सुखविंदर सिंह ने सुभाष घई से सीखी गायकी की सादगी और खुश रहने के तरीके
सारांश
Key Takeaways
- सुभाष घई का म्यूजिक स्कूल व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल संगीत के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।
- सुखविंदर सिंह ने सुभाष घई से गायकी की सादगी और खुश रहने के तरीके सीखे।
- समारोह का नाम डिवाउन जैमे बदलते समय के लिए उपयुक्त है।
- गायकी में भावनाएं कभी नहीं बदलतीं।
- संगीत की आत्मा समय और तकनीक के साथ नहीं बदलती।
मुंबई, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा के प्रमुख निर्देशक और निर्माता सुभाष घई के संगीत विद्यालय व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में तीन दिवसीय समारोह केडन्स फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें कई गायक अपनी अद्भुत आवाज़ का प्रदर्शन कर रहे हैं।
समारोह में प्रसिद्ध पंजाबी और बॉलीवुड गायक सुखविंदर सिंह भी शामिल हुए, जिन्होंने निर्माता की खुलकर प्रशंसा की। गायक ने बताया कि सुभाष घई के कारण ही उन्होंने खुश रहना सीखा है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "ऐसे संगीत समारोहों का आयोजन करना हमेशा अच्छा लगता है, और मैं इससे पहले भी इसका हिस्सा बन चुका हूं। विशेष बात यह है कि मैंने यहीं पर संगीत की बारीकियों को सीखा। मेरी मेहनत के पीछे सुभाष घई का महत्वपूर्ण योगदान है।" गायक ने आगे कहा, "मुझे सुभाष जी से बहुत प्यार है, और मैंने उनसे कई महत्वपूर्ण बातें सीखी हैं। गायकी की सादगी और खुश रहने का तरीका भी मैंने उनसे जाना है, क्योंकि खुश रहने के कुछ नियम होते हैं। यदि आप उनका पालन करते हैं, तो आप हर परिस्थिति में खुश रह सकते हैं। बहुत से लोग नहीं जानते कि सुभाष जी एक जीवंत और रंगीन व्यक्तित्व के धनी हैं, लेकिन उन्होंने जो योगदान हिंदी सिनेमा को दिया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा।"
आज की संगीत बनाते समय आने वाली चुनौतियों पर गायक ने कहा, "आज तकनीक बदल गई है, लेकिन भावनाएं वही हैं, क्योंकि भावनाएं कभी नहीं बदलतीं।" इसी प्रश्न पर सुभाष घई ने कहा कि बदलते समय को देखते हुए समारोह का नाम डिवाउन जैमे रखा गया है, क्योंकि जब तक आपके अंदर प्योर सोल या आत्मा नहीं है, तब तक संगीत को समझ पाना मुश्किल है। हर संगीत में भजन, सूफियानापन या मोहब्बत होती है, जो कभी नहीं बदलती।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों के समय में फैशन अलग था, और आज का फैशन अलग है, लेकिन आत्मा वही है। शरीर और फैशन बदल सकते हैं, लेकिन आत्मा नहीं, और यही बात संगीत पर भी लागू होती है। समय और तकनीक बदल सकती है, लेकिन संगीत नहीं।