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सुरैया जन्मदिन विशेष: शूटिंग देखने पहुंची और निर्देशक ने थमा दिया रोल, ऐसे बनीं हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार

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सुरैया जन्मदिन विशेष: शूटिंग देखने पहुंची और निर्देशक ने थमा दिया रोल, ऐसे बनीं हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार

सारांश

शूटिंग देखने की जिज्ञासा ने एक लड़की को हिंदी सिनेमा का सुपरस्टार बना दिया। निर्देशक नानूभाई वकील की एक नजर, और सुरैया जमाल शेख का वह सफर शुरू हुआ जिसने चार दशकों तक दर्शकों के दिल पर राज किया — अभिनय से, गायकी से, और एक अधूरी प्रेम कहानी से।

मुख्य बातें

सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था; परिवार बाद में मुंबई आ बसा।
फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो पहुंचीं तो निर्देशक नानूभाई वकील ने तुरंत मुमताज महल का किरदार सौंप दिया।
संगीतकार नौशाद ने उन्हें फिल्म 'शारदा' में गाने का मौका दिया; उनके कई गाने उस दौर के सबसे लोकप्रिय गानों में रहे।
अभिनेता देव आनंद के साथ उनकी प्रेम कहानी चर्चित रही, लेकिन पारिवारिक व धार्मिक कारणों से विवाह नहीं हो सका।
वह उस दौर की सर्वाधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में थीं; 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

हिंदी सिनेमा की दिग्गज अदाकारा और गायिका सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। अपनी बेमिसाल खूबसूरती, सशक्त अभिनय और मीठी आवाज के दम पर उन्होंने उस दौर में वह मुकाम हासिल किया जो किसी भी सुपरस्टार को रश्क दिला दे। खास बात यह है कि फिल्मों में आना उनका कोई सोचा-समझा इरादा नहीं था — एक शूटिंग देखने की जिज्ञासा ने उन्हें हिंदी सिनेमा का चमकता सितारा बना दिया।

बचपन और फिल्मी माहौल से पहली पहचान

जब सुरैया महज एक वर्ष की थीं, तब उनका परिवार लाहौर से मुंबई आकर बस गया। उनके मामा एम. जहूर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, जिसके चलते सुरैया को बचपन से ही फिल्मी दुनिया की झलक मिलती रही। बेहद छोटी उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के बच्चों के कार्यक्रम में गाना शुरू कर दिया था। उनकी सुरीली आवाज ने श्रोताओं के दिल जीत लिए और यहीं से उनकी एक अलग पहचान बनने लगी।

मुख्य घटनाक्रम: शूटिंग देखने गईं, मिल गया रोल

सुरैया के जीवन का निर्णायक मोड़ तब आया जब वह अपने मामा के साथ फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो पहुंचीं। वह महज एक दर्शक की हैसियत से वहाँ गई थीं, लेकिन वहाँ मौजूद निर्देशक नानूभाई वकील की नजर उन पर पड़ी। सुरैया की मासूमियत, सादगी और आकर्षक व्यक्तित्व ने निर्देशक को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने तत्काल उन्हें फिल्म में मुमताज महल का किरदार सौंप दिया। यह एक ऐसा मौका था जो किसी सपने जैसा लगे — और यहीं से सुरैया के फिल्मी सफर की असली इबारत लिखी जाने लगी।

गायकी: नौशाद की नजर और 'शारदा' से पहचान

अभिनय के साथ-साथ सुरैया की गायकी भी उनकी खास पहचान बनी। मशहूर संगीतकार नौशाद ने जब उनकी आवाज सुनी तो वह गहरे प्रभावित हुए और उन्हें फिल्म 'शारदा' में गाने का अवसर दिया। इस फिल्म में 'मेरे दिल की सजन समझा दो' और 'ये रेल हमारे घर की देखो' जैसे गाने उस दौर में खूब लोकप्रिय हुए। इसके बाद 'दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है', 'तू मेरा चांद, मैं तेरी चांदनी', 'वो पास रहे या दूर', 'ओ दूर जानेवाले', 'मन मोर हुआ मतवाला', 'धीरे-धीरे आ रे बादल', 'चुप-चुप खड़े हो जरूर कोई बात है' और 'ये ना थी हमारी किस्मत' जैसे गाने भी उनकी आवाज की बदौलत अमर हो गए।

फिल्मी करियर और देव आनंद के साथ अधूरी प्रेम कहानी

सुरैया ने 'अनमोल घड़ी', 'प्यार की जीत', 'विद्या', 'दिल्लगी', 'बड़ी बहन', 'शायर', 'दास्तान', 'अफसर', 'सनम', 'दीवाना' और 'मिर्जा गालिब' समेत दर्जनों सफल फिल्मों में अपनी अभिनय-प्रतिभा का लोहा मनवाया। अभिनेता देव आनंद के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को बेहद पसंद आई — दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया। उनकी प्रेम कहानी भी उतनी ही चर्चित रही, लेकिन पारिवारिक और धार्मिक कारणों से यह रिश्ता विवाह तक नहीं पहुंच सका। यह अधूरी प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे चर्चित और भावुक अध्यायों में गिनी जाती है।

स्टारडम, विरासत और अंतिम विदाई

सुरैया का स्टारडम इस कदर बड़ा था कि उनके घर के बाहर प्रशंसकों की भीड़ जुटी रहती थी — लोग उनकी एक झलक के लिए घंटों प्रतीक्षा करते थे। वह उस दौर की सर्वाधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में शुमार थीं और उनके प्रशंसक भारत से बाहर भी फैले हुए थे। करीब चार दशकों तक मनोरंजन जगत में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया और सादगी से जीवन बिताया। 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की आयु में सुरैया ने इस दुनिया को अलविदा कहा — लेकिन उनकी आवाज और अदाकारी का जादू आज भी जिंदा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न सोशल मीडिया से। यह उल्लेखनीय है कि एक ऐसी अभिनेत्री जो अपनी पीढ़ी की सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाली कलाकार थी, उसने कभी शादी नहीं की और जीवन के अंतिम वर्ष सार्वजनिक नजरों से दूर सादगी में बिताए। देव आनंद के साथ उनकी अधूरी प्रेम कहानी आज भी मुख्यधारा की चर्चाओं में उतनी जगह नहीं पाती जितनी मिलनी चाहिए — जबकि यह हिंदी सिनेमा के सामाजिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरैया कौन थीं और उनका हिंदी सिनेमा में क्या योगदान है?
सुरैया जमाल शेख हिंदी सिनेमा की उन गिनी-चुनी कलाकारों में थीं जो एक साथ बेहतरीन अभिनेत्री और गायिका दोनों थीं। उन्होंने 'अनमोल घड़ी', 'मिर्जा गालिब', 'दिल्लगी' जैसी दर्जनों सफल फिल्मों में काम किया और अपनी पीढ़ी की सबसे लोकप्रिय व सर्वाधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में शुमार रहीं।
सुरैया को पहला फिल्मी रोल कैसे मिला?
सुरैया फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो गई थीं, जहाँ निर्देशक नानूभाई वकील ने उनकी मासूमियत और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उन्हें तुरंत मुमताज महल का किरदार दे दिया। यह संयोग ही उनके करियर की असली शुरुआत बना।
सुरैया और देव आनंद की प्रेम कहानी क्यों अधूरी रह गई?
सुरैया और देव आनंद ने कई फिल्मों में साथ काम किया और दोनों के बीच प्रेम संबंध भी रहे, लेकिन पारिवारिक और धार्मिक कारणों से उनका विवाह नहीं हो सका। यह हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी प्रेम कहानियों में गिनी जाती है।
सुरैया का जन्म कब और कहाँ हुआ था और उनका निधन कब हुआ?
सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। महज एक वर्ष की आयु में उनका परिवार मुंबई आ गया। 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
सुरैया के सबसे मशहूर गाने कौन से हैं?
सुरैया के मशहूर गानों में 'मेरे दिल की सजन समझा दो', 'तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी', 'वो पास रहे या दूर', 'ओ दूर जानेवाले', 'धीरे-धीरे आ रे बादल' और 'ये ना थी हमारी किस्मत' शामिल हैं। संगीतकार नौशाद के साथ उनका सहयोग विशेष रूप से यादगार रहा।
राष्ट्र प्रेस
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