माधुरी दीक्षित से शादी के किस्से पर सुरेश वाडेकर ने खुद बताई असली सच्चाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रख्यात पार्श्वगायक सुरेश वाडेकर का नाम भारतीय फिल्म संगीत के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल है जिनकी आवाज़ ने दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया। लेकिन संगीत की इस शानदार यात्रा के समानांतर उनकी निजी ज़िंदगी से जुड़ा एक किस्सा भी वर्षों तक चर्चा में बना रहा — कि बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के लिए उनका रिश्ता आया था, जो आगे नहीं बढ़ पाया। सालों बाद एक इंटरव्यू में वाडेकर ने इस कथित किस्से पर चुप्पी तोड़ी और स्पष्ट किया कि यह बात पूरी तरह सही नहीं है।
संगीत की जड़ें और शुरुआती सफर
सुरेश वाडेकर का जन्म 7 अगस्त 1955 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ। उनके पिता ईश्वर वाडेकर मिल में काम करते थे, पर घर में भजनों की गूँज हमेशा बनी रहती थी। पिता के सुरों ने ही बालक सुरेश के भीतर संगीत की ललक जगाई। परिवार का सपना था कि सुरेश एक दिन बड़े गायक बनें, और इसी सपने को पंख देने के लिए उन्होंने बचपन से ही तालीम लेनी शुरू कर दी।
गुरु पंडित जियालाल वसंत के मार्गदर्शन में उन्होंने शास्त्रीय संगीत की बारीकियाँ सीखीं, जिसने उनकी आवाज़ को एक अलग गहराई और पहचान दी।
प्रतिभा की पहचान और फिल्मी पारी की शुरुआत
साल 1976 में सुरेश वाडेकर ने प्रतिष्ठित 'सुर-सिंगार' संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उनकी आवाज़ ने संगीतकार रविंद्र जैन और जयदेव जैसे दिग्गजों का ध्यान खींचा। रविंद्र जैन ने उन्हें राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म 'पहेली' में गाने का पहला अवसर दिया। इसके बाद जयदेव ने फिल्म 'गमन' में उनसे मशहूर गजल 'सीने में जलन, आँखों में तूफान सा क्यों है' गवाई, जिसने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया।
सुपरहिट गीतों का सिलसिला
साल 1981 में संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने उन्हें फिल्म 'क्रोधी' में लता मंगेशकर के साथ गाने का मौका दिया। इसके बाद 'प्यासा सावन' का 'मेघा रे मेघा रे', 'प्रेम रोग' के 'मैं हूँ प्रेम रोगी' और 'मेरी किस्मत में तू नहीं शायद', तथा 'सदमा' का 'ऐ ज़िंदगी गले लगा ले' — इन गीतों ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
'प्रेम रोग' के बाद उनकी आवाज़ ऋषि कपूर के लिए विशेष रूप से पसंद की जाने लगी। 'राम तेरी गंगा मैली', 'हिना' और 'प्रेम ग्रंथ' जैसी फिल्मों में उनके गीत बेहद लोकप्रिय हुए। उन्होंने गुलज़ार, आर.डी. बर्मन, ए.आर. रहमान, विशाल भारद्वाज और इलैयाराजा जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया।
माधुरी दीक्षित से जुड़े किस्से पर वाडेकर की सफाई
वर्षों से मीडिया में यह दावा किया जाता रहा कि जब अभिनेत्री माधुरी दीक्षित का रिश्ता सुरेश वाडेकर के लिए आया, तो परिवार ने उन्हें 'दुबली' बताकर नापसंद कर दिया और बात आगे नहीं बढ़ी। हालाँकि, एक इंटरव्यू में वाडेकर ने इस कथित किस्से को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसा कोई रिश्ता उनके पास आया ही नहीं था। उन्होंने माधुरी दीक्षित के प्रति सम्मान जताते हुए उन्हें एक अच्छी दोस्त बताया। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बॉलीवुड की अफवाहें अक्सर बिना पड़ताल के वर्षों तक प्रचलित रहती हैं।
संगीत शिक्षा, पुरस्कार और विरासत
फिल्मों के अलावा सुरेश वाडेकर ने हिंदी, मराठी, भोजपुरी और कोंकणी सहित कई भाषाओं में भक्ति संगीत भी गाया। बाद के वर्षों में उन्होंने आजीवासन म्यूजिक अकादमी के ज़रिये नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने का काम भी किया।
संगीत में उनके अप्रतिम योगदान को देश ने कई सम्मानों से नवाज़ा। साल 2011 में मराठी फिल्म 'मी सिंधुताई सपकाल' के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें लता मंगेशकर पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और साल 2020 में भारत सरकार की ओर से प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से भी अलंकृत किया गया।