सुप्रीम कोर्ट ने आरआईपीएल बोर्ड बैठक को मंजूरी दी, निदेशक नियुक्ति और बैंक हस्ताक्षरकर्ता बदलाव पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 14 मई 2026 को रानी कपूर और प्रिया सचदेव कपूर के बीच चल रहे हाईप्रोफाइल आरके फैमिली ट्रस्ट विवाद में रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (आरआईपीएल) की प्रस्तावित बोर्ड बैठक पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बैठक के दौरान स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और अधिकृत बैंक हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव से जुड़े एजेंडा बिंदुओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मामले की पृष्ठभूमि
रानी कपूर दिवंगत व्यवसायी संजय कपूर की माँ हैं। उन्होंने 18 मई को निर्धारित आरआईपीएल की बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की माँग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में नई याचिका दायर की थी। यह याचिका 8 मई को आरआईपीएल की ओर से जारी उस नोटिस के बाद आई, जिसमें 18 मई को बोर्ड बैठक बुलाने की सूचना दी गई थी।
रानी कपूर ने इस बैठक को 'न्यायालय के निर्देश पर चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया को दरकिनार करने की धोखाधड़ी भरी कोशिश' करार दिया था और अनुरोध किया था कि जब तक मध्यस्थता पूरी न हो, तब तक बैठक पर रोक रहे।
न्यायालय का निर्देश
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि चूँकि विवाद पहले ही मध्यस्थता के लिए भेजा जा चुका है, इसलिए दोनों पक्षों को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिनका सीधा असर मध्यस्थता की कार्यवाही पर पड़े। पीठ ने कहा, 'हमने मध्यस्थ से पहले ही अनुरोध किया है कि वे कार्यवाही शुरू करें। हम विरोधी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे ऐसा कुछ भी न करें जिसका सीधा असर मध्यस्थता पर पड़े।'
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड बैठक तो आयोजित हो सकती है, लेकिन स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और कुछ बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं में बदलाव के एजेंडा बिंदुओं पर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
दोनों पक्षों की दलीलें
रानी कपूर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नवीन पाहवा ने तर्क दिया कि प्रस्तावित बोर्ड बैठक का उद्देश्य रानी कपूर को परिवार-नियंत्रित संस्थाओं के कामकाज से 'पूरी तरह बाहर' करना है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रुप कंपनियों में रानी कपूर की अधिकांश शेयरहोल्डिंग कथित तौर पर उनकी सहमति के बिना एक ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दी गई।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने रानी कपूर का पक्ष रखते हुए कहा, 'मेरी शेयरहोल्डिंग मेरे पीठ पीछे एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी गई। सभी कंपनियों में अधिकांश शेयर मेरे पास थे। मेरी बहू ने मेरी शेयरहोल्डिंग एक ट्रस्ट में ट्रांसफर कर दी।'
दूसरी ओर, प्रतिवादियों — प्रिया सचदेव कपूर और आरआईपीएल — की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निरीक्षण के बाद जारी निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। सिब्बल ने कहा कि यह बैठक मुख्यतः कानूनी और नियामक दायित्वों की पूर्ति के लिए बुलाई गई है, न कि मध्यस्थता के दौरान यथास्थिति बदलने के इरादे से।
न्यायालय की भावनात्मक अपील
जस्टिस पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों से ईमानदारी से आपसी सुलह का प्रयास करने का आग्रह किया। पीठ ने टिप्पणी की, 'वह 80 साल की महिला हैं। हम सब खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है — हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा ले जाते हैं। मामले को सुलझाने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए। सिर्फ इसलिए मध्यस्थ के सामने भारी मन से न जाएँ कि कोर्ट ने ऐसा कहा है।'
आगे की राह
सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थ से कार्यवाही जल्द शुरू करने का अनुरोध पहले ही कर दिया है। 18 मई की बोर्ड बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हो सकती है, परंतु विवादित एजेंडा बिंदुओं पर कोई निर्णय तब तक स्थगित रहेगा जब तक मध्यस्थता की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। यह मामला इस बात की मिसाल बनता जा रहा है कि कॉर्पोरेट नियामक दायित्व और पारिवारिक संपत्ति विवाद किस तरह न्यायिक प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।