31 जुलाई 2026
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सुरैया: शूटिंग देखने पहुंची और निर्देशक ने थमा दिया रोल, ऐसे बनीं हिंदी सिनेमा की महानायिका

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सुरैया: शूटिंग देखने पहुंची और निर्देशक ने थमा दिया रोल, ऐसे बनीं हिंदी सिनेमा की महानायिका

सारांश

शूटिंग देखने गई एक लड़की को निर्देशक ने देखते ही रोल दे दिया — और हिंदी सिनेमा को मिली सुरैया। लाहौर में जन्मी, मुंबई में पली-बढ़ी इस अदाकारा ने अभिनय और गायकी दोनों में वह मुकाम हासिल किया जो कम ही कलाकारों को नसीब होता है।

मुख्य बातें

सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था।
वह मोहन स्टूडियो में फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने गई थीं, जहाँ निर्देशक नानूभाई वकील ने उन्हें मुमताज महल का किरदार सौंपा।
संगीतकार नौशाद ने उन्हें फिल्म 'शारदा' में गाने का पहला बड़ा मौका दिया।
अभिनेता देव आनंद के साथ उनकी जोड़ी और प्रेम कहानी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी दास्तानों में शामिल है।
'अनमोल घड़ी' , 'मिर्जा गालिब' , 'दिल्लगी' समेत दर्जनों सफल फिल्मों में काम किया।
31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की आयु में निधन हुआ; उन्होंने कभी विवाह नहीं किया।

हिंदी सिनेमा की दिग्गज अदाकारा और गायिका सुरैया जमाल शेख का फिल्मी सफर किसी इत्तेफाक से कम नहीं था। जिस लड़की ने कभी परदे पर आने का सपना नहीं देखा था, वह एक दिन मुंबई के मोहन स्टूडियो में शूटिंग देखने पहुंची और निर्देशक की एक नज़र ने उनकी पूरी ज़िंदगी बदल दी। यही वह मोड़ था जहाँ से हिंदी सिनेमा को अपनी सबसे चमकदार सितारों में से एक मिली।

लाहौर से मुंबई तक का सफर

सुरैया का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। जब वह महज एक वर्ष की थीं, तब उनका परिवार मुंबई आकर बस गया। उनके मामा एम. जहूर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे, जिसके चलते सुरैया को बचपन से ही फिल्मी दुनिया की झलक मिलती रही। बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के बच्चों के कार्यक्रम में गाना शुरू कर दिया था, और उनकी मीठी आवाज़ श्रोताओं के दिलों में जगह बनाने लगी।

वह पल जिसने करियर की नींव रखी

सुरैया के जीवन का निर्णायक क्षण तब आया जब वह अपने मामा के साथ फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो पहुंचीं। वहाँ मौजूद निर्देशक नानूभाई वकील की नज़र उन पर पड़ी। सुरैया की मासूमियत, सादगी और आकर्षक व्यक्तित्व ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने उसी वक्त सुरैया को फिल्म में मुमताज महल का किरदार सौंप दिया। यह मौका किसी सपने से कम नहीं था — और यहीं से उनके फिल्मी करियर की असली शुरुआत हुई।

गायकी में भी छाई धूम

अभिनय के साथ-साथ सुरैया की गायकी ने भी अलग पहचान बनाई। मशहूर संगीतकार नौशाद ने जब उनकी आवाज़ सुनी तो वे काफी प्रभावित हुए और उन्हें फिल्म 'शारदा' में गाने का मौका दिया। इस फिल्म के गाने 'मेरे दिल की सजन समझा दो' और 'ये रेल हमारे घर की देखो' उस दौर में खूब लोकप्रिय हुए। इसके अलावा 'दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है', 'तू मेरा चांद, मैं तेरी चांदनी', 'वो पास रहे या दूर', 'ओ दूर जानेवाले', 'धीरे-धीरे आ रे बादल', 'चुप-चुप खड़े हो जरूर कोई बात है' और 'ये ना थी हमारी किस्मत' जैसे नगमों ने उन्हें गायिका के रूप में भी अमर कर दिया।

फिल्मी करियर और देव आनंद से अधूरी प्रेम कहानी

सुरैया ने 'अनमोल घड़ी', 'प्यार की जीत', 'विद्या', 'दिल्लगी', 'बड़ी बहन', 'शायर', 'दास्तान', 'अफसर', 'सनम', 'दीवाना' और 'मिर्जा गालिब' समेत दर्जनों सफल फिल्मों में अपनी अदाकारी का जलवा दिखाया। अभिनेता देव आनंद के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को बेहद पसंद आई। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी प्रेम कहानी भी उस दौर में खूब चर्चा में रही। हालाँकि परिवार और धर्म के कारण दोनों की शादी नहीं हो सकी — यह प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी दास्तानों में गिनी जाती है।

स्टारडम और विरासत

सुरैया का स्टारडम इतना बड़ा था कि उनके घर के बाहर प्रशंसकों की भीड़ लगी रहती थी — लोग उनकी एक झलक के लिए घंटों इंतज़ार करते थे। वह उस दौर की सर्वाधिक पारिश्रमिक पाने वाली अभिनेत्रियों में शामिल थीं और उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि विदेशों में भी उनके प्रशंसक थे। करीब चार दशकों तक मनोरंजन जगत से जुड़े रहने के बाद सुरैया ने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया और अपना शेष जीवन सादगी से बिताया। 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की आयु में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा — लेकिन उनकी आवाज़ और अदाकारी की विरासत आज भी ज़िंदा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरैया को पहला फिल्मी रोल कैसे मिला?
सुरैया मुंबई के मोहन स्टूडियो में फिल्म 'ताजमहल' की शूटिंग देखने गई थीं, जहाँ निर्देशक नानूभाई वकील ने उनकी मासूमियत और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उन्हें तुरंत मुमताज महल का किरदार दे दिया। यही उनके फिल्मी करियर की असली शुरुआत थी।
सुरैया का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
सुरैया जमाल शेख का जन्म 15 जून 1929 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। एक वर्ष की आयु में ही उनका परिवार मुंबई आकर बस गया था।
सुरैया और देव आनंद की प्रेम कहानी क्यों अधूरी रही?
सुरैया और देव आनंद ने कई फिल्मों में साथ काम किया और दोनों के बीच प्रेम संबंध भी रहे, लेकिन परिवार और धर्म की वजह से उनकी शादी नहीं हो सकी। यह प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अधूरी दास्तानों में गिनी जाती है।
सुरैया के सबसे मशहूर गाने कौन से हैं?
सुरैया के मशहूर गानों में 'मेरे दिल की सजन समझा दो', 'तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी', 'दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है', 'ओ दूर जानेवाले' और 'ये ना थी हमारी किस्मत' शामिल हैं। संगीतकार नौशाद ने उन्हें फिल्म 'शारदा' में पहला बड़ा गायन अवसर दिया था।
सुरैया का निधन कब हुआ?
सुरैया का निधन 31 जनवरी 2004 को 74 वर्ष की आयु में हुआ। उन्होंने कभी विवाह नहीं किया और जीवन के अंतिम वर्ष सादगी से बिताए।
राष्ट्र प्रेस
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