क्या आप जानते हैं ‘एशिया इलेक्ट्रिक’ वाले शिवमणि का बर्थडे कब है?
सारांश
Key Takeaways
- अनंतकृष्णन शिवमणि का जन्म १ दिसंबर १९५९ को हुआ।
- उनका बैंड एशिया इलेक्ट्रिक है।
- उन्होंने कई प्रसिद्ध फिल्मों में ड्रम बजाए हैं।
- उन्हें २०१९ में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
- शिवमणि ने अभिनय में भी हाथ आजमाया है।
मुंबई, १ दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। ‘ड्रम्स शिवमणि’ एक ऐसा नाम है जो संगीत की दुनिया में खास पहचान रखता है। अनंतकृष्णन शिवमणि का जन्म १ दिसंबर १९५९ को चेन्नई में हुआ था। जब वह स्टेज पर आते हैं, तब ऐसा लगता है जैसे धरती की धड़कन उनके ड्रम में समा गई हो। चाहे ड्रम, ऑक्टोबन, दरबुका, घाटम, कंजीरा या उडुकाई, उनके हाथ में आते ही जादू शुरू हो जाता है। एक पल में कर्नाटक शास्त्रीय ताल, अगले में अफ्रीकी धुन, फिर रॉक, जैज और इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का संगम। उनकी संगीत प्रतिभा सुनने वालों को झूमने पर मजबूर कर देती है।
शिवमणि का अपना शानदार बैंड है, एशिया इलेक्ट्रिक, जिसमें उनके साथ हैं गिटार के बादशाह नीलाध्री कुमार, जैज लीजेंड लुईस बैंक्स और बेस के जादूगर रवि चारी। उनके लाइव कॉन्सर्ट में लोग घंटों तालियां बजाते हैं। दूसरा बैंड है सिल्क एंड श्राडा, जहां भी वो विश्व संगीत को एक सूत्र में पिरोते हैं।
हालांकि, कम ही लोग जानते हैं कि शिवमणि को करियर की शुरुआत में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके पहले कॉन्सर्ट में दर्शकों ने उन पर अंडे और बोतलें फेंकी थीं। उन्होंने कहा, “मेरे पहले जैज कॉन्सर्ट में लोग मुझसे खुश नहीं थे, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और और मेहनत की। आज सबको मेरा संगीत पसंद है।”
शिवमणि ने बॉलीवुड में भी कई हिट फिल्मों में अपने ड्रम का जादू बिखेरा है, जैसे ‘रोजा’, ‘ताल’, ‘लगान’, ‘दिल से’, ‘रंग दे बसंती’, ‘गुरु’, और ‘काबुल एक्सप्रेस’। एआर रहमान से लेकर तमिल सिनेमा के बड़े संगीतकारों तक, सभी उनके ड्रम के दीवाने हैं। क्रिकेट के मैदान में भी उनका जलवा है। चेन्नई सुपर किंग्स के हर मैच में जब वो ड्रम बजाते हैं, तो पूरा स्टेडियम उनकी ताल पर झूम उठता है। २००८ और २०१० की आईपीएल ट्रॉफी जीत के जश्न में भी उन्होंने अपनी ताल बिखेरी।
शिवमणि ने न केवल ताल वादन किया है, बल्कि फिल्मों में भी अभिनय किया है। १९८६ में तेलुगू फिल्म ‘पदमति संध्या रागम’ में नजर आए। लेकिन उनका असली मंच थिएटर और स्टूडियो है। २०१९ में भारतीय सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।