संजय कपूर फैमिली ट्रस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत, मीडिएशन के दौरान कोई एकतरफा कदम नहीं
सारांश
मुख्य बातें
दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर के संपत्ति और फैमिली ट्रस्ट विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने 14 मई 2025 को स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक परिवार के बीच चल रही मीडिएशन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी पक्ष ऐसा कदम न उठाए जो समझौते की संभावनाओं को कमज़ोर करे। अदालत ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीडिएशन की प्रगति पर नज़र रखेगी और इस दौरान भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) किसी भी कंप्लायंस को लेकर दबाव नहीं बना सकता।
मामले की पृष्ठभूमि
संजय कपूर की माँ रानी कपूर ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर माँग की है कि संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर और अन्य पक्षकारों को 'आरके फैमिली ट्रस्ट' के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोका जाए। उनका तर्क है कि 7 मई को अदालत ने इस मामले में मीडिएशन शुरू कराई थी और जब तक यह प्रक्रिया जारी है, तब तक कोई प्रशासनिक निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। रानी कपूर ने 'रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा 8 मई को जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसके तहत 18 मई को कंपनी की बोर्ड मीटिंग बुलाई गई है।
दोनों पक्षों की दलीलें
रानी कपूर के वकील ने अदालत में दलील दी कि लगातार बोर्ड मीटिंग्स और प्रशासनिक फैसलों से फैमिली ट्रस्ट और उससे जुड़ी संपत्तियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, जिससे मीडिएशन प्रक्रिया कमज़ोर हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि रघुवंशी इन्वेस्टमेंट के पास बड़ी पारिवारिक संपत्तियाँ हैं और मीडिएशन के दौरान लिया गया कोई भी एकतरफा फैसला विवाद को और गहरा कर सकता है।
दूसरी ओर, प्रिया कपूर और अन्य पक्षकारों के वकीलों ने कहा कि विवादित बोर्ड मीटिंग्स पूरी तरह नियमों के दायरे में बुलाई गई थीं। उनका तर्क था कि ये मीटिंग्स RBI की गाइडलाइंस और कंपनियों में डायरेक्टर्स की नियुक्ति से जुड़े विधिक प्रावधानों के अनुसार आयोजित की गई थीं और यह केवल सामान्य कंपनी संचालन प्रक्रिया का हिस्सा है।
न्यायमूर्ति पारदीवाला की नसीहत
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला ने दोनों पक्षों को गहरी नसीहत देते हुए कहा, 'हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे। हम सिर्फ अपनी आत्मा लेकर जाएंगे। परिवार के सभी लोगों में मामले को सुलझाने की इच्छा होनी चाहिए और किसी को भी भारी मन से मीडिएटर के सामने मत जाओ।' यह टिप्पणी इस बात की ओर संकेत करती है कि अदालत दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दे रही है।
अदालत का निर्देश और आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मीडिएशन प्रक्रिया के दौरान RBI कंप्लायंस के नाम पर किसी पक्ष पर दबाव नहीं बना सकता। अदालत ने मीडिएशन की प्रगति की निगरानी स्वयं करने का निर्णय लिया है। गौरतलब है कि यह मामला न केवल एक प्रतिष्ठित औद्योगिक परिवार की विरासत से जुड़ा है, बल्कि इसमें बड़े कॉर्पोरेट ट्रस्ट और निवेश कंपनियों के प्रशासन का भी सवाल शामिल है। अगली सुनवाई में मीडिएशन की स्थिति रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी।