संजय लीला भंसाली: अधूरे प्यार और कठिन बचपन से बना एक अद्भुत रोमांटिक सिनेमा
सारांश
Key Takeaways
- संजय लीला भंसाली का सिनेमा उनके व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित है।
- उनकी फिल्में रोमांस और भावनाओं का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती हैं।
- भंसाली ने अपनी कठिनाइयों को अपनी कला में बदल दिया है।
- उनका काम दर्शकों के दिलों में गहराई से उतरता है।
मुंबई, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। यह हमेशा कहा जाता है कि जो हम अपनी वास्तविक जिंदगी में नहीं कर पाते, उसे हम अपनी कल्पनाओं में जीने की कोशिश करते हैं। कल्पनाएँ पूरी तरह से स्वतंत्र होती हैं, और ऐसी स्वतंत्र कल्पनाओं को नया रंग और रूप देने का अद्भुत कौशल सिर्फ संजय लीला भंसाली में है।
निर्माता और निर्देशक संजय लीला भंसाली 24 फरवरी को अपना 63वां जन्मदिन मनाने जा रहे हैं। आज हम जानते हैं कि कैसे भंसाली ने अपनी कल्पनाओं के साथ एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया।
300 स्क्वायर फीट की चॉल में जहां 5 लोगों के बीच सांस लेना भी मुश्किल था, वहीं भंसाली ने फिल्मों की रचना करना शुरू किया। उन्होंने 'देवदास' और 'हम दिल दे चुके सनम' जैसी भावुक फिल्मों का निर्माण किया, जो उनके असली जीवन का एक अक्स हैं। भंसाली ने अपनी बचपन की कठिनाइयों और अनुभवों को फिल्मों के माध्यम से दर्शाया, और ये सीन दर्शकों के दिलों में बस गए।
फिल्म 'देवदास' में शाहरुख के पिता की मृत्यु का दृश्य आज भी लोगों को याद है, जब वह हाथ में शराब की बोतल लिए अपनी मां के पास बैठकर बड़बड़ाते हैं, 'अच्छा आदमी था लेकिन जल्दी चला गया।' यह दृश्य भंसाली की असल जिंदगी से प्रेरित है। उन्होंने पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता नशे के आदी थे। जब उनकी दादी का निधन हुआ, तब भी उनके पिता नशे में धुत होकर आए थे।
भंसाली अपनी रोमांटिक फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय, सलमान खान और ऐश्वर्या राय, तथा रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण जैसी जोड़ियों को पर्दे पर इंटेंस रोमांस के साथ प्रस्तुत किया है। उनकी फिल्मों में हमेशा असली रोमांस की झलक देखने को मिलती है, और इसके पीछे उनकी खुद की प्रेम कहानी भी एक कारण है।
निर्देशक ने एक बार कहा था कि उनकी जिंदगी में प्यार की हमेशा कमी रही है, और यही वजह है कि वह पर्दे पर रोमांस को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत कर पाते हैं। वह उन सभी भावनाओं को अपनी फिल्मों में जीते हैं, जो उनकी असल जिंदगी में नहीं हो पाईं।