस्थता की अवधि 2 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी है। न्यायालय ने कहा कि मध्यस्थता रिपोर्ट के अनुसार सभी पक्ष एक सकारात्मक समाधान के करीब हैं और बातचीत की प्रक्रिया संतोषजनक रूप से आगे बढ़ रही है।

विवाद की पृष्ठभूमि

उद्योगपति संजय कपूर का जून 2025 में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद उनकी अनुमानित ₹30,000 करोड़ की संपत्ति और व्यापारिक हिस्सेदारी को लेकर परिवार में विवाद उत्पन्न हो गया। इस विवाद में मुख्य रूप से उनकी माँ रानी कपूर, उनकी दूसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और पहली पत्नी करिश्मा कपूर से हुए बच्चों — समायरा और कियान कपूर — के अधिकारों को लेकर सवाल उठे।

गौरतलब है कि संजय कपूर और करिश्मा कपूर की शादी 2003 में हुई थी और दोनों 2016 में अलग हो गए थे। संजय कपूर ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए कई आर्थिक व्यवस्थाएँ की थीं।

आरके फैमिली ट्रस्ट पर विवाद

विवाद का केंद्र आरके फैमिली ट्रस्ट है, जिसे 2017 में गठित किया गया था। रानी कपूर का आरोप है कि इस ट्रस्ट को उनकी जानकारी और सहमति के बिना बनाया गया और परिवार की संपत्तियाँ इसमें शामिल कर दी गईं। उन्होंने ट्रस्ट को अवैध बताते हुए इसे समाप्त करने की माँग की और दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

दूसरी ओर, प्रिया सचदेव कपूर का कहना है कि ट्रस्ट नियमों के अनुसार गठित किया गया था और इसके माध्यम से लाभार्थियों के हितों की रक्षा की जा रही है। उन्होंने रानी कपूर को ट्रस्ट के न्यासी पद से हटाने का नोटिस भी जारी किया था और आरोप लगाया था कि ट्रस्ट के कामकाज में हस्तक्षेप किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख और मध्यस्थ की नियुक्ति

मामला बढ़ने के बाद यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा। न्यायालय ने दोनों पक्षों के बीच समाधान निकालने के लिए मध्यस्थता का मार्ग चुना और पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि मध्यस्थ की फीस आरके फैमिली ट्रस्ट की ओर से अदा की जाए।

सुलह की उम्मीद और आगे की राह

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि 2 नवंबर 2026 तक मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो सभी पक्षों को कानून के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि, न्यायालय ने उम्मीद जताई कि ऐसी स्थिति आने से पहले ही विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाएगा। यह मामला न केवल कपूर परिवार के लिए, बल्कि पारिवारिक ट्रस्ट कानून की व्याख्या के दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि जब तक ट्रस्ट की वैधता पर कोई स्पष्ट न्यायिक टिप्पणी नहीं आती, तब तक इसी तरह के पारिवारिक ट्रस्ट विवादों के लिए कोई मिसाल कैसे बनेगी। पूर्व CJI चंद्रचूड़ की नियुक्ति प्रक्रिया को विश्वसनीयता देती है, लेकिन ₹30,000 करोड़ के दाँव को देखते हुए आपसी सहमति की राह आसान नहीं होगी।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय कपूर संपत्ति विवाद क्या है?
यह विवाद दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की ₹30,000 करोड़ की संपत्ति और 2017 में गठित आरके फैमिली ट्रस्ट को लेकर है। जून 2025 में उनके निधन के बाद उनकी माँ रानी कपूर, दूसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और पहली पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चों के अधिकारों पर विवाद उत्पन्न हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कब तक बढ़ाई है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 6 अगस्त 2026 को मध्यस्थता की अवधि 2 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी है। न्यायालय ने कहा कि बातचीत संतोषजनक रूप से आगे बढ़ रही है और सभी पक्ष समाधान के करीब हैं।
आरके फैमिली ट्रस्ट पर विवाद क्यों है?
रानी कपूर का आरोप है कि 2017 में बना यह ट्रस्ट उनकी जानकारी और सहमति के बिना गठित किया गया और परिवार की संपत्तियाँ इसमें शामिल कर दी गईं। प्रिया सचदेव कपूर का कहना है कि ट्रस्ट नियमानुसार बनाया गया था और लाभार्थियों के हितों की रक्षा के लिए है।
इस मामले में मध्यस्थ कौन हैं?
सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि मध्यस्थ की फीस आरके फैमिली ट्रस्ट द्वारा अदा की जाए।
यदि मध्यस्थता विफल हो जाए तो क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि 2 नवंबर 2026 तक मध्यस्थता सफल नहीं होती, तो सभी पक्षों को कानून के अनुसार आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। हालाँकि, न्यायालय ने उम्मीद जताई है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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