शिल्पा शिरोडकर ने 35 साल बाद पुराने स्कूल में किया कथक, बोलीं — 'दिल खुशी से भर गया'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री शिल्पा शिरोडकर ने 35 साल का लंबा सफर तय करते हुए उस स्कूल की दहलीज़ एक बार फिर पार की, जहाँ उन्होंने बचपन में कथक की पहली थाप सीखी थी। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को उन्होंने इस भावनात्मक यात्रा की झलक इंस्टाग्राम पर साझा की, जिसमें वे उसी डांस फ्लोर पर कथक करती नज़र आईं।
इंस्टाग्राम पर भावुक पोस्ट
शिल्पा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे पूरी तल्लीनता से कथक की मुद्राएँ प्रस्तुत करती दिखीं। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने लिखा, '35 साल बाद उसी स्कूल में फिर से डांस फ्लोर पर हूँ, जहाँ मैंने गोपी कृष्णजी से कथक सीखा था। यहाँ पर आकर कितनी यादें ताज़ा हो गईं, वही जानी-पहचानी थाप और दिल खुशी से भर गया। फिर से डांस करके बहुत खुश हूँ।' यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुई और प्रशंसकों ने इसे खूब सराहा।
बहन नम्रता की प्रतिक्रिया
अभिनेत्री की बड़ी बहन और दक्षिण सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री नम्रता शिरोडकर ने भी इस पोस्ट के कमेंट सेक्शन में हार्ट इमोजी के साथ अपनी प्रतिक्रिया दी। यह छोटी-सी प्रतिक्रिया दोनों बहनों के बीच के गहरे बंधन को दर्शाती है। गौरतलब है कि दोनों शिरोडकर बहनें बॉलीवुड में अलग-अलग दौर में सक्रिय रही हैं।
करियर की शुरुआत और बड़ी पहचान
शिल्पा शिरोडकर ने वर्ष 1989 में मिथुन चक्रवर्ती और रेखा के साथ फिल्म 'भ्रष्टाचार' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। हालाँकि उन्हें असली पहचान फिल्म 'किशन कन्हैया' से मिली, जिसमें उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली। इसके बाद वर्ष 2000 में एम. एफ. हुसैन निर्देशित फिल्म 'गजगामिनी' में काम करने के बाद उन्होंने बॉलीवुड से लंबा विराम ले लिया।
सिल्वर स्क्रीन पर वापसी — 'जटाधरा'
करीब 25 साल के लंबे अंतराल के बाद शिल्पा ने सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म 'जटाधरा' से बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने 'शोभा' नाम का एक जटिल और रहस्यमयी किरदार निभाया, जो लालच और तंत्र-मंत्र की दुनिया से जुड़ा है। फिल्म में सुधीर बाबू ('शिवा' के रूप में), सोनाक्षी सिन्हा ('धन पिशाचिनी' के रूप में) और दिव्या खोसला भी अहम भूमिकाओं में हैं।
'जटाधरा' की कहानी
फिल्म की कहानी एक घोस्ट हंटर शिवा (सुधीर बाबू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भूत-प्रेतों के अस्तित्व को नकारने वाला तर्कवादी है और उसका मकसद लोगों के मन से भय मिटाना है। लेकिन उसका सामना एक रहस्यमयी घर और धन पिशाचिनी (सोनाक्षी सिन्हा) से होता है, जो उस प्राचीन खज़ाने की रक्षा करती है, जिसे इंसानी लालच ने जगाया था। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म महज़ एक हॉरर थ्रिलर न रहकर आध्यात्मिक और पौराणिक आयाम ले लेती है। शिल्पा की यह वापसी और उनका पुराने स्कूल से जुड़ाव दर्शाता है कि कला की जड़ें कितनी गहरी होती हैं।