श्रीदेवी: अभिनय की दुनिया में भाषा की सीमाएँ तोड़कर बनीं सिनेमा की रानी
सारांश
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मुंबई, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड की प्रसिद्ध अदाकारा श्रीदेवी ने अपनी अदाओं और अभिनय से लाखों लोगों के दिलों में स्थान बनाया। उनका काम कड़ी मेहनत और हर चुनौती का सामना करने की लगन से भरा था। उन्होंने विभिन्न भाषाओं में अभिनय किया। शुरुआत में उन्हें हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं था। अपने करियर में उन्होंने हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम करके सिद्ध किया कि अगर इच्छाशक्ति और मेहनत हो, तो कोई भी भाषा या बाधा आपके मार्ग में नहीं आ सकती।
श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के एक छोटे से गाँव मीनमपट्टी में हुआ। उनके पिता का नाम अय्यपन और माँ का नाम राजेश्वरी था। उनके पिता एक वकील थे। उन्होंने छह साल
उन्हें 1971 में मलयालम फिल्म 'मूवी पूमबत्ता' के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी समय उन्होंने सीखा कि अभिनय केवल भाषा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि भावनाएँ और मेहनत सबसे महत्वपूर्ण हैं।
श्रीदेवी ने बॉलीवुड में 1979 में कदम रखा। उनकी पहली हिंदी फिल्म 'सोलहवां सावन' थी। हालांकि, उन्हें असली पहचान फिल्म 'हिम्मतवाला' से मिली। इस फिल्म में उनके अभिनय और नृत्य की अद्भुत कला ने दर्शकों को प्रभावित किया। शुरुआत में हिंदी बोलने में कठिनाई थी, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को कठिन परिश्रम और अभ्यास से पार किया। उनके इस संघर्ष ने कई नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का काम किया होगा।
उन्होंने कई यादगार भूमिकाएँ निभाई। 'चालबाज' में डबल रोल और 'सदमा' तथा 'चांदनी' जैसी फिल्मों में उनकी अभिनय की प्रशंसा पूरे देश ने की।
श्रीदेवी को कई पुरस्कार मिले, जिनमें 'चालबाज' और 'लम्हे' के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार शामिल हैं। 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। उन्होंने अपने करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया, जिनमें हिंदी, तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्में शामिल हैं।
24 फरवरी 2018 को दुबई में उनका निधन हो गया। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके जीवन से मिली सीख और संघर्ष हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।