सुषमा सेठ जन्मदिन: 'हम लोग' की दादी इमरती देवी को हटाने पर दर्शकों ने दूरदर्शन को भेजे हज़ारों खत
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी सिनेमा और टेलीविज़न की वरिष्ठ अभिनेत्री सुषमा सेठ का जन्म 20 जून 1936 को दिल्ली में हुआ था। अपने छह दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने माँ, दादी और नानी के अनेक यादगार किरदार निभाए, परंतु दूरदर्शन के ऐतिहासिक पारिवारिक सीरियल 'हम लोग' में उनकी भूमिका दादी इमरती देवी ने उन्हें करोड़ों भारतीय घरों में एक अपने जैसी शख्सियत बना दिया। यह लगाव इतना गहरा था कि जब कहानी में इस किरदार को समाप्त करने की योजना बनी, तो दर्शकों ने दूरदर्शन और निर्माताओं को हज़ारों चिट्ठियाँ लिखकर विरोध दर्ज कराया।
दिल्ली से अमेरिका तक: अभिनय की नींव
सुषमा सेठ का परिवार कला और संस्कृति से जुड़ा था, जिसके चलते बचपन से ही उनमें अभिनय और संगीत के प्रति गहरी रुचि जागी। दिल्ली में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे अमेरिका गईं, जहाँ उन्होंने नाटक और अभिनय की विधिवत शिक्षा ग्रहण की। विदेश से लौटने के बाद उन्होंने थिएटर को अपना प्रमुख माध्यम चुना — उस दौर में जब मंच से अधिक आमदनी की उम्मीद नहीं थी, तब भी उनके लिए यह महज़ पेशा नहीं, बल्कि जुनून था।
दिल्ली में कई बड़े रंगकर्मियों के साथ काम करते हुए उन्होंने थिएटर की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई। लगभग दो दशकों तक मंच पर अभिनय करने के बाद उन्होंने छोटे पर्दे की ओर कदम बढ़ाया।
'हम लोग' की दादी और दर्शकों का अभूतपूर्व प्रेम
दूरदर्शन का 'हम लोग' भारत का पहला लोकप्रिय पारिवारिक धारावाहिक था, और इसमें सुषमा सेठ द्वारा निभाई गई दादी इमरती देवी की भूमिका दर्शकों के दिल में घर कर गई। वे परदे पर किसी काल्पनिक पात्र से अधिक, घर की असली बुज़ुर्ग सदस्य जैसी लगने लगीं।
जब कहानी में एक ऐसा मोड़ आया जहाँ इस किरदार को कहानी से बाहर करने की योजना बनाई गई, तो दर्शकों की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित रही। दूरदर्शन और शो के निर्माताओं के पास हज़ारों चिट्ठियाँ पहुँचीं, जिनमें दर्शकों ने भावनात्मक अपील करते हुए दादी के किरदार को बनाए रखने की गुज़ारिश की। सुषमा सेठ ने स्वयं कई साक्षात्कारों में स्वीकार किया था कि दर्शकों के इसी अपार प्यार के कारण किरदार को आगे बढ़ाया गया। हालाँकि, कहानी की आवश्यकता के अनुसार अंततः दादी की मृत्यु दिखाई गई।
42 की उम्र में फिल्मों में नई शुरुआत
छोटे पर्दे पर मिली सफलता के बाद सुषमा सेठ ने 42 वर्ष की आयु में बड़े पर्दे पर कदम रखा। उनकी पहली फिल्म 'जुनून' थी, जो 1978 में प्रदर्शित हुई। जिस उम्र में अधिकांश कलाकार अपने करियर का शिखर पार कर चुके होते हैं, उस उम्र में सुषमा ने एक नई यात्रा शुरू की और उसमें सफलता भी अर्जित की।
इसके बाद उन्होंने 'सिलसिला', 'प्रेम रोग', 'तवायफ', 'नगीना', 'चाँदनी', 'दीवाना', 'धड़कन', 'कभी खुशी कभी ग़म' और 'कल हो ना हो' जैसी प्रमुख फिल्मों में अपनी छाप छोड़ी। शाहरुख खान, ऋतिक रोशन, अक्षय कुमार, ऋषि कपूर, अनिल कपूर और प्रीति जिंटा जैसे दिग्गज सितारों के साथ उन्होंने स्क्रीन साझा की।
पुरस्कार और विरासत
फिल्म 'तवायफ' में अमीना बाई के किरदार के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के लिए नामांकन प्राप्त हुआ। दशकों की अभिनय यात्रा और अनगिनत यादगार भूमिकाओं के बावजूद, आज भी दर्शकों के स्मृति में वे सबसे पहले 'हम लोग' की दादी इमरती देवी के रूप में जीवित हैं — यही उनकी सबसे बड़ी और अमिट विरासत है।